UDHAM SINGH NAGAR NEWS: उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे के खिलाफ चल रहे अभियान के तहत के ऊधम सिंह नगर जिला प्रशासन ने एक बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। यहां गूलरभोज-दिनेशपुर क्षेत्र के ठंडा नाला इलाके में सिंचाई विभाग की जमीन पर बिना किसी वैध अनुमति के खड़ी की गई दो मजार और एक मस्जिद की संरचनाओं को भारी पुलिस बल की मौजूदगी में सुबह-सवेरे बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया।
तीन महीने पहले हुआ था सर्वेक्षण, नोटिस का नहीं दिया जवाब
बता दें कि ये कार्रवाई अचानक नहीं हुई। करीब तीन महीने पहले प्रशासन ने पूरे क्षेत्र का विस्तृत सर्वेक्षण कराया था, जिसमें इन अवैध संरचनाओं की पहचान हुई। इसके बाद संबंधित कब्जाधारियों को नोटिस जारी कर भूमि स्वामित्व और निर्माण अनुमति से जुड़े वैध दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए थे।
निर्धारित समय बीत जाने के बावजूद कोई संतोषजनक कागजात सामने नहीं आए, जिसके बाद प्रशासन ने कार्रवाई का रास्ता साफ कर लिया। (UDHAM SINGH NAGAR NEWS)
UDHAM SINGH NAGAR NEWS: हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट से भी राहत नहीं मिल पाई
कब्जाधारियों ने कार्रवाई को टालने के लिए सबसे पहले हाईकोर्ट का रुख किया, लेकिन वहां उन्हें कोई राहत हासिल नहीं हुई। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जहां ठंडा नाला क्षेत्र में कुछ अन्य कब्जों को लेकर अस्थायी रोक जरूर मिली, मगर इन धार्मिक ढांचों के मामले में किसी तरह का स्टे ऑर्डर (UDHAM SINGH NAGAR NEWS) नहीं दिया गया। इसी वजह से प्रशासन ने बिना किसी रुकावट के अपनी कार्रवाई को आगे बढ़ाया।

डीएम और एडीएम का साफ संदेश
जिलाधिकारी नितिन भदौरिया ने स्पष्ट कहा कि सरकारी जमीन को अतिक्रमण (UDHAM SINGH NAGAR NEWS) से मुक्त कराना राज्य सरकार की प्राथमिकताओं में प्रमुख है और जहां कहीं भी अवैध कब्जे मिलेंगे, वहां बिना भेदभाव के सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं अपर जिलाधिकारी पंकज उपाध्याय ने बताया कि जिन तीन धार्मिक संरचनाओं को हटाया गया, वे न तो किसी प्रशासनिक अनुमति से निर्मित थीं और न ही संबंधित लोगों के पास स्वामित्व के वैध दस्तावेज थे।
उन्होंने यह भी कहा कि पूरी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के उन निर्देशों के अनुरूप की गई है, जिनमें सार्वजनिक और सरकारी भूमि से अवैध कब्जे हटाने के स्पष्ट आदेश दिए गए हैं।
UDHAM SINGH NAGAR NEWS: आगे भी जारी रहेगा अभियान
कार्रवाई के दौरान सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए ताकि किसी भी तरह की अप्रिय स्थिति पैदा न हो। प्रशासन ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में जिले के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह का अभियान चलाया जाएगा। गौरतलब है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी पहले भी अवैध मजारों और सरकारी भूमि पर कब्जे को लेकर सख्त रुख जाहिर कर चुके हैं।
उन्होंने राज्य में बदलती जनसांख्यिकी पर चिंता व्यक्त करते हुए सभी जिलाधिकारियों को कुटुंब रजिस्टर की गहन जांच के निर्देश दिए हैं, जिसके तहत वर्ष 2003 के बाद बने रजिस्टरों में संदिग्ध नामों की जांच की जाएगी।(UDHAM SINGH NAGAR NEWS)
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उत्तराखंड में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जे और अतिक्रमण पर कार्रवाई
उत्तराखंड में सरकारी जमीन और वन क्षेत्रों पर अवैध कब्जों के खिलाफ कार्रवाई अक्सर चर्चाओं में रहती है। सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अब तक प्रदेश में 10,000 एकड़ से ज्यादा भूमि को अतिक्रमण से मुक्त कराया जा चुका है। इस कार्रवाई में वन विभाग, राजस्व विभाग और स्थानीय पुलिस प्रशासन मिलकर संयुक्त रूप से काम कर रहे हैं।
खासतौर पर तराई क्षेत्र और आरक्षित वन इलाकों में चल रहे अभियान के तहत बड़े स्तर पर जमीन खाली कराई गई है। हाल की रिपोर्टों के अनुसार, राज्य के आरक्षित वनों में अतिक्रमण अब भी एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। आंकड़े बताते हैं-
- करीब 11,396.63 हेक्टेयर वन भूमि पर कब्जे की पहचान की गई थी, जिसमें से अब तक लगभग 1,560.31 हेक्टेयर जमीन को ही पूरी तरह मुक्त कराया जा सका है। यानी अभी भी काफी बड़ी मात्रा में भूमि पर कब्जा बना हुआ है, जिसे हटाने के लिए विभाग अब आधुनिक तकनीकों का सहारा ले रहा है।
- तराई पूर्व वन प्रभाग में सबसे ज्यादा लगभग 5,982 हेक्टेयर भूमि पर अतिक्रमण दर्ज किया गया है,
- जबकि तराई पश्चिम में यह आंकड़ा करीब 2,629 हेक्टेयर है।
- वहीं Badrinath वन प्रभाग जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में भी करीब 937 हेक्टेयर जमीन पर कब्जा पाया गया, जिसमें से प्रशासन ने लगभग 247.55 हेक्टेयर जमीन वापस हासिल कर ली है।

धार्मिक स्थलों और अवैध निर्माण पर कड़ा रुख
सरकार ने उन अवैध निर्माणों पर भी विशेष ध्यान केंद्रित किया है जो धार्मिक आड़ में सरकारी जमीन पर बनाए (UDHAM SINGH NAGAR NEWS) गए थे। राज्यभर में 250 से अधिक अवैध मदरसों को सील किया गया है। इसके अलावा बड़ी संख्या में ऐसी मजारें और निर्माण भी हटाए गए हैं, जो बिना वैध अनुमति के वन भूमि या लोक निर्माण विभाग की जमीन पर खड़े किए गए थे।
मुख्यमंत्री ने कई मंचों से यह दोहराया है कि सरकार अवैध कब्जों के खिलाफ ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर काम कर रही है। उनका कहना है कि चाहे निर्माण किसी भी समुदाय से जुड़ा हो, अगर वह अवैध है तो उसे हटाया जाएगा। Uttarakhand High Court और Supreme Court of India ने भी अतिक्रमण (UDHAM SINGH NAGAR NEWS) के मामलों में सख्त रुख अपनाया है।
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