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UTTARAKHAND में दवा विक्रेताओं की हड़ताल, राज्य में दिख रहा मिलाजुला असर

UTTARAKHAND CHEMIST STRIKE उत्तराखंड में ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) के विरोध में बुधवार, 20 मई 2026 को दवा विक्रेताओं की एक दिवसीय हड़ताल का असर प्रदेशभर में अलग-अलग रूपों में देखने को मिला।

अखिल भारतीय औषधि विक्रेता संगठन (AIOCD) के देशव्यापी बंद के आह्वान के तहत आयोजित इस विरोध प्रदर्शन का मुख्य उद्देश्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर दवाओं की बिक्री और भारी छूट की नीति के खिलाफ आवाज उठाना था।

UTTARAKHAND CHEMIST STRIKE की रणनीति 

प्रदेश में UTTARAKHAND CHEMIST STRIKE मुद्दे पर दवा व्यापारियों के संगठनों के बीच अलग-अलग रणनीतियां सामने आईं। उत्तराखंड में दवा दुकानों पर बंद का असर पूरी तरह एक जैसा नहीं दिखा और कई स्थानों पर दुकानें आंशिक रूप से खुली रहीं।

‘उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ’ ने जहां इस राष्ट्रव्यापी बंद को पूरा समर्थन दिया, वहीं कई राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय रिटेल एसोसिएशंस ने मरीजों की सुविधा और जनहित का हवाला देते हुए खुद को हड़ताल से अलग रखा।

ऑनलाइन दवा बिक्री (ई-फार्मेसी) का विरोध

दवा विक्रेताओं के शीर्ष संगठन एआईओसीडी का कहना है कि देशभर में लगभग 12.4 लाख से 15 लाख तक केमिस्ट और ड्रगिस्ट ऑनलाइन फार्मेसी के तेजी से बढ़ते बाजार से प्रभावित हो रहे हैं।

उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ के महामंत्री अमित गर्ग ने कहा कि ई-फार्मेसी प्लेटफॉर्म्स ‘ड्रग्स एंड कॉस्मेटिक्स एक्ट, 1940’ के तहत निर्धारित सुरक्षा और कानूनी मानकों का पूरी तरह पालन नहीं कर रहे हैं।

UTTARAKHAND CHEMIST STRIKE
UTTARAKHAND CHEMIST STRIKE

उनका आरोप है कि बड़े कॉर्पोरेट प्लेटफॉर्म बाजार पर कब्जा जमाने के उद्देश्य से दवाओं पर 20 से 50 प्रतिशत तक भारी छूट दे रहे हैं, जिससे छोटे और पारंपरिक मेडिकल स्टोर संचालकों के सामने अस्तित्व का संकट पैदा हो गया है।

एंटीबायोटिक्स व नशीली दवाओं के दुरुपयोग की आशंका

संगठन ने यह भी मांग उठाई कि कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन दवा कारोबार को बढ़ावा देने के लिए जारी अस्थायी अधिसूचनाओं, जैसे GSR 220(E) और GSR 817(E), को तुरंत वापस लिया जाए।

दवा व्यापारियों का कहना है कि बिना किसी भौतिक सत्यापन के ऑनलाइन प्रिस्क्रिप्शन के आधार पर दवाओं की बिक्री से नकली दवाओं का खतरा बढ़ रहा है और एंटीबायोटिक्स व नशीली दवाओं के दुरुपयोग की आशंका भी गंभीर होती जा रही है।

राज्य में दिख रहा मिलाजुला असर

उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में UTTARAKHAND CHEMIST STRIKE मुद्दे पर स्थानीय स्तर पर भी विरोध के स्वर मुखर दिखाई दिए।

  • हरिद्वार में उत्तरांचल औषधि व्यवसायी महासंघ के पदाधिकारियों ने इस बंद को पूरी तरह जायज बताते हुए कहा कि अनियंत्रित ऑनलाइन दवा व्यापार देशभर में करीब पांच करोड़ लोगों की आजीविका पर संकट खड़ा कर रहा है। उन्होंने इसे जनस्वास्थ्य से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सरकार से सख्त नियंत्रण लागू करने की मांग की।
  • टिहरी गढ़वाल में भी ‘केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन’ के बैनर तले दवा विक्रेताओं ने बंद का समर्थन किया। संगठन के प्रतिनिधियों ने अपनी मांगों को लेकर स्थानीय प्रशासन के माध्यम से अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (ADM) और अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी (ACMO) को ज्ञापन सौंपा और ई-फार्मेसी पर नियंत्रण की मांग दोहराई।
  • केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (CDSCO) और कई अन्य दवा यूनियनों ने आम जनता को राहत देने के लिए खुद को इUTTARAKHAND CHEMIST STRIKE से अलग रखा।
UTTARAKHAND CHEMIST STRIKE
UTTARAKHAND CHEMIST STRIKE
  • राष्ट्रीय स्तर पर जारी रिपोर्टों में उत्तराखंड उन राज्यों में शामिल रहा, जहां कई रिटेल एसोसिएशंस ने सरकार को भरोसा दिलाया कि दवाओं की आपूर्ति बाधित नहीं होने दी जाएगी।
  • महाराष्ट्र, पंजाब, हरियाणा, गुजरात, कर्नाटक, केरल और पश्चिम बंगाल की तरह उत्तराखंड के कई प्रमुख शहरों में भी मेडिकल स्टोर पूरी तरह बंद नहीं रहे। कई दुकानदारों ने मरीजों की जरूरतों को देखते हुए दुकानें खुली रखीं।
  • केंद्र सरकार और विभिन्न राज्यों के खाद्य एवं औषधि प्रशासन (FDA) ने भी स्पष्ट किया था कि जनहित में दवाओं की किल्लत नहीं होने दी जाएगी।

इन-हाउस फार्मेसी, सरकारी जन औषधि केंद्र सामान्य रूप से खुली

राज्य के सभी प्रमुख अस्पतालों की इन-हाउस फार्मेसी, सरकारी जन औषधि केंद्र और आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं से जुड़ी दवा दुकानें सामान्य रूप से खुली रहीं। कई राज्यों के एफडीए विभागों ने मरीजों की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए थे ताकि जरूरत पड़ने पर दवाएं तुरंत उपलब्ध कराई जा सकें।

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Abhishek Semwal is Postgraduate in Mass Communication with over three years of experience across digital and print media. Covering a wide range of subjects, with a strong focus on local and regional issues, delivering clear, insightful and engaging content.
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