उत्तराखंड में मानसून एक बार फिर सक्रिय है और राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश का दौर जारी है। भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के देहरादून केंद्र ने सोमवार को देहरादून समेत छह जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की है। मौसम विभाग के अनुसार देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और बागेश्वर में भारी बारिश की संभावना है। इन सभी जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया गया है। लगातार बारिश के कारण प्रदेश में भूस्खलन और सड़क पर मलबा आने की घटनाएं भी सामने आ रही हैं। राज्य में करीब 80 सड़कें बंद होने की जानकारी सामने आई है।
मौसम विभाग की चेतावनी के बाद प्रशासन ने संवेदनशील इलाकों में निगरानी बढ़ा दी है। खासकर पर्वतीय जिलों में नदी-नालों के जलस्तर, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और सड़क मार्गों पर नजर रखी जा रही है। अधिकारियों ने लोगों से मौसम खराब होने की स्थिति में अनावश्यक यात्रा से बचने और स्थानीय प्रशासन की सलाह का पालन करने को कहा है।
उत्तराखंड के छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट
मौसम विभाग ने सोमवार को जिन छह जिलों के लिए येलो अलर्ट जारी किया है, उनमें देहरादून, उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और बागेश्वर शामिल हैं। इन क्षेत्रों में कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने की संभावना है। पहाड़ी इलाकों में कम समय में अधिक बारिश होने पर अचानक जलप्रवाह बढ़ने और भूस्खलन का खतरा पैदा हो सकता है।
देहरादून समेत आसपास के क्षेत्रों में बारिश का असर सामान्य जनजीवन पर भी पड़ सकता है। निचले इलाकों में जलभराव और पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क संपर्क प्रभावित होने की आशंका बनी हुई है।
येलो अलर्ट का अर्थ है कि मौसम की संभावित स्थिति को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है। विशेष रूप से पहाड़ी इलाकों में यात्रा करने वाले लोगों को मौसम और सड़क की ताजा स्थिति की जानकारी लेकर ही आगे बढ़ने की सलाह दी जाती है।
80 सड़कें बंद, आवाजाही पर असर
लगातार बारिश के कारण उत्तराखंड में सड़क संपर्क प्रभावित हुआ है। बारिश और भूस्खलन के चलते करीब 80 सड़कें बंद होने की सूचना है। कई स्थानों पर पहाड़ों से मलबा और पत्थर सड़कों पर आने के कारण यातायात रोकना पड़ा है।
पर्वतीय राज्य में सड़कें अक्सर पहाड़ी ढलानों के बीच से होकर गुजरती हैं। ऐसे में तेज बारिश के दौरान सड़क के ऊपर से मलबा गिरने का खतरा बढ़ जाता है। कई बार कुछ ही मिनटों में सड़क का बड़ा हिस्सा मलबे से ढक जाता है।
पौड़ी में भूस्खलन से सड़क बंद
बारिश के बीच पौड़ी जिले के बीरोंखाल ब्लॉक में रविवार को भूस्खलन की घटना सामने आई। पहाड़ी का एक हिस्सा दरकने के बाद मलबा सड़क पर आ गया, जिससे आवाजाही प्रभावित हुई।
इस तरह की घटनाएं मानसून के दौरान उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों में आम हो जाती हैं। लगातार बारिश के कारण पहाड़ों की मिट्टी ढीली पड़ जाती है और ढलानों पर दबाव बढ़ने से भूस्खलन की संभावना बढ़ जाती है।
प्रशासन के सामने चुनौती यह है कि सड़कें खोलने के साथ-साथ यह भी सुनिश्चित किया जाए कि दोबारा मलबा आने की स्थिति में किसी व्यक्ति की जान खतरे में न पड़े।
उत्तराखंड में नदियों और बरसाती नालों पर नजर
उत्तराखंड में भारी बारिश के दौरान नदियों और बरसाती नालों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है। पिछले कुछ दिनों में राज्य के कई हिस्सों में लगातार बारिश के कारण अलकनंदा, मंदाकिनी और भागीरथी जैसी नदियों के जलस्तर में वृद्धि देखी गई थी। कई स्थानों पर नदियां चेतावनी और खतरे के निशान के आसपास पहुंची थीं।
ऐसे हालात में नदी किनारे रहने वाले लोगों और पर्यटकों के लिए विशेष सावधानी जरूरी है। प्रशासन को भी संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाने और जरूरत पड़ने पर लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने की तैयारी रखनी होती है।
पहले भी जारी हो चुके हैं ऑरेंज और येलो अलर्ट
उत्तराखंड में अगस्त के दौरान मौसम विभाग कई चरणों में भारी से बहुत भारी बारिश की चेतावनी जारी कर चुका है। 9 अगस्त को बागेश्वर, पिथौरागढ़ और चमोली में ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया था, जबकि 10 अगस्त को देहरादून, बागेश्वर, नैनीताल और चंपावत समेत कई क्षेत्रों में भारी बारिश की संभावना जताई गई थी।
इसके अलावा 14 से 17 अगस्त के बीच भी राज्य में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना को देखते हुए कई जिलों में ऑरेंज और येलो अलर्ट जारी किए गए थे। मौसम विभाग ने भूस्खलन, मलबा गिरने, सड़क अवरुद्ध होने, जलभराव और नदियों-नालों का जलस्तर बढ़ने की आशंका जताई थी।
प्रशासन ने बढ़ाई निगरानी
भारी बारिश की चेतावनी के बीच राज्य प्रशासन ने आपदा प्रबंधन तंत्र को सतर्क रहने के निर्देश दिए हैं। इससे पहले भी मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने आपदा प्रबंधन और राहत एजेंसियों को हाई अलर्ट पर रहने तथा संवेदनशील इलाकों, नदियों और बरसाती नालों की निगरानी बढ़ाने के निर्देश दिए थे। जिलाधिकारियों को जिला आपातकालीन संचालन केंद्रों को 24 घंटे सक्रिय रखने और किसी भी घटना पर तत्काल कार्रवाई करने को कहा गया था।
बारिश से सड़कें बंद होने की स्थिति में लोक निर्माण विभाग, राष्ट्रीय राजमार्ग से जुड़े विभाग और स्थानीय प्रशासन मलबा हटाने के लिए मशीनरी तैनात करते हैं। हालांकि, लगातार बारिश के कारण कई जगह राहत और सड़क बहाली का काम चुनौतीपूर्ण हो जाता है।
पर्यटकों और तीर्थयात्रियों को सावधानी की जरूरत
उत्तराखंड में मानसून के दौरान बड़ी संख्या में पर्यटक और चारधाम यात्री भी मौजूद रहते हैं। बारिश के दौरान पहाड़ी मार्गों पर यात्रा करना जोखिम भरा हो सकता है। सड़क पर अचानक मलबा आने, पत्थर गिरने या नदी-नाले का जलस्तर बढ़ने की घटनाएं यात्रा को प्रभावित कर सकती हैं।
प्रशासन पहले भी लोगों से अपील कर चुका है कि खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा से बचें और चारधाम या अन्य पर्वतीय क्षेत्रों की यात्रा से पहले मौसम विभाग की ताजा चेतावनी जरूर देखें।
यात्रियों के लिए सबसे महत्वपूर्ण सलाह यही है कि किसी बंद या संवेदनशील मार्ग को पार करने की कोशिश न करें। प्रशासन द्वारा रोके गए रास्तों पर आगे बढ़ना जानलेवा साबित हो सकता है।
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आने वाले दिनों में भी मौसम पर नजर
मौसम विभाग के पूर्वानुमान बताते हैं कि उत्तराखंड में मानसून की गतिविधियां फिलहाल पूरी तरह कमजोर नहीं हुई हैं। देहरादून और अन्य हिस्सों में आने वाले दिनों में भी बादल छाए रहने तथा बारिश और गरज-चमक की संभावना बनी रह सकती है। IMD के हालिया स्थानीय पूर्वानुमानों में देहरादून के लिए भी बारिश और गरज-चमक की गतिविधियां दर्ज की गई हैं।
ऐसे में प्रशासन और आम लोगों दोनों के लिए सतर्क रहना जरूरी है। पहाड़ी क्षेत्रों में मौसम कुछ ही घंटों में बदल सकता है, इसलिए मौसम की चेतावनी को हल्के में लेना नुकसानदायक हो सकता है।
निष्कर्ष
उत्तराखंड में मानसून की सक्रियता के बीच देहरादून समेत छह जिलों में भारी बारिश का येलो अलर्ट जारी किया गया है। उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, नैनीताल और बागेश्वर के साथ देहरादून में भी भारी बारिश की संभावना जताई गई है। वहीं लगातार बारिश और भूस्खलन के कारण राज्य की करीब 80 सड़कें बंद होने की सूचना है।
फिलहाल प्रशासन का जोर संवेदनशील इलाकों की निगरानी, बंद सड़कों को खोलने और किसी भी आपदा की स्थिति में तत्काल राहत पहुंचाने पर है। लोगों से भी अपील की गई है कि वे खराब मौसम में अनावश्यक यात्रा न करें और स्थानीय प्रशासन तथा मौसम विभाग की चेतावनियों का पालन करें।
उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में मानसून के दौरान सावधानी ही सबसे बड़ी सुरक्षा है। भारी बारिश के बीच नदियों, नालों, भूस्खलन संभावित क्षेत्रों और पहाड़ी सड़कों से दूरी बनाए रखना न केवल यात्रियों बल्कि स्थानीय लोगों के लिए भी बेहद जरूरी है।

