प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 29 अगस्त से 1 सितंबर 2026 तक उज्बेकिस्तान और किर्गिज गणराज्य की चार दिवसीय यात्रा पर जाएंगे। इस दौरे का सबसे महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ प्रधानमंत्री मोदी की प्रस्तावित द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेताओं की मुलाकात किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में होने वाले शंघाई सहयोग संगठन (SCO) शिखर सम्मेलन के दौरान होगी। यह बैठक भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
विदेश मंत्रालय के अनुसार, प्रधानमंत्री पहले 29 और 30 अगस्त को उज्बेकिस्तान का द्विपक्षीय दौरा करेंगे। इसके बाद वह किर्गिज गणराज्य जाएंगे, जहां 31 अगस्त से 1 सितंबर तक SCO का 26वां शिखर सम्मेलन आयोजित होगा।
पुतिन से मुलाकात पर टिकी नजर
प्रधानमंत्री मोदी और व्लादिमीर पुतिन की बैठक इस यात्रा का सबसे अहम हिस्सा होगी। भारत और रूस के बीच रक्षा, ऊर्जा, व्यापार, परमाणु सहयोग और रणनीतिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। ऐसे में दोनों नेताओं के बीच होने वाली बातचीत में द्विपक्षीय संबंधों की समीक्षा के साथ-साथ मौजूदा अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों पर भी चर्चा होने की संभावना है।
SCO एक ऐसा बहुपक्षीय मंच है जिसमें भारत, रूस, चीन और मध्य एशिया के कई देश शामिल हैं। इसलिए बिश्केक में होने वाली बैठक केवल भारत-रूस संबंधों तक सीमित नहीं होगी। क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, संपर्क व्यवस्था, व्यापार और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दे भी व्यापक चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।
ताशकंद में उज्बेकिस्तान के साथ रिश्तों पर जोर
प्रधानमंत्री मोदी अपनी यात्रा के पहले चरण में उज्बेकिस्तान की राजधानी ताशकंद पहुंचेंगे। वहां उनकी मुलाकात राष्ट्रपति शावकत मिर्जियोयेव से होगी। दोनों नेताओं के बीच भारत और उज्बेकिस्तान के द्विपक्षीय संबंधों को और मजबूत करने पर चर्चा होने की उम्मीद है।
दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, स्वास्थ्य, शिक्षा, ऊर्जा, महत्वपूर्ण खनिज और डिजिटल संपर्क जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाएं हैं। मध्य एशिया में उज्बेकिस्तान का रणनीतिक और आर्थिक महत्व बढ़ रहा है और भारत इस क्षेत्र के साथ अपने संबंधों को लगातार मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
प्रधानमंत्री के ताशकंद दौरे में ऐतिहासिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम भी शामिल हैं। वह भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की स्मृति से जुड़े स्थल और महात्मा गांधी केंद्र का दौरा कर सकते हैं।
SCO में आतंकवाद और क्षेत्रीय सुरक्षा अहम मुद्दा
बिश्केक में होने वाला SCO सम्मेलन भारत के लिए सुरक्षा के लिहाज से महत्वपूर्ण मंच होगा। भारत लंबे समय से SCO के भीतर आतंकवाद, कट्टरपंथ और सीमा पार आतंकवाद के खिलाफ सहयोग को प्रमुखता देता रहा है।
मध्य एशिया की भौगोलिक स्थिति इसे अफगानिस्तान और व्यापक यूरेशियाई क्षेत्र की सुरक्षा से सीधे जोड़ती है। ऐसे में आतंकवादी नेटवर्क, उग्रवाद, मादक पदार्थों की तस्करी और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर सदस्य देशों के बीच सहयोग महत्वपूर्ण हो जाता है।
भारत की ओर से SCO मंच पर सुरक्षित क्षेत्रीय वातावरण, आतंकवाद के खिलाफ साझा कार्रवाई और आर्थिक संपर्क बढ़ाने की आवश्यकता पर जोर दिए जाने की संभावना है।
भारत के लिए मध्य एशिया क्यों महत्वपूर्ण?
भारत की विदेश नीति में मध्य एशिया का महत्व लगातार बढ़ रहा है। उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान के साथ संबंधों के अलावा भारत कजाखस्तान, ताजिकिस्तान और अन्य मध्य एशियाई देशों के साथ भी आर्थिक और रणनीतिक संबंध विकसित कर रहा है।
ऊर्जा संसाधन, महत्वपूर्ण खनिज, व्यापार मार्ग, डिजिटल कनेक्टिविटी और सुरक्षा सहयोग भारत के लिए इस क्षेत्र में प्रमुख प्राथमिकताएं हैं। चीन की बढ़ती आर्थिक और रणनीतिक मौजूदगी के बीच भारत का मध्य एशिया के साथ सक्रिय जुड़ाव उसकी व्यापक क्षेत्रीय रणनीति का हिस्सा है।
किर्गिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंध भी एजेंडे में
बिश्केक में SCO सम्मेलन में हिस्सा लेने के अलावा प्रधानमंत्री मोदी की किर्गिस्तान के राष्ट्रपति सदिर जापारोव से भी मुलाकात होने की संभावना है। दोनों देशों के बीच राजनीतिक, आर्थिक, शिक्षा और सुरक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर चर्चा हो सकती है।
किर्गिस्तान में भारतीय छात्रों और शिक्षा क्षेत्र से जुड़े संबंध भी महत्वपूर्ण हैं। दोनों देशों के बीच लोगों के बीच संपर्क को मजबूत करना भारत की मध्य एशिया नीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।
वैश्विक परिस्थितियों के बीच महत्वपूर्ण मुलाकात
मोदी-पुतिन बैठक ऐसे समय होने जा रही है जब वैश्विक राजनीति में कई बड़े बदलाव देखने को मिल रहे हैं। रूस के साथ भारत के पारंपरिक रणनीतिक संबंध हैं, जबकि भारत समानांतर रूप से अमेरिका, यूरोप, मध्य एशिया और अन्य शक्तियों के साथ भी अपने संबंधों को आगे बढ़ा रहा है।
ऐसे माहौल में भारत की नीति को रणनीतिक स्वायत्तता के दृष्टिकोण से देखा जाता है। पुतिन के साथ बातचीत में द्विपक्षीय सहयोग के साथ वैश्विक और क्षेत्रीय घटनाक्रमों पर विचार-विमर्श महत्वपूर्ण हो सकता है।
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चीन के साथ भी संपर्क की संभावना
SCO सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग समेत अन्य सदस्य देशों के नेता भी मौजूद रहेंगे। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी की अन्य नेताओं के साथ द्विपक्षीय बातचीत की संभावना भी बनी हुई है।
भारत के लिए SCO सम्मेलन इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि यह एक ही मंच पर रूस, चीन और मध्य एशियाई देशों के साथ संवाद का अवसर देता है। भारत इस मंच का इस्तेमाल क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ आर्थिक और संपर्क संबंधी मुद्दों को आगे बढ़ाने के लिए करता रहा है।
निष्कर्ष
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का 29 अगस्त से 1 सितंबर तक होने वाला उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान दौरा भारत की मध्य एशिया नीति के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है। ताशकंद में उज्बेकिस्तान के साथ द्विपक्षीय संबंधों पर चर्चा होगी, जबकि बिश्केक में SCO शिखर सम्मेलन में भारत क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद, संपर्क और आर्थिक सहयोग जैसे मुद्दों पर अपनी प्राथमिकताएं रखेगा।
इस यात्रा का सबसे बड़ा आकर्षण प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की द्विपक्षीय बैठक होगी। दोनों नेताओं की बातचीत भारत-रूस रणनीतिक साझेदारी की दिशा और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों पर भारत के रुख को समझने के लिहाज से महत्वपूर्ण होगी।
कुल मिलाकर, यह दौरा भारत के लिए केवल दो मध्य एशियाई देशों की यात्रा नहीं, बल्कि मध्य एशिया में रणनीतिक मौजूदगी मजबूत करने, SCO में सक्रिय भूमिका निभाने और रूस समेत प्रमुख साझेदारों के साथ उच्चस्तरीय संवाद बढ़ाने का महत्वपूर्ण अवसर है।

