Child Trafficking Gang Busted in Haridwar: उत्तराखंड के हरिद्वार जिले के कनखल इलाके से एक ऐसी घटना सामने आई जिसने पूरे क्षेत्र को हिला कर रख दिया। बैरागी कैंप की झुग्गी बस्ती में रहने वाले विनोद सोलंकी की तीन वर्षीय बेटी राधिका उनके घर के पास से अचानक गायब हो गई। 6 जून 2026 को विनोद ने कनखल कोतवाली में अपनी बच्ची के अपहरण की सूचना दर्ज कराई। पुलिस ने मामले की गंभीरता को समझते हुए तुरंत प्राथमिकी दर्ज की और विशेष जांच टीमें गठित कीं। हरिद्वार के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) नवनीत सिंह भुल्लर खुद इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी कर रहे थे और हर घंटे टीमों से प्रगति रिपोर्ट ले रहे थे।
Child Trafficking Gang Busted in Haridwar: पुलिस ने कैसे शुरू की जांच
जब पुलिस ने पीड़ित परिवार (Child Trafficking Gang Busted in Haridwar) की आर्थिक स्थिति का जायजा लिया तो यह साफ हो गया कि फिरौती की संभावना बहुत कम है। इसके बाद जांच की दिशा बदली और पुलिस ने बच्चा चोरी गिरोह तथा मानव तस्करी के एंगल से जांच शुरू की।
पुलिस और सीआईयू (क्राइम इन्वेस्टिगेशन यूनिट) की टीमों ने मिलकर काम किया। इलाके के सैकड़ों सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। मोबाइल फोन का डंप डेटा निकालकर उसका विश्लेषण किया गया। मुखबिर तंत्र को सक्रिय किया गया और सोशल मीडिया पर भी संदिग्धों की पहचान करने की कोशिश की गई। पुलिस की यह मेहनत रंग लाई और महज 72 घंटों के भीतर अहम सुराग हाथ लगे।
जैसे ही पुलिस ने उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में दबिशें देनी शुरू कीं, गिरोह के सदस्य घबरा गए। पुलिस की कार्रवाई से डरे गिरोह के कुछ सदस्यों ने अपहृत बच्ची राधिका को दिल्ली के आनंद विहार रेलवे स्टेशन पर छोड़कर फरार होने की कोशिश की। जैसे ही हरिद्वार पुलिस को इसकी (Child Trafficking Gang Busted in Haridwar) सूचना मिली, टीम तुरंत दिल्ली रवाना हुई और बच्ची को सकुशल बरामद कर लिया। राधिका के मिलने की खबर से परिवार और पड़ोसियों ने राहत की सांस ली।
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Child Trafficking Gang Busted in Haridwar: छह आरोपी गिरफ्तार, दो महिलाएं भी शामिल
बच्ची की बरामदगी के बाद पुलिस ने गिरोह के सदस्यों (Child Trafficking Gang Busted in Haridwar) को एक-एक कर दबोचना शुरू किया। इस कार्रवाई में कुल छह आरोपी गिरफ्तार किए गए, जिनमें दो महिलाएं भी शामिल हैं। गिरफ्तार आरोपियों के नाम और पते इस प्रकार हैं:
• मोहम्मद आकिल और उसकी पत्नी नसीमा — मूल निवासी पायती कला, थाना डिडौली, जिला अमरोहा, हाल मुरादाबाद
• जुल्फेकार — निवासी ग्राम दरियापुर, थाना अमरोहा देहात, जिला अमरोहा
• धर्मेंद्र कुमार — निवासी ग्राम सिकंदरपुर, थाना भोपा, जिला मुजफ्फरनगर, हाल लक्सर
• प्रीति शर्मा — निवासी ग्राम भोजापुर, जिला जालौन, हाल मुजफ्फरनगर
• शिवा सिंह उर्फ गौरव — निवासी सिवान, बिहार, हाल जटवाड़ा पुल, ज्वालापुर

दिल्ली से भी एक और बच्चे का था अपहरण
पूछताछ के दौरान (Child Trafficking Gang Busted in Haridwar) एक और चौंकाने वाला खुलासा हुआ। एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने बताया कि इसी गिरोह ने 24 मई 2026 को नई दिल्ली रेलवे स्टेशन से एक और बच्चे का अपहरण किया था। डेढ़ साल के इस मासूम बच्चे कार्तिक को गिरोह ने डेढ़ लाख रुपये में उत्तर प्रदेश के बदायूं जिले में बेच दिया था। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए बदायूं में छापेमारी की और बच्चे कार्तिक को भी सकुशल बरामद कर लिया। इस मामले की जानकारी दिल्ली पुलिस को भी दे दी गई है ताकि वहां भी जांच आगे बढ़ सके।
एसएसपी ने बताया कि इस गिरोह के अंदर सबकी जिम्मेदारियां पहले से तय थीं। गिरोह के कुछ सदस्यों का काम था- बच्चों की रेकी करना यानी उन्हें पहले से निशाना बनाना और मौका देखकर (Child Trafficking Gang Busted in Haridwar) उन्हें उठा लेना। वहीं दूसरे सदस्यों का काम था, इन बच्चों को दूसरे राज्यों में ले जाकर ग्राहक ढूंढना। गिरोह के लोग चुराए गए बच्चों को “अपना बच्चा” या “अनाथ बच्चा” बताकर उन निसंतान दंपतियों के हाथों बेचते थे जो बच्चे की चाहत में किसी भी हद तक जाने को तैयार होते थे।
पैसों के लालच में ये लोग किसी के परिवार की खुशी को तबाह करने से भी नहीं चूकते थे। पूछताछ में यह भी सामने आया कि मोहम्मद आकिल और प्रीति शर्मा गिरोह में “दलाल” की भूमिका निभाते थे। ये दोनों बच्चों की कीमत तय करते थे और खरीदार व बेचने वाले के बीच सौदा कराते थे। बच्चों की कीमत दो लाख से पांच लाख रुपये तक रखी जाती थी।
Child Trafficking Gang Busted in Haridwar: पुलिस की सतर्कता और त्वरित कार्रवाई
बुधवार, 10 जून 2026 की सुबह मायापुर स्थित एसपी सिटी कार्यालय में प्रेस वार्ता कर एसएसपी नवनीत सिंह भुल्लर ने पूरे ऑपरेशन की जानकारी मीडिया के सामने रखी। उन्होंने पुलिस और सीआईयू की टीमों की तारीफ करते हुए कहा कि महज 72 घंटों में इस अंतर्राज्यीय गिरोह का भंडाफोड़ करना एक बड़ी उपलब्धि है। इस पूरे मामले (Child Trafficking Gang Busted in Haridwar) में हरिद्वार पुलिस की त्वरित सोच, तकनीकी समझ और टीमवर्क ने साबित किया कि अगर पुलिस सही दिशा में और तेज गति से काम करे तो बड़े से बड़े अपराधी को पकड़ा जा सकता है।
Child Trafficking Gang Busted in Haridwar: आगे की जांच जारी
फिलहाल दोनों बरामद बच्चे (Child Trafficking Gang Busted in Haridwar) सुरक्षित हैं और उनके परिवारों को सौंप दिए गए हैं। गिरफ्तार छह आरोपियों से पूछताछ जारी है और पुलिस को आशंका है कि गिरोह ने इससे पहले भी कई अपहरण किए होंगे। मामले की जांच उत्तर प्रदेश, दिल्ली और बिहार पुलिस के साथ मिलकर आगे बढ़ाई जा रही है।
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