UTTARAKHAND HEAVY RAIN: उत्तराखंड में मौजूदा समय में मानसून ने पूरी ताकत के साथ तबाही मचाई हुई है। पिछले दो दिनों में चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, टिहरी और उत्तरकाशी जिलों में भारी बारिश, बादल फटने और भूस्खलन की घटनाओं ने जनजीवन को अस्त-व्यस्त कर दिया है। इन घटनाओं में अब तक कम से कम छह लोगों की मौत हो चुकी है, जबकि 11 लोग लापता बताए जा रहे हैं। प्रभावित क्षेत्रों में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ, डीडीआरएफ, सेना और स्थानीय प्रशासन की टीमें राहत व बचाव कार्य में जुटी हैं, लेकिन लगातार हो रही बारिश और क्षतिग्रस्त सड़कों ने हालात और गंभीर बना दिए हैं।

UTTARAKHAND HEAVY RAIN: चमोली में भूस्खलन की कई घटनाएँ, बद्रीनाथ हाईवे बंद
चमोली जिले में बारिश और भूस्खलन का सबसे ज्यादा असर देखने को मिला है। देवाल क्षेत्र में मोपटा गांव में शुक्रवार रात हुए भूस्खलन में 62 वर्षीय तारा सिंह और उनकी पत्नी 60 वर्षीय कमला देवी की मौत हो गई। उनके घर और गौशाला पर भारी मलबा गिरने से करीब मवेशी भी दब गए। जिले में कई गांवों का संपर्क कट चुका है और एसडीआरएफ की टीमें लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचा रही हैं। इसके अलावा भूस्खलन के कारण बद्रीनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग भी जगह जगह अवरुद्ध हो गया है, जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासन द्वारा मलबा हटाने का काम लगातार जारी हैं।

रुद्रप्रयाग में बादल फटने से तबाही, उत्तरकाशी में हाल बेहाल
रुद्रप्रयाग जिले के बसुकेदार और जखोली क्षेत्रों में बादल फटने जैसी घटनाओं ने हालात बिगाड़ दिए हैं। जखोली में एक मकान के मलबे में दबने से सरिता देवी की मौत हो गई, जबकि छैनागाड़ क्षेत्र में आठ लोग लापता हैं। जिले में एक ही दिन में तीन बादल फटने की घटनाएं दर्ज की गईं, जिनसे सड़कें और संपर्क मार्ग बुरी तरह अवरुद्ध हो गए हैं। उत्तरकाशी जिले के स्यानाच्छती क्षेत्र में यमुना नदी पर बने कृत्रिम तालाब की जल निकासी को लेकर खतरा बना हुआ है। मुख्यमंत्री धामी ने इस मामले में विशेषज्ञ समिति गठित करने के निर्देश दिए हैं। प्रशासन ने नदी किनारे रहने वाले लोगों को सतर्क रहने की चेतावनी दी है।

बागेश्वर और टिहरी में आपदा से भारी नुकसान
बागेश्वर जिले के कपकोट तहसील के पौसारी गांव में मलबा गिरने से दो महिलाओं बसंती देवी और बचुली देवी की मौत हो गई, जबकि तीन लोग अब भी लापता हैं। एक घायल व्यक्ति का इलाज किया जा रहा है। यहां दो मकान और एक गौशाला पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए। बैसानी गांव में भी मलबे से एक मकान और गौशाला नष्ट हुई, जिसमें 10 बकरियां, 20 खरगोश और 30 मुर्गियां दब गईं। टिहरी जिले के बालगंगा तहसील के गेंवाली गांव में गदेरे का जलस्तर अचानक बढ़ने से दो छानियां, एक गौशाला, दो मंदिर, जलस्रोत, कृषि भूमि, संपर्क मार्ग और पैदल पुलिया क्षतिग्रस्त हो गए।

प्रशासन अलर्ट मोड में
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने सभी प्रभावित जिलों के जिलाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंस कर हालात का जायजा लिया। उन्होंने प्रभावित परिवारों को तत्काल राहत राशि देने और क्षतिग्रस्त घरों का मुआवजा जल्द उपलब्ध कराने के निर्देश दिए हैं। सीएम धामी ने सोशल मीडिया पर जानकारी दी कि वे हालात पर लगातार नजर रख रहे हैं। जगह जगह सड़क बंद होने से प्रभावित क्षेत्रों में पहुंचना मुश्किल हो रहा है, जिससे राहत और बचाव कार्य धीमे पड़ रहे हैं। प्रशासन द्वारा लोगों को सुरक्षित स्थानों पर शिफ्ट किया जा रहा है और राहत शिविरों में भोजन, दवा व आश्रय की व्यवस्था की जा रही है।

उत्तराखंड में अभी और बरसेंगे बादल, मौसम विभाग ने जारी की भारी बारिश की चेतावनी
देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

