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नेपाल-चीन सीमा के पास फिर मंडराया बाढ़ का खतरा, 3 दिनों में टूट सकती है बैरियर झील

नेपाल और चीन की सीमा से लगे हिमालयी क्षेत्र में विनाशकारी बाढ़ के बाद अब एक और बड़ा खतरा मंडरा रहा है। चीन के अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि नेपाल में छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी बैरियर झील अगले तीन दिनों में टूट सकती है। यदि झील का प्राकृतिक अवरोध टूटता है तो नीचे की ओर अचानक भारी मात्रा में पानी पहुंच सकता है, जिससे पहले से बाढ़ और मलबे से तबाह इलाकों में स्थिति और गंभीर होने की आशंका है।

यह चेतावनी ऐसे समय सामने आई है जब नेपाल-तिब्बत सीमा क्षेत्र में आई भीषण फ्लैश फ्लड और भूस्खलन में सैकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है और बड़ी संख्या में लोग अब भी लापता हैं। 27 अगस्त की रिपोर्टों में दोनों देशों के आंकड़ों के आधार पर कम से कम 273 मौतों और 1,300 से अधिक लोगों के लापता होने की जानकारी सामने आई थी। हालांकि, राहत और बचाव अभियान जारी रहने के साथ मृतकों और लापता लोगों की संख्या लगातार बदल रही है।

बैरियर झील में तेजी से बढ़ रहा पानी

चीनी जल संसाधन मंत्रालय के अनुसार, छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी बैरियर झील में गुरुवार सुबह तक लगभग 20 लाख घन मीटर पानी जमा हो चुका था। रिपोर्ट के मुताबिक झील में पानी पहले से ही ऊपर से बहने लगा था। इसके अलावा अगले तीन दिनों में लगभग 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी झील में पहुंचने का अनुमान है। इससे प्राकृतिक अवरोध पर दबाव बढ़ सकता है और झील के टूटने का खतरा पैदा हो सकता है।

चीनी अधिकारियों ने स्थिति पर लगातार निगरानी रखने, संभावित बाढ़ के सिमुलेशन और जोखिम आकलन करने की बात कही है। इसका उद्देश्य संभावित झील टूटने की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों में बचाव एवं राहत अभियान को तेजी से संचालित करना है।

पहले ही तबाही झेल चुका है सीमा क्षेत्रनेपाल

26 अगस्त को हिमालयी क्षेत्र में अचानक आई विनाशकारी फ्लैश फ्लड ने नेपाल के उत्तरी हिस्सों और तिब्बत के कुछ इलाकों को बुरी तरह प्रभावित किया था। प्रारंभिक आकलनों के मुताबिक इस आपदा के पीछे हिमनद के ढहने और बर्फ-पत्थर के बड़े पैमाने पर नीचे आने की घटना रही। इससे नदियों में अचानक भारी मात्रा में पानी, बर्फ, चट्टान और मलबा पहुंचा और देखते ही देखते निचले इलाकों में तबाही मच गई।

नेपाल में रासुवा जिले के कई इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हुए। सड़कें और पुल बह गए, बस्तियां मलबे में दब गईं और महत्वपूर्ण संपर्क मार्ग टूट गए। तिब्बत के जियारोंग काउंटी में भी बाढ़ और मलबे ने बड़े पैमाने पर नुकसान पहुंचाया। सीमा क्षेत्र में स्थित महत्वपूर्ण जियारोंग बॉर्डर क्रॉसिंग भी भारी नुकसान की चपेट में आया।

सैकड़ों विदेशी नागरिक भी लापता

इस आपदा का असर केवल स्थानीय आबादी तक सीमित नहीं रहा। क्षेत्र में बड़ी संख्या में विदेशी पर्यटक और तीर्थयात्री मौजूद थे, जिनमें कैलाश मानसरोवर की यात्रा पर जाने वाले लोग भी शामिल थे।

27 अगस्त तक नेपाल के राष्ट्रीय पर्यटन बोर्ड ने 517 विदेशी नागरिकों के लापता होने की जानकारी दी थी। इनमें सबसे बड़ी संख्या भारतीय नागरिकों की थी। रिपोर्ट के मुताबिक 288 भारतीय नागरिक लापता बताए गए थे। इसके अलावा अमेरिका, मलेशिया, यूक्रेन, ऑस्ट्रेलिया और ब्रिटेन के नागरिक भी लापता लोगों में शामिल थे।

भारत सरकार ने भी नेपाल में फंसे और लापता भारतीय नागरिकों का पता लगाने के लिए स्थानीय अधिकारियों के साथ संपर्क बढ़ाया है। सीमा क्षेत्र में खराब मौसम और क्षतिग्रस्त सड़क नेटवर्क के कारण राहत एवं बचाव दलों के सामने बड़ी चुनौतियां हैं।

चीन में भी बड़ी संख्या में लोग प्रभावित

तिब्बत के जियारोंग काउंटी में चीनी अधिकारियों के अनुसार तीन लोगों की मौत हुई थी और 558 लोग लापता बताए गए थे। इनमें लगभग 260 विदेशी नागरिक शामिल थे। चीन की ओर से राहत और बचाव अभियान में आपातकालीन सेवाओं के साथ पीपुल्स लिबरेशन आर्मी, इंजीनियरिंग दल, दूरसंचार कंपनियां और राहत संगठन शामिल किए गए हैं।

हालांकि, दुर्गम पहाड़ी इलाकों, लगातार बारिश और सड़कों पर जमा मलबे के कारण बचाव दलों को प्रभावित स्थानों तक पहुंचने में मुश्किल हो रही है।

अब दूसरी बाढ़ का खतरा

सबसे बड़ी चिंता यह है कि पहली आपदा के बाद बनी बैरियर झील खुद एक नई आपदा का कारण बन सकती है। यदि झील का प्राकृतिक अवरोध अचानक टूटता है, तो बड़ी मात्रा में पानी एक साथ नीचे की ओर बह सकता है। इससे पहले से क्षतिग्रस्त नदी घाटियों, पुलों और बस्तियों पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा।

विशेषज्ञों के लिए यह स्थिति इसलिए भी चिंताजनक है क्योंकि हिमालयी क्षेत्र में ग्लेशियर, बर्फ, चट्टान और मलबे से बनने वाली अस्थायी झीलें अचानक टूटने पर बेहद तेज बाढ़ पैदा कर सकती हैं। ऐसी घटनाओं में पानी के साथ भारी मात्रा में मलबा भी नीचे आता है, जिससे नुकसान केवल जलभराव तक सीमित नहीं रहता।

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आज की स्थिति में खतरा और बढ़ा

28 अगस्त की ताजा रिपोर्टों के अनुसार नेपाल में बाढ़ से मरने वालों की संख्या बढ़कर 469 हो गई है। बचाव दल अभी भी लापता लोगों की तलाश में जुटे हैं। इसी बीच चीन की ओर से नई बैरियर झील को लेकर आपात चेतावनी ने चिंता और बढ़ा दी है।

दोनों देशों के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ पहले से हुई तबाही के बीच लोगों को बचाना और दूसरी तरफ संभावित दूसरी बाढ़ से प्रभावित आबादी को सुरक्षित करना।

निष्कर्ष

नेपाल-चीन सीमा क्षेत्र में आई विनाशकारी बाढ़ के बाद अब नई बैरियर झील का खतरा सामने आया है। छोचेन खोला और पुरेपु त्सांगपो नदियों के संगम के पास बनी झील में करीब 20 लाख घन मीटर पानी जमा है और अगले तीन दिनों में करीब 30 लाख घन मीटर अतिरिक्त पानी आने का अनुमान है। चीन ने इसके संभावित टूटने को लेकर चेतावनी जारी की है।

पहली बाढ़ में सैकड़ों लोगों की जान जा चुकी है और हजारों लोग लापता हैं। बड़ी संख्या में भारतीय नागरिक भी अब तक लापता बताए गए हैं। ऐसे में संभावित दूसरी बाढ़ ने नेपाल और चीन के राहत एवं बचाव अभियानों के सामने एक और गंभीर चुनौती खड़ी कर दी है।

अब सबसे महत्वपूर्ण कार्य झील के जलस्तर की लगातार निगरानी, संवेदनशील इलाकों से समय रहते लोगों को हटाना और दोनों देशों के बीच त्वरित सूचना एवं राहत समन्वय सुनिश्चित करना है। हिमालयी क्षेत्र में लगातार बढ़ती ऐसी प्राकृतिक आपदाएं यह भी रेखांकित करती हैं कि सीमा पार आपदा प्रबंधन और शुरुआती चेतावनी प्रणालियों को और मजबूत करने की जरूरत है।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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