दिल्ली, ब्यूरो : यूक्रेन और रुस के बीच का विवाद लगातार गहराता ही जा रहा है, 100 दिन से ज्यादा जंग लड़ने के बाद भी अब तक दोनों देशों के बीच का विवाद सुलझा नहीं है, कि एक बार चिंगारी को हवा लग गई है, ऐसा हम इसलिए कह रहे हैं क्योंकि जिस मुद्दे को लेकर दोनों देश एक-दूसरे के जानी दुश्मन बने हुए हैं। एक बार फिर से वो मुद्दा गरमा गया है। बता दें कि दोनों देशो के बीच जंग की असल वजह नाटो है, क्योंकि यूक्रेन नाटो समूह में शामिल होना चाहता है लेकिन रुस नहीं चाहता है कि यूक्रेन नाटो में शामिल हो जाए। लेकिन अब यूक्रेन के राष्ट्रपति जेलेंस्की को 28-29 जून को मैड्रिड में होने जा रहे नाटो शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया जा रहा है। और अगर ऐसा होता है तो जेलेंस्की के इस कदम से पुतिन की दिल की धड़कने बढ़ सकती है ।

 क्या है NATO

  • NATO – द नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटीर्गनाइजेशन
  • 1949 में NATO संगठन बनाया गया
  • 28 यूरोपीय देशों और 2 उत्तरी अमेरिकी देशों के बीच बना संगठन
  • अपने सदस्य देशों को स्वतंत्रता और सुरक्षा देना NATO का उद्देशय
  • दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनाया गया था नाटो
  • नाटो के किसी भी एक देश पर आक्रमण मतलब पूरे संगठन पर आक्रमण
  • नाटो के सदस्य देश को मिलता है उसके संरक्षण का लाभ’
  • PUTIN

द नॉर्थ अटलांटिक ट्रिटीर्गनाइजेशन यानी नाटो एक अंतर्राष्ट्रीय संगठन है। ये संगठन 1949 में 28 यूरोपीय देशों और 2 उत्तरी अमेरिकी देशों के बीच बनाया गया है। नाटो का हेडक्वार्टर ब्रुसेल्स, बेल्जियम में स्थित है। नाटो का उद्देश्य राजनीतिक और सैन्य साधनों से अपने सदस्य देशों को स्वतंत्रता और सुरक्षा की गारंटी देना है। साथ ही रक्षा और सुरक्षा संबंधी मुद्दों पर सहयोग से देशों के बीच संघर्ष को रोकना है। इसे दूसरे विश्व युद्ध के बाद बनाया गया था। ये भी पढ़े-बरसात से पहले ही खुल गई उत्तरकाशी नगर पालिका की पोल

नाटो में किसी देश के शामिल होने का मतलब है कि उस देश पर कोई आसानी से न तो कब्जा कर सकता है , न ही आक्रमण कर सकता है।  नाटो में जो भी देश शामिल होते हैं वो अपने आप में काफी ताकतवार हो जाते हैं। ऐसे में रुस ये नहीं चाहता है कि यूक्रेन भी नाटो में शामिल हो जाए।  लेकिन अब जेलेंस्की को 28-29 जून को मैड्रिड में नाटो शिखर सम्मेलन में आमंत्रित किया जाएगा। नाटो  से यूक्रेन पर शिखर सम्मेलन में निर्णय लेने की उम्मीद है। और अगर जेलेंस्की नाटो शिखर सम्मेलन में जाते हैं, तो रूस की टेंशन और भी बढ़ा जाएगी, जेलेंस्की के इस कदम से पुतिन की दिल की धड़कने बढ़ सकती है और फिर देखने वाली बात ये होगी कि रूस फिर कौन सी चाल चलेगा, क्यों अब तक की जंग में तो रुस के हाथ कुछ खास नहीं लग पाया है। ये भी पढ़े-आमिर लियाकत हुसैन : 49 साल की उम्र में पाक सांसद ने दुनिया को कह दिया अलविदा