YASHWANT VERMA: दिल्ली हाई कोर्ट के जज यशवंत वर्मा इन दिनों सुर्खियों में हैं। उनके सरकारी बंगले में आग लगने के बाद एक चौंकाने वाला मामला सामने आया। जब फायर ब्रिगेड की टीम आग बुझाने पहुंची, तो बंगले के अंदर भारी मात्रा में नकदी मिली। नोटों का ढेर देखकर दमकलकर्मियों के होश उड़ गए। तुरंत ही इस बारे में वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई, जिसके बाद पुलिस को भी बुलाया गया। मामला बढ़ता देख सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस वर्मा का ट्रांसफर दिल्ली से इलाहाबाद हाई कोर्ट करने की सिफारिश कर दी।

कैसे सामने आया मामला?
14 मार्च को होली के दिन यह घटना हुई, जब जस्टिस वर्मा घर पर नहीं थे। उनके परिवार ने आग लगने के बाद फायर ब्रिगेड और पुलिस को बुलाया। आग तो बुझा दी गई, लेकिन इसी दौरान बंगले के अंदर नोटों का ढेर देखकर हड़कंप मच गया। इसके बाद यह मामला तेजी से मीडिया और न्यायपालिका में चर्चा का विषय बन गया। मामला गंभीर होता देख भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) संजीव खन्ना ने फौरन सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की बैठक बुलाई। इसके बाद जस्टिस यशवंत वर्मा को वापस इलाहाबाद हाई कोर्ट भेजने की सिफारिश की गई। यह केवल शुरुआती कार्रवाई है, और इस मामले की आगे भी जांच हो सकती है।

कौन हैं YASHWANT VERMA?
जस्टिस यशवंत वर्मा का जन्म 6 जनवरी 1969 को इलाहाबाद में हुआ। उन्होंने दिल्ली यूनिवर्सिटी के हंसराज कॉलेज से बी.कॉम (ऑनर्स) किया और फिर रीवा यूनिवर्सिटी से कानून की पढ़ाई पूरी की। 8 अगस्त 1992 को उन्होंने एडवोकेट के रूप में अपने करियर की शुरुआत की। वकालत के दौरान उन्होंने संवैधानिक कानून, श्रम और औद्योगिक कानून, कॉर्पोरेट कानून, कराधान और अन्य संबंधित क्षेत्रों में काम किया।

2006 में उन्हें इलाहाबाद हाई कोर्ट में विशेष वकील नियुक्त किया गया। 2012 से 2013 तक उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार के मुख्य स्थायी अधिवक्ता (चीफ स्टैंडिंग काउंसिल) के रूप में सेवाएं दीं। इसके बाद उन्हें सीनियर एडवोकेट बनाया गया और 13 अक्टूबर 2014 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में अतिरिक्त न्यायाधीश नियुक्त कर दिया गया। 1 फरवरी 2016 को उन्हें स्थायी जज के रूप में पदोन्नति मिली। 11 अक्टूबर 2021 को उनका तबादला दिल्ली हाई कोर्ट में कर दिया गया।

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