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Car Insurance Claim Rejection: ये 6 गलतियां कभी न करें, वरना डूब सकता है पूरा पैसा

Car Insurance Claim Rejection का सामना करना किसी भी गाड़ी मालिक के लिए सबसे बड़ा झटका होता है – प्रीमियम समय पर भरा, गाड़ी का नुकसान भी असली था, फिर भी कंपनी ने पैसा देने से मना कर दिया।

हर साल हजारों कार मालिकों को यह झटका झेलना पड़ता है, और ज्यादातर मामलों में वजह कोई धोखाधड़ी नहीं, बल्कि पॉलिसी की छोटी-छोटी शर्तों की अनजाने में हुई अनदेखी होती है।

इस गाइड में जानेंगे Car Insurance Claim Rejection के सबसे बड़े कारण क्या हैं, कौन सा नया नियम आपकी सुरक्षा करता है, और क्लेम रिजेक्ट होने से कैसे बचा जा सकता है।

Car Insurance Claim Rejection के सबसे बड़े कारण

Car Insurance Claim Rejection के 6 बड़े कारण इन्फोग्राफिक

सबसे आम कारण है वैध ड्राइविंग लाइसेंस न होना। अगर हादसे के समय ड्राइवर के पास सही कैटेगरी का वैध लाइसेंस नहीं था, तो क्लेम सीधे रिजेक्ट हो सकता है।

शराब पीकर गाड़ी चलाना भी पूरी तरह क्लेम खारिज करने का कारण बनता है – यह भारतीय कानून के तहत एक स्टैचुटरी वायलेशन है, जिसमें कोई आंशिक भुगतान भी नहीं मिलता।

हादसे की जानकारी देर से देना भी बड़ी समस्या है। ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां 24-48 घंटे के भीतर सूचना मांगती हैं, और ज्यादा देरी होने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है।

इसके अलावा, गाड़ी में बिना बताए किए गए मॉडिफिकेशन, पर्सनल कार का कमर्शियल इस्तेमाल, सर्वेयर के इंस्पेक्शन से पहले रिपेयर करवाना, और पॉलिसी में इंजन नंबर या मालिक के नाम जैसी गलत जानकारी भी Car Insurance Claim Rejection की बड़ी वजहें हैं।

IRDAI का नया नियम जो आपकी मदद करता है

IRDAI के 2024 के दिशानिर्देशों के मुताबिक, इंश्योरेंस कंपनियां सिर्फ दस्तावेज छूटने या मामूली देरी के आधार पर क्लेम रिजेक्ट नहीं कर सकतीं, अगर उस देरी से नुकसान का आकलन प्रभावित नहीं हुआ हो।

यह नियम बहुत कम लोगों को पता है, लेकिन यह पॉलिसीहोल्डर्स को गलत तरीके से Car Insurance Claim Rejection से बचाने के लिए बनाया गया है।

Car Insurance Claim Rejection से बचने के लिए क्या करें

हादसा होते ही तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को सूचना दें, चाहे नुकसान कितना भी छोटा क्यों न लगे।

सर्वेयर के आने और इंस्पेक्शन पूरा होने से पहले गाड़ी की मरम्मत शुरू न करें, वरना इसे अनऑथराइज्ड रिपेयर माना जा सकता है।

अगर गाड़ी में कोई भी बदलाव (जैसे CNG किट या अतिरिक्त एक्सेसरीज) करवाया है, तो इसकी जानकारी तुरंत इंश्योरेंस कंपनी को दें और पॉलिसी अपडेट करवाएं।

पॉलिसी दस्तावेज में इंजन नंबर, चेसिस नंबर, और मालिक का नाम RC के मुताबिक सही है या नहीं, यह खरीदते समय ही जांच लें।

मेडिकल इंश्योरेंस की तरह ही, महंगाई की वजह से क्लेम की रकम भी बढ़ती जा रही है, इसलिए सही कवरेज चुनना और शर्तें ध्यान से पढ़ना पहले से कहीं ज्यादा जरूरी हो गया है।

SMC Insurance की रिपोर्ट के मुताबिक, ज्यादातर रिजेक्शन धोखाधड़ी की वजह से नहीं, बल्कि पॉलिसी की शर्तों की जानकारी न होने की वजह से होते हैं।

अगर फिर भी Claim Reject हो जाए तो क्या करें

सबसे पहले इंश्योरेंस कंपनी से रिजेक्शन का लिखित कारण मांगें, और उसे अपनी पॉलिसी की शर्तों से मिलाकर देखें।

अगर जवाब संतोषजनक न लगे, तो कंपनी के ग्रीवांस सेल में शिकायत दर्ज करें। हर इंश्योरेंस कंपनी के पास यह सुविधा होनी अनिवार्य है।

अगर बात न बने, तो IRDAI के Bima Bharosa पोर्टल पर शिकायत करें, या इंश्योरेंस ओम्बड्समैन के पास जाएं, जो ₹50 लाख तक के विवादों को सुनने का अधिकार रखता है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

Car Insurance Claim Rejection का सबसे बड़ा कारण क्या है?
वैध ड्राइविंग लाइसेंस न होना और शराब पीकर गाड़ी चलाना सबसे आम और सबसे सख्त कारण हैं, जिनमें क्लेम लगभग हमेशा पूरी तरह रिजेक्ट होता है।

क्या सिर्फ दस्तावेज छूटने पर क्लेम रिजेक्ट हो सकता है?
IRDAI के 2024 के नियम के मुताबिक, अगर देरी या दस्तावेज छूटने से नुकसान का आकलन प्रभावित नहीं होता, तो सिर्फ इस आधार पर क्लेम रिजेक्ट नहीं किया जा सकता।

हादसे की सूचना कितने समय के भीतर देनी चाहिए?
ज्यादातर इंश्योरेंस कंपनियां 24-48 घंटे के भीतर सूचना देने की शर्त रखती हैं, इसलिए जितनी जल्दी हो सके कंपनी को बताना बेहतर रहता है।

अगर क्लेम रिजेक्ट हो जाए तो कहां शिकायत करें?
पहले इंश्योरेंस कंपनी के ग्रीवांस सेल में शिकायत करें, और संतोषजनक जवाब न मिलने पर IRDAI के Bima Bharosa पोर्टल या इंश्योरेंस ओम्बड्समैन के पास जाएं।

क्या गाड़ी में मॉडिफिकेशन करवाने से क्लेम पर असर पड़ता है?
हां, अगर मॉडिफिकेशन की जानकारी इंश्योरेंस कंपनी को नहीं दी गई है, तो इससे जुड़े नुकसान पर Car Insurance Claim Rejection हो सकता है।

आगे और समाचार पढ़ें:

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। यह कानूनी या बीमा संबंधी सलाह नहीं है। कोई भी फैसला लेने से पहले अपनी पॉलिसी दस्तावेज ध्यान से पढ़ें या इंश्योरेंस कंपनी/सलाहकार से संपर्क करें। सटीकता की गारंटी नहीं है।

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