/ Mar 11, 2026
All rights reserved with Masterstroke Media Private Limited.
UTTARAKHAND URBAN DEVELOPMENT: केंद्र सरकार ने उत्तराखंड में शहरी भूमि प्रबंधन और नियोजन सुधारों को गति देने के लिए एक महत्वपूर्ण वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया है। पूंजीगत निवेश के लिए राज्यों को विशेष सहायता योजना (SASCI) 2025–26 के अंतर्गत उत्तराखंड को ₹264.50 करोड़ की विशेष सहायता (ऋण) स्वीकृत की गई है। यह धनराशि आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय की अनुशंसा पर राज्य को उपलब्ध कराई गई है, जिससे प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास और आधुनिक नियोजन प्रणालियों को लागू करने में बड़ी मदद मिलेगी।
उत्तराखंड सरकार ने इस वित्तीय सहायता के लिए पीएफएमएस (PFMS) पोर्टल के माध्यम से अपना प्रस्ताव केंद्र को प्रस्तुत किया था। राज्य के प्रस्ताव को स्वीकार करते हुए सक्षम प्राधिकारी ने शहरी विकास से जुड़ी विभिन्न पूंजीगत परियोजनाओं के लिए इस राशि को मंजूरी दी है। यह विशेष सहायता मुख्य रूप से अर्बन लैंड मैनेजमेंट और प्लानिंग रिफॉर्म्स (Urban Land and Planning Reforms) के कार्यों पर खर्च की जाएगी। केंद्र सरकार द्वारा यह पूरी राशि एकमुश्त किस्त के रूप में राज्य को जारी कर दी गई है, जिससे परियोजनाओं के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।

इस वित्तीय सहायता का मुख्य उद्देश्य UTTARAKHAND URBAN DEVELOPMENT को बढ़ावा देना है। राज्य सरकार इन सुधारों के माध्यम से भूमि प्रबंधन प्रणाली को अधिक आधुनिक और पारदर्शी बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इससे न केवल शहरी नियोजन बेहतर होगा, बल्कि आम नागरिकों को मिलने वाली मूलभूत सुविधाओं के विस्तार में भी सुगमता आएगी। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस सहायता को राज्य के योजनाबद्ध शहरी विकास और मजबूत आधारभूत ढांचे के निर्माण में एक मील का पत्थर बताया है।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस महत्वपूर्ण सहायता के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और केंद्र सरकार का आभार व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री के नेतृत्व में राज्यों के बुनियादी ढांचे के विकास को लगातार प्रोत्साहन मिल रहा है। उन्होंने विश्वास दिलाया कि इस राशि का उपयोग शहरों में बेहतर जनसुविधाएं प्रदान करने और सुव्यवस्थित शहरी ढांचे को विकसित करने के लिए किया जाएगा। (UTTARAKHAND URBAN DEVELOPMENT)

जनगणना 2011 के आंकड़ों के अनुसार, उत्तराखंड की लगभग 30.2% आबादी (करीब 30.5 लाख) शहरों में निवास करती है। यह आंकड़ा राष्ट्रीय औसत के काफी करीब है, लेकिन राज्य में शहरी आबादी की वार्षिक वृद्धि दर (4.0%) ग्रामीण क्षेत्रों (1.2%) की तुलना में काफी तीव्र है। देहरादून, हरिद्वार और हल्द्वानी जैसे शहर तथा दक्षिण के औद्योगिक केंद्र इस शहरीकरण के मुख्य केंद्र बनकर उभरे हैं। पर्यटन और तीर्थाटन के कारण सीजन के दौरान बुनियादी ढांचे पर पड़ने वाला अतिरिक्त दबाव उत्तराखंड के शहरी विकास को अन्य राज्यों से अलग और चुनौतीपूर्ण बनाता है।
उत्तराखंड में शहरीकरण की प्रक्रिया कई जटिलताओं से घिरी हुई है, जिन्हें विभाग चरणबद्ध तरीके से सुलझाने का प्रयास कर रहा है:
भौगोलिक विषमता: पहाड़ी क्षेत्रों में ढलान और विषम परिस्थितियों के कारण ड्रेनेज, सीवरेज और सड़कों का निर्माण मैदानी क्षेत्रों की तुलना में काफी महंगा और कठिन होता है।
संस्थागत बिखराव: विभिन्न सेवाओं (जैसे पानी, बिजली, सड़क) के लिए अलग-अलग एजेंसियों के होने से समन्वय की कमी रहती है, जिससे परियोजनाओं में देरी होती है।
विरासत में मिले कानून: राज्य गठन के बाद भी कई स्थानीय शासन नियम उत्तर प्रदेश के पुराने कानूनों पर आधारित हैं, जिन्हें आधुनिक जरूरतों के हिसाब से संशोधित किया जा रहा है।
पर्यटन का दबाव: पर्यटन सीजन में अचानक बढ़ने वाली आबादी के लिए अस्थायी पेयजल और सफाई व्यवस्था करना एक बड़ी प्रशासनिक चुनौती है।(UTTARAKHAND URBAN DEVELOPMENT)
देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज
All Rights Reserved with Masterstroke Media Private Limited.