SAINA NEHWAL: भारत की स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी और ओलिंपिक पदक विजेता साइना नेहवाल ने आखिरकार अपने प्रोफेशनल बैडमिंटन करियर से संन्यास लेने की आधिकारिक पुष्टि कर दी है। पिछले काफी समय से कोर्ट से दूर चल रही साइना नेहवाल ने स्पष्ट किया है कि अब उनका शरीर, विशेषकर उनके घुटने, एलीट स्तर के खेल की शारीरिक मांगों को पूरा करने की स्थिति में नहीं हैं। उन्होंने बताया कि घुटने की पुरानी और गंभीर बीमारी के कारण अब उनके लिए खेलना संभव नहीं रह गया है।

SAINA NEHWAL ने दो साल पहले ही छोड़ दिया था खेलना
साइना नेहवाल ने आखिरी बार वर्ष 2023 में सिंगापुर ओपन में प्रतिस्पर्धी मैच खेला था। हालांकि, उस समय उन्होंने संन्यास की कोई औपचारिक घोषणा नहीं की थी, जिससे उनके फैंस के मन में उनकी वापसी की उम्मीदें बची हुई थीं। हाल ही में एक पॉडकास्ट में बातचीत के दौरान साइना ने इस राज पर से पर्दा उठाया। उन्होंने कहा कि उन्होंने दो साल पहले ही खेलना बंद कर दिया था। संन्यास की औपचारिक घोषणा न करने के पीछे की वजह बताते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने सिद्धांतों और शर्तों पर खेल शुरू किया था और अपनी शर्तों पर ही इसे छोड़ा है, इसलिए उन्हें किसी बड़ी घोषणा की जरूरत महसूस नहीं हुई।

रियो ओलिंपिक के बाद से शुरू हुआ संघर्ष
साइना का करियर रियो ओलिंपिक 2016 के दौरान लगी घुटने की चोट से काफी प्रभावित हुआ था। उस चोट के बाद कई लोगों को लगा था कि उनका करियर खत्म हो गया है, लेकिन साइना ने हार नहीं मानी। उन्होंने अद्भुत जीवटता दिखाते हुए कोर्ट पर वापसी की। चोट के बावजूद उन्होंने 2017 में वर्ल्ड चैंपियनशिप में ब्रॉन्ज मेडल जीता और 2018 के कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड मेडल हासिल कर आलोचकों को करारा जवाब दिया था। साल 2024 में उन्होंने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि उन्हें आर्थराइटिस है, जिससे शीर्ष स्तर पर खेलना लगभग असंभव हो गया है।

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भारतीय बैडमिंटन को दी नई ऊंचाइयां
साइना नेहवाल का करियर उपलब्धियों से भरा रहा है। वह ओलिंपिक मेडल जीतने वाली भारत की पहली बैडमिंटन खिलाड़ी हैं। उन्होंने लंदन ओलिंपिक-2012 में महिला एकल वर्ग में भारत को ब्रॉन्ज मेडल दिलाया था, जो भारतीय बैडमिंटन इतिहास का एक स्वर्णिम क्षण था। इसके अलावा वह दुनिया की नंबर एक रैंकिंग हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला शटलर भी बनीं। उन्होंने तीन ओलिंपिक खेलों में भारत का प्रतिनिधित्व किया। कॉमनवेल्थ गेम्स में भी उनका प्रदर्शन शानदार रहा है, जहां उन्होंने 2010 में नई दिल्ली और 2018 में गोल्ड कोस्ट में हुए खेलों में स्वर्ण पदक जीते थे।

जूनियर चैंपियनशिप से शुरू हुआ था SAINA NEHWAL का सफर
साइना नेहवाल ने अपने करियर की शुरुआत में ही अपनी प्रतिभा का लोहा मनवा दिया था। उन्होंने साल 2008 में बैडमिंटन वर्ल्ड फेडरेशन (BWF) वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीतकर सुर्खियां बटोरी थीं। उसी साल उन्होंने पहली बार ओलिंपिक में हिस्सा लिया और क्वार्टर फाइनल तक पहुंचने वाली पहली भारतीय महिला बनीं। साल 2009 में वह BWF सुपर सीरीज प्रतियोगिता जीतने वाली पहली भारतीय बनीं, जब उन्होंने इंडोनेशिया ओपन जीता था। उनकी इन उपलब्धियों के लिए भारत सरकार ने उन्हें 2009 में अर्जुन अवॉर्ड और 2010 में खेल जगत के सर्वोच्च सम्मान खेल रत्न पुरस्कार से सम्मानित किया था।

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