RETAIL INFLATION APRIL 2026: भारत सरकार द्वारा जारी अप्रैल 2026 के अनंतिम आंकड़ों के अनुसार देश में खुदरा महंगाई दर यानी CPI आधारित महंगाई 3.48 प्रतिशत दर्ज की गई है। यह मार्च 2026 के 3.40 प्रतिशत के मुकाबले मामूली बढ़ोतरी है, लेकिन अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 4 प्रतिशत के लक्ष्य से नीचे बनी हुई है।
बाजार विशेषज्ञों द्वारा लगाए गए लगभग 3.8 प्रतिशत के अनुमान की तुलना में भी यह आंकड़ा बेहतर माना जा रहा है, जिससे संकेत मिलता है कि फिलहाल देश में महंगाई नियंत्रण के दायरे में बनी हुई है।
RETAIL INFLATION में ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों में स्पष्ट अंतर
ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के आंकड़ों में स्पष्ट अंतर देखने को मिला। अप्रैल 2026 में ग्रामीण क्षेत्रों की RETAIL INFLATION दर 3.74 प्रतिशत रही, जबकि शहरी क्षेत्रों में यह 3.16 प्रतिशत दर्ज की गई।
उत्तराखंड में कुल महंगाई दर 3.50 प्रतिशत रही, जिसमें ग्रामीण इलाकों में 3.98 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 2.66 प्रतिशत महंगाई दर्ज की गई। इससे संकेत मिलता है कि ग्रामीण क्षेत्रों पर महंगाई का असर अपेक्षाकृत अधिक पड़ा है।

खाद्य महंगाई यानी CFPI बढ़कर 4.20 प्रतिशत
खाद्य महंगाई यानी CFPI आधारित फूड इन्फ्लेशन अप्रैल 2026 में बढ़कर 4.20 प्रतिशत पर पहुंच गई, जबकि मार्च 2026 में यह 3.87 प्रतिशत थी। ग्रामीण खाद्य महंगाई 4.26 प्रतिशत और शहरी खाद्य महंगाई 4.10 प्रतिशत दर्ज की गई। इससे स्पष्ट है कि खाद्य वस्तुओं की कीमतों में वृद्धि का सबसे अधिक असर ग्रामीण परिवारों पर पड़ा है।
इन 5 चीजों ने सबसे ज्यादा बिगाड़ा बजट
अप्रैल 2026 में कुछ वस्तुओं की कीमतों में बेहद तेज उछाल देखने को मिला।
- सबसे अधिक महंगाई चांदी की ज्वेलरी में दर्ज की गई, जहां वृद्धि दर 144.34 प्रतिशत रही।
- इसके अलावा कोपरा यानी नारियल 44.55 प्रतिशत,
- सोना-हीरा और प्लेटिनम ज्वेलरी 40.72 प्रतिशत,
- टमाटर 35.28 प्रतिशत
- फूलगोभी 25.58 प्रतिशत महंगी हुई
- पर्सनल केयर और विविध वस्तुओं की श्रेणी में भी 17.66 प्रतिशत की उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई।
इन चीजों में राहत
हालांकि कुछ जरूरी वस्तुओं में राहत भी देखने को मिली।
- आलू की कीमतों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज की गई, जहां महंगाई दर -23.69 प्रतिशत रही।
- प्याज -17.67 प्रतिशत,
- मोटर कार और जीप -7.12 प्रतिशत,
- मटर और चना -6.75 प्रतिशत,
- एयर कंडीशनर -5.06 प्रतिशत सस्ते हुए।
विभिन्न सेक्टर्स में महंगाई दर
हाउसिंग सेक्टर में महंगाई दर अप्रैल 2026 में 2.15 प्रतिशत दर्ज की गई। ग्रामीण क्षेत्रों में यह 2.65 प्रतिशत और शहरी क्षेत्रों में 1.96 प्रतिशत रही। वहीं ईंधन की कीमतों में नरमी के चलते ट्रांसपोर्ट महंगाई दर लगभग स्थिर रही और -0.01 प्रतिशत दर्ज की गई। इसका असर माल ढुलाई और यात्रा लागत पर सकारात्मक रूप में देखा जा रहा है।

READ MORE:
- आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 संसद में पेश, अगले वित्त वर्ष में GDP विकास दर 6.8% से 7.2% रहने का अनुमान
- दिसंबर 2025 में रिटेल महंगाई 1.33% बढ़ी, खाने-पीने की चीजों के दाम बढ़ने से बिगड़ा बजट
- सितंबर में खुदरा महंगाई में बड़ी गिरावट, 8 साल के न्यूनतम स्तर 1.54% पर
भारतीय रिजर्व बैंक ने 1 अप्रैल 2026 से 31 मार्च 2031 तक के लिए खुदरा महंगाई लक्ष्य 4 प्रतिशत तय रखा है, जिसमें 2 से 6 प्रतिशत का दायरा निर्धारित किया गया है। हालांकि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण भविष्य में कच्चे तेल, ऊर्जा और खाद्य वस्तुओं की कीमतों पर दबाव बढ़ने की आशंका बनी हुई है।
ऐसे में आने वाले महीनों में RBI की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों पर विशेष नजर रहेगी। मई 2026 के CPI आंकड़े 12 जून 2026 को जारी किए जाएंगे।
क्या होती है RETAIL INFLATION?
RETAIL INFLATION भारत में आम लोगों द्वारा रोजमर्रा में खरीदे जाने वाले सामान और सेवाओं की कीमतों में होने वाले औसत बदलाव को दर्शाती है। इसे मुख्य रूप से CONSUMER PRICE INDEX (CPI) के आधार पर मापा जाता है।
MINISTRY OF STATISTICS AND PROGRAMME IMPLEMENTATION (MOSPI) हर महीने CPI के आंकड़े जारी करता है, जिनके आधार पर यह पता चलता है कि महंगाई बढ़ रही है या घट रही है। CPI एक “उपभोग टोकरी” यानी CONSUMPTION BASKET पर आधारित इंडेक्स होता है।
इसमें खाद्य पदार्थ, ईंधन, आवास, कपड़े, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, परिवहन और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों से जुड़ी वस्तुएं और सेवाएं शामिल रहती हैं। इन सभी वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में बदलाव को मिलाकर खुदरा महंगाई दर तय की जाती है।
डिस्क्लेमर: ऊपर दी गई RETAIL INFLATION से जुड़ी जानकारी सोशल मीडिया, गूगल और विभिन्न वेबसाइट्स/न्यूज़ मीडिया रिपोर्ट्स पर आधारित है।
देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

