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झारखंड और पश्चिम बंगाल में CISF का बड़ा अभियान, 10 हजार टन से ज्यादा अवैध कोयला बरामद

झारखंड और पश्चिम बंगाल में अवैध कोयला खनन, चोरी और तस्करी के खिलाफ केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने बड़ी कार्रवाई की है। अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो महीनों में विशेष अभियानों के दौरान दोनों राज्यों की कोयला खदानों से 10 हजार टन से अधिक अवैध और चोरी किया गया कोयला बरामद किया गया है। यह कार्रवाई केंद्र सरकार के ‘जीरो कोल लीकेज’ अभियान के तहत की जा रही है।

CISF को कोयला खदानों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने के साथ-साथ अवैध खनन, भंडारण और परिवहन के खिलाफ तलाशी एवं जब्ती की शक्तियां भी दी गई हैं। इस अभियान का उद्देश्य देश के महत्वपूर्ण ऊर्जा संसाधन को चोरी और संगठित तस्करी से बचाना है।

झारखंड में 12 हजार से ज्यादा जवान तैनात

अधिकारियों के मुताबिक, झारखंड और पश्चिम बंगाल की 10 प्रमुख इकाइयों की सुरक्षा के लिए लगभग 12 हजार CISF personnel तैनात किए गए हैं। ये जवान कोयला खदानों, भंडारण क्षेत्रों और परिवहन मार्गों पर निगरानी कर रहे हैं।

दोनों राज्यों में कोयला चोरी का नेटवर्क कई स्तरों पर काम करता है। इसमें अवैध खनन, कोयले का छिपाकर भंडारण, बिना अनुमति परिवहन और संगठित तरीके से बिक्री जैसी गतिविधियां शामिल हो सकती हैं। CISF ने इन गतिविधियों पर नियंत्रण के लिए खुफिया सूचनाओं, निगरानी और स्थानीय प्रशासन के साथ समन्वय को प्राथमिकता दी है।

अभियानों के दौरान कई वाहनों और संदिग्ध लोगों को भी पकड़े जाने की जानकारी सामने आई है। हालांकि, गिरफ्तारियों और जब्त किए गए वाहनों की विस्तृत संख्या अलग-अलग अभियानों के अनुसार बदल सकती है।

गृह मंत्रालय के निर्देश के बाद तेज हुआ अभियानझारखंड

कोयला चोरी के खिलाफ कार्रवाई को जुलाई 2026 में उस समय गति मिली, जब केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने CISF को ‘जीरो कोल लीकेज’ अभियान शुरू करने का निर्देश दिया। इसका लक्ष्य कोयला खदानों से होने वाली चोरी, अवैध निकासी और संगठित आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाना है।

सरकार ने CISF के कुछ नामित अधिकारियों को माइंस एंड मिनरल्स (डेवलपमेंट एंड रेगुलेशन) एक्ट, 1957 यानी MMDR एक्ट के तहत तलाशी और जब्ती से संबंधित अधिकार दिए हैं। इन अधिकारों के कारण बल अब अवैध रूप से खनन या संग्रह किए गए खनिजों के खिलाफ अधिक प्रत्यक्ष कार्रवाई कर सकता है।

जुलाई में जारी सरकारी जानकारी के अनुसार, CISF ने झारखंड और पश्चिम बंगाल में विशेष अभियानों के दौरान 428 मीट्रिक टन से अधिक अवैध कोयला बरामद किया था। इसके बाद भी लगातार अभियान जारी रहे।

झारखंड के धनबाद और आसनसोल क्षेत्र पर विशेष नजर

CISF के अभियान में झारखंड के धनबाद स्थित भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (BCCL) और पश्चिम बंगाल के आसनसोल क्षेत्र में स्थित ईस्टर्न कोलफील्ड्स लिमिटेड (ECL) की इकाइयां प्रमुख रूप से शामिल हैं। इसके अलावा, सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के अंतर्गत आने वाले इलाकों में भी कार्रवाई की गई है।

धनबाद और आसनसोल देश के महत्वपूर्ण कोयला उत्पादक क्षेत्रों में गिने जाते हैं। यहां कोयला खनन और परिवहन से जुड़ी बड़ी आर्थिक गतिविधियां होती हैं। ऐसे में अवैध खनन और चोरी से सरकारी कंपनियों को आर्थिक नुकसान होने के साथ-साथ सुरक्षा और पर्यावरण से जुड़ी समस्याएं भी पैदा हो सकती हैं।

CISF महानिदेशक प्रवीर रंजन ने 16 से 18 सितंबर के बीच दोनों राज्यों के कोयला क्षेत्रों का दौरा किया। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की, तैनात जवानों से बातचीत की और कोयला कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बैठक की।

तकनीक और खुफिया जानकारी का इस्तेमाल

अवैध कोयला गतिविधियों पर नजर रखने के लिए CISF कई आधुनिक तरीकों का इस्तेमाल कर रही है। इनमें CCTV निगरानी, कोयला परिवहन की वास्तविक समय में निगरानी, स्थानीय स्तर से मिलने वाली खुफिया जानकारी और अचानक छापेमारी शामिल हैं।

कुछ क्षेत्रों में ड्रोन निगरानी और कठिन भौगोलिक इलाकों में विशेष टीमों की तैनाती पर भी जोर दिया जा रहा है। जंगलों, सुनसान क्षेत्रों और खदानों के आसपास छिपाकर रखे गए कोयले का पता लगाना अभियान की महत्वपूर्ण चुनौती है।

अगस्त में झारखंड के रामगढ़ जिले के कुज्जू क्षेत्र में CISF और CCL की संयुक्त कार्रवाई के दौरान 866.152 मीट्रिक टन अवैध कोयला बरामद किया गया था। अधिकारियों ने बताया कि कोयला अलग-अलग स्थानों पर छिपाकर रखा गया था।

अवैध कोयला कारोबार पर असर

अवैध कोयला खनन और चोरी से सरकारी राजस्व, कोयला कंपनियों के उत्पादन और परिवहन व्यवस्था पर असर पड़ सकता है। इसके अलावा, बिना सुरक्षा मानकों के खनन करने से दुर्घटनाओं और पर्यावरणीय नुकसान का खतरा भी बढ़ जाता है।

CISF की लगातार कार्रवाई से अवैध कारोबार में शामिल नेटवर्क पर दबाव बढ़ने की संभावना है। हालांकि, केवल बरामदगी और जब्ती से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए स्थानीय पुलिस, जिला प्रशासन, खनन विभाग और कोयला कंपनियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी होगा।

जांच के बाद दोषी पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जाएगी। साथ ही, जब्त किए गए कोयले और वाहनों के संबंध में भी कानूनी प्रक्रिया पूरी की जाएगी।

अमरपाली खदान की सुरक्षा भी CISF को

अधिकारियों के अनुसार, झारखंड के चतरा जिले में स्थित अमरपाली ओपन-कास्ट खदान की सुरक्षा भी CISF को सौंपने का निर्णय लिया गया है। इससे बल की जिम्मेदारी और बढ़ेगी। यह क्षेत्र सुरक्षा की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जाता है और यहां निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने की तैयारी की जा रही है।

CISF ने खनन सुरक्षा और तकनीकी प्रशिक्षण को भी प्राथमिकता देने की बात कही है। धनबाद स्थित IIT-ISM में बल के जवानों के लिए खनन सुरक्षा, साइबर सुरक्षा और अन्य विषयों पर अल्पकालिक प्रशिक्षण आयोजित करने की योजना बताई गई है।

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निष्कर्ष

झारखंड और पश्चिम बंगाल में 10 हजार टन से अधिक अवैध कोयले की बरामदगी को कोयला चोरी के खिलाफ चल रहे अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है। केंद्र सरकार के ‘जीरो कोल लीकेज’ लक्ष्य के तहत CISF ने सुरक्षा, तलाशी और जब्ती की कार्रवाई तेज की है।

अब अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि अवैध खनन के स्रोतों, परिवहन नेटवर्क और इससे जुड़े लोगों के खिलाफ कितनी प्रभावी कानूनी कार्रवाई होती है। लगातार निगरानी, तकनीक का इस्तेमाल और विभिन्न एजेंसियों के बीच सहयोग से कोयला चोरी पर नियंत्रण पाने की कोशिश जारी है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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