UTTARAKHAND CABINET: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में आज देहरादून सचिवालय में आयोजित कैबिनेट बैठक संपन्न हुई। बैठक में राज्य के विकास और जनहित से जुड़े 6 महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर मुहर लगाई गई। इनमें श्रम, गृह, वन और कृषि विभाग से संबंधित अहम निर्णय लिए गए हैं। बैठक में कैबिनेट मंत्री रेखा आर्य, सुबोध उनियाल, गणेश जोशी, धन सिंह रावत और सौरभ बहुगुणा के साथ मुख्य सचिव आनंद बर्द्धन भी उपस्थित रहे।
UTTARAKHAND CABINET से 6 महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मिली मंजूरी
- UTTARAKHAND CABINET बैठक में श्रम विभाग से जुड़े दो बड़े निर्णय लिए गए। पहला फैसला कर्मचारियों के बोनस से संबंधित है। कोविड काल के दौरान लाए गए ‘पेमेंट ऑफ बोनस संशोधन एक्ट 2020’ को वापस लेने का निर्णय लिया गया है। इस एक्ट के तहत उद्योगों को सरप्लस होने पर ही बोनस देने का प्रावधान था। अब राज्य सरकार ने इसे वापस लेकर 1965 के केंद्रीय कानून को प्रभावी रखने का फैसला किया है, जिससे कर्मचारियों को बोनस का लाभ मिल सकेगा।
- दूसरा महत्वपूर्ण फैसला ईएसआई (ESI) डॉक्टरों की भर्ती से जुड़ा है। UTTARAKHAND CABINET ने ‘लेबर मेडिकल सर्विस नियमावली 2006’ में संशोधन करते हुए ईएसआई अस्पतालों के लिए कुल 94 पदों पर नियुक्ति और प्रमोशन की मंजूरी दी है। इनमें 76 मेडिकल ऑफिसर, 11 असिस्टेंट डायरेक्टर, 6 लेवल-12 के पद और 1 एडिशनल डायरेक्टर का पद शामिल है। इस निर्णय से राज्य की कर्मचारी राज्य बीमा स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूती मिलेगी।
- नशे के बढ़ते कारोबार पर लगाम लगाने के लिए गृह विभाग के अंतर्गत वर्ष 2022 में गठित ‘एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स’ (ANTF) को और सशक्त बनाने का निर्णय लिया गया है। कैबिनेट ने राज्य स्तर पर इस टास्क फोर्स के लिए 22 नए पदों के सृजन की स्वीकृति दी है।

- इसके अलावा, कारागार एक्ट में ‘आदतन अपराधी’ (Habitual Offender) की परिभाषा को लेकर भी संशोधन किया गया है। अब राज्य सरकार ने इस मामले में केंद्र सरकार की परिभाषा को एडॉप्ट किया है, जिससे बार-बार अपराध करने वालों पर कानूनी शिकंजा और कड़ा होगा।
- वन विभाग के दैनिक श्रमिकों के लिए भी UTTARAKHAND CABINET ने बड़ी राहत की घोषणा की है। विभाग में कार्यरत कुल 893 दैनिक श्रमिकों में से 314 को पहले ही न्यूनतम वेतनमान मिल रहा था। अब शेष 579 दैनिक श्रमिकों को भी 18 हजार रुपये न्यूनतम वेतनमान देने की मंजूरी दे दी गई है। इस फैसले से लंबे समय से कार्यरत श्रमिकों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा।
- कृषि विभाग के अंतर्गत केंद्र सरकार की ‘प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना’ वर्ष 2025-26 तक लागू है। कैबिनेट ने फैसला लिया है कि इसके साथ ही प्रदेश में चल रही ‘मुख्यमंत्री सूक्ष्म खाद्य उन्नयन योजना’ भी निरंतर जारी रहेगी। जब तक केंद्र की योजना प्रभावी रहेगी, तब तक राज्य की योजना के माध्यम से छोटे खाद्य उद्यमियों को सहायता प्रदान की जाती रहेगी। इन निर्णयों से स्पष्ट है कि सरकार का जोर रोजगार सृजन, कर्मचारियों के कल्याण और अपराध नियंत्रण पर केंद्रित है।

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