State Election Commission यानी राज्य निर्वाचन आयोग वह संवैधानिक संस्था है, जो हर राज्य में पंचायत और नगर निकायों के चुनाव कराती है, जबकि लोकसभा और विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी भारत निर्वाचन आयोग यानी Election Commission of India की होती है।
ज्यादातर लोग मानते हैं कि देश में हर चुनाव एक ही चुनाव आयोग कराता है। लेकिन ग्राम प्रधान और पार्षद का चुनाव कराने वाली संस्था अलग होती है। दोनों के नाम मिलते-जुलते हैं, पर इनके अधिकार, दायरा और कानून अलग हैं।
Election Commission of India क्या है?
भारत निर्वाचन आयोग का गठन 25 जनवरी 1950 को हुआ था। इसी दिन की याद में हर साल राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है। संविधान का अनुच्छेद 324 इसे देश में चुनावों की निगरानी, निर्देशन और नियंत्रण की पूरी शक्ति देता है। इसका मुख्यालय नई दिल्ली के निर्वाचन सदन में है। आयोग में एक मुख्य निर्वाचन आयुक्त और दो निर्वाचन आयुक्त होते हैं।
इनकी नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं, जिसके लिए 2023 के कानून के तहत प्रधानमंत्री, लोकसभा में विपक्ष के नेता और एक केंद्रीय मंत्री की चयन समिति नाम सुझाती है। मुख्य निर्वाचन आयुक्त को सुप्रीम कोर्ट के जज की तरह संसद में महाभियोग जैसी प्रक्रिया से ही हटाया जा सकता है। इससे आयोग की स्वतंत्रता सुरक्षित रहती है।
भारत निर्वाचन आयोग किन चुनावों को कराता है?
यह लोकसभा, राज्यसभा, राज्यों की विधानसभा और विधान परिषद के चुनाव कराता है। राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव भी इसी की देखरेख में होता है। आयोग राजनीतिक दलों को मान्यता देता है, चुनाव चिह्न आवंटित करता है और आदर्श आचार संहिता लागू करता है।
मतदाता सूची तैयार करना, EVM और VVPAT की व्यवस्था, चुनाव खर्च की निगरानी और मतगणना भी इसकी मुख्य जिम्मेदारियां हैं। हर राज्य में इसका प्रतिनिधि मुख्य निर्वाचन अधिकारी होता है, जो जिला निर्वाचन अधिकारियों के जरिए जमीन पर काम करवाता है।
State Election Commission क्या है?
1992 के 73वें और 74वें संविधान संशोधन से पंचायतों और नगर निकायों को संवैधानिक दर्जा मिला। इसी के साथ हर राज्य में अलग राज्य निर्वाचन आयोग बनाने का प्रावधान हुआ। अनुच्छेद 243K पंचायत चुनाव और अनुच्छेद 243ZA नगर निकाय चुनाव की जिम्मेदारी राज्य निर्वाचन आयोग को देते हैं।
इसके प्रमुख राज्य निर्वाचन आयुक्त होते हैं, जिनकी नियुक्ति राज्यपाल करते हैं। उनकी सेवा शर्तें राज्य का कानून तय करता है। उन्हें हाईकोर्ट के जज की तरह ही हटाया जा सकता है। नियुक्ति के बाद उनकी सेवा शर्तों में ऐसा बदलाव नहीं हो सकता, जो उनके खिलाफ जाए।
राज्य निर्वाचन आयोग किन क्षेत्रों में काम करता है?
गांवों में ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत या पंचायत समिति और जिला पंचायत के चुनाव यही आयोग कराता है। ग्राम प्रधान, बीडीसी सदस्य और जिला पंचायत सदस्य इन्हीं चुनावों से चुने जाते हैं। शहरों में नगर निगम, नगर पालिका परिषद और नगर पंचायत के चुनाव भी इसी की जिम्मेदारी हैं। मेयर, अध्यक्ष और वार्ड पार्षद इन्हीं चुनावों में चुने जाते हैं।

यह आयोग स्थानीय चुनावों के लिए अलग मतदाता सूची तैयार करता है, जिसका आधार अक्सर विधानसभा की मतदाता सूची होती है। आचार संहिता, नामांकन, मतदान और मतगणना की पूरी प्रक्रिया भी यही संभालता है। स्थानीय निकायों में सीटों का आरक्षण और वार्डों का परिसीमन आमतौर पर राज्य सरकार तय करती है, जिसके आधार पर आयोग चुनाव कराता है।
दोनों आयोगों में मुख्य अंतर
पहला अंतर दायरे का है। भारत निर्वाचन आयोग राष्ट्रीय और राज्य स्तर के चुनाव कराता है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग सिर्फ स्थानीय निकायों के। दूसरा अंतर संवैधानिक आधार का है। भारत निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 324 से बना है, जबकि राज्य निर्वाचन आयोग अनुच्छेद 243K और 243ZA से। तीसरा अंतर नियुक्ति का है। एक की नियुक्ति राष्ट्रपति करते हैं और दूसरे की राज्यपाल।
एक को सुप्रीम कोर्ट जज की तरह हटाया जाता है और दूसरे को हाईकोर्ट जज की तरह। चौथा अंतर कानून का है। संसद और विधानसभा चुनाव जन प्रतिनिधित्व अधिनियम से चलते हैं, जबकि स्थानीय चुनाव हर राज्य के अपने पंचायत और नगर पालिका कानूनों से। सबसे अहम बात यह है कि दोनों आयोग एक दूसरे के अधीन नहीं हैं। राज्य निर्वाचन आयोग भारत निर्वाचन आयोग की शाखा नहीं, बल्कि पूरी तरह अलग और स्वतंत्र संवैधानिक संस्था है।
चुनाव विवाद कहां सुलझते हैं?
लोकसभा और विधानसभा चुनाव से जुड़ी चुनाव याचिका हाईकोर्ट में दायर होती है और उसके बाद सुप्रीम कोर्ट में अपील की जा सकती है। पंचायत और नगर निकाय चुनाव के विवाद राज्य कानून के तहत तय अदालत या चुनाव न्यायाधिकरण में सुने जाते हैं। लोकतंत्र की जड़ें गांव और मोहल्ले तक पहुंचाने में State Election Commission की भूमिका उतनी ही अहम है, जितनी देश की सरकार चुनने में भारत निर्वाचन आयोग की।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. State Election Commission किन चुनावों को कराता है?
यह ग्राम पंचायत, क्षेत्र पंचायत, जिला पंचायत, नगर निगम, नगर पालिका और नगर पंचायत के चुनाव कराता है।
2. State Election Commission की नियुक्ति कौन करता है?
राज्य निर्वाचन आयुक्त की नियुक्ति उस राज्य के राज्यपाल करते हैं।
3. क्या राज्य निर्वाचन आयोग, Election Commission of India के अधीन होता है?
नहीं, दोनों अलग और स्वतंत्र संवैधानिक संस्थाएं हैं। एक दूसरे के कामकाज में इनका कोई सीधा नियंत्रण नहीं होता।
4. विधानसभा और पंचायत की मतदाता सूची एक होती है या अलग?
दोनों सूचियां अलग संस्थाएं बनाती हैं, लेकिन ज्यादातर राज्यों में पंचायत और नगर निकाय की सूची विधानसभा की मतदाता सूची के आधार पर तैयार होती है।
5. Election Commission of India की आधिकारिक जानकारी कहां मिलती है?
चुनाव कार्यक्रम, नियम और प्रेस नोट से जुड़ी पूरी जानकारी आयोग की आधिकारिक वेबसाइट पर उपलब्ध है।
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उपरोक्त State Election Commission vs Election Commission of India की जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

