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SME IPO vs Mainboard IPO: क्या होता है दोनों में अंतर और किसमें निवेश करना है ज्यादा जोखिम भरा?

SME IPO या Small and Medium Enterprises IPO छोटी और मझोली कंपनियों का पब्लिक इश्यू होता है, जो शेयर बाजार के अलग प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होता है। पिछले कुछ सालों में ऐसे कई इश्यू ने भारी लिस्टिंग गेन दिया, लेकिन कई में निवेशकों को बड़ा नुकसान भी हुआ। जियो प्लेटफॉर्म्स जैसे बड़े Mainboard IPO और छोटी कंपनियों के इश्यू के नियम, जोखिम और निवेश की रकम काफी अलग होती है।

Mainboard IPO क्या होता है?

मेनबोर्ड IPO बड़ी और स्थापित कंपनियों का इश्यू होता है, जिसके शेयर NSE और BSE के मुख्य प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होते हैं। जियो प्लेटफॉर्म्स का करीब ₹30,000 करोड़ का इश्यू इसी का ताजा उदाहरण है।

ऐसे इश्यू के दस्तावेजों की जांच सीधे सेबी करता है और कंपनी को मुनाफे, संपत्ति और कारोबार से जुड़ी कड़ी शर्तें पूरी करनी होती हैं। आम निवेशक एक लॉट से आवेदन कर सकता है, जिसकी रकम आमतौर पर ₹15,000 के आसपास रहती है।

Small and Medium Enterprises IPO कैसे अलग है?

SME IPO के मौजूदा नियम ये इश्यू NSE Emerge और BSE SME जैसे अलग प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होते हैं। मौजूदा नियमों में इश्यू के बाद कंपनी की चुकता पूंजी ₹25 करोड़ तक होनी चाहिए। सेबी ने मार्च 2025 में नियम सख्त किए थे। अब SME IPO लाने वाली कंपनी को पिछले तीन में से कम से कम दो साल ₹1 करोड़ का ऑपरेटिंग मुनाफा दिखाना होता है।

प्रमोटर या पुराने निवेशक ऑफर फॉर सेल (OFS) के जरिए इश्यू का अधिकतम 20 प्रतिशत हिस्सा ही बेच सकते हैं। साथ ही हर बेचने वाला अपनी हिस्सेदारी का 50 प्रतिशत से ज्यादा नहीं बेच सकता। सबसे बड़ा फर्क निवेश की रकम में है। इन इश्यू में कम से कम दो लॉट के लिए आवेदन करना होता है, जिसकी कुल रकम ₹2 लाख से ज्यादा होती है।

दोनों में मुख्य फर्क

Mainboard IPO इश्यू के दस्तावेज सेबी जांचता है, जबकि Small and Medium Enterprises IPO के दस्तावेजों की मुख्य जांच शेयर बाजार यानी एक्सचेंज करता है। कंपनियों का आकार, इश्यू की रकम और कारोबार का इतिहास भी मेनबोर्ड में कहीं बड़ा होता है।

छोटी कंपनियों के शेयर में कम से कम तीन साल तक एक मार्केट मेकर रखना जरूरी होता है, ताकि खरीद बिक्री चलती रहे। फिर भी इन शेयरों में कारोबार अक्सर कम होता है और बड़े लॉट की वजह से जल्दी बेचना मुश्किल हो सकता है।

SME IPO
SME IPO

निवेश से पहले समझें ये जोखिम

कम शेयरों और कम कारोबार की वजह से इन शेयरों की कीमत कुछ लोगों के बड़े सौदों से तेजी से ऊपर नीचे हो सकती है। सोशल मीडिया पर बढ़ा चढ़ाकर बताए गए GMP के भरोसे निवेश करना यहां और भी जोखिम भरा है। किसी भी Small and Medium Enterprises IPO में पैसा लगाने से पहले कंपनी का रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस पढ़ें।

उसमें मुनाफा, कर्ज, प्रमोटर का अनुभव और जुटाए गए पैसे का इस्तेमाल जरूर देखें। ध्यान रहे कि सेबी ने 14 अक्टूबर 2026 को इन नियमों में बड़े बदलाव का प्रस्ताव रखा है, जिसमें न्यूनतम आवेदन ₹1 लाख करने जैसी बातें शामिल हैं। फिलहाल ये सिर्फ प्रस्ताव हैं और पुराने नियम ही लागू हैं।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)

1. SME IPO में कम से कम कितना पैसा लगता है?

मौजूदा नियमों में कम से कम दो लॉट के लिए आवेदन करना होता है, जिसकी रकम ₹2 लाख से ज्यादा होती है।

2. क्या छोटी कंपनी का शेयर बाद में मुख्य बाजार में जा सकता है?

हां, कंपनी का आकार बढ़ने और तय शर्तें पूरी होने पर वह मेनबोर्ड पर माइग्रेट कर सकती है।

3. क्या SME IPO, Mainboard IPO से ज्यादा जोखिम भरा है?

आमतौर पर हां, क्योंकि कंपनियां छोटी होती हैं, जानकारी कम मिलती है और शेयरों में कारोबार भी कम होता है।

4. SME IPO में आवेदन कैसे करें?

मेनबोर्ड की तरह ही ब्रोकर ऐप के IPO सेक्शन से UPI के जरिए आवेदन किया जा सकता है, बस न्यूनतम रकम ज्यादा होती है।

5. Mainboard IPO और SME IPO की आधिकारिक जानकारी कहां मिलेगी?

छोटी कंपनियों के मौजूदा और आने वाले इश्यू की जानकारी NSE Emerge की आधिकारिक वेबसाइट पर देखी जा सकती है।

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। शेयर बाजार में निवेश जोखिम के अधीन है, निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय लें।

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