Regenerative Braking एक ऐसी तकनीक है, जो गाड़ी के ब्रेक लगने या रफ्तार कम होने पर बेकार जाने वाली ऊर्जा को बिजली में बदलकर फिर से बैटरी में भेज देती है। आम गाड़ियों में ब्रेक लगाने पर यह ऊर्जा गर्मी बनकर हवा में उड़ जाती है।
सोचिए, अगर इसी ऊर्जा से बैटरी चार्ज हो जाए तो कितना फायदा होगा। यही वजह है कि आज लगभग हर इलेक्ट्रिक और हाइब्रिड गाड़ी में यह सिस्टम मिलता है। आइए आसान भाषा में समझते हैं यह कैसे काम करता है।
आम ब्रेक और इस तकनीक में फर्क
साधारण ब्रेक में ब्रेक पैड पहिए की डिस्क से रगड़ खाते हैं। इस घर्षण से गाड़ी रुकती है, लेकिन चलती गाड़ी की सारी ऊर्जा गर्मी में बदलकर खत्म हो जाती है। वहीं इस नई तकनीक में गाड़ी की मोटर ही उल्टा काम करके रफ्तार कम करती है और साथ में बिजली भी बनाती है।
Regenerative Braking कैसे काम करता है?
इलेक्ट्रिक गाड़ी में मोटर बैटरी से बिजली लेकर पहियों को घुमाती है। जैसे ही आप एक्सीलरेटर छोड़ते हैं या ब्रेक दबाते हैं, यही मोटर जनरेटर की तरह काम करने लगती है। अब घूमते पहिए मोटर को घुमाते हैं और इससे बिजली पैदा होती है। यह बिजली कंट्रोलर के जरिए वापस बैटरी में पहुंच जाती है। बिजली बनाते समय मोटर पहियों पर उल्टा खिंचाव डालती है। इसी खिंचाव से गाड़ी की रफ्तार धीरे धीरे कम होने लगती है।
किन गाड़ियों में मिलता है यह सिस्टम?
इलेक्ट्रिक कार, इलेक्ट्रिक स्कूटर और इलेक्ट्रिक बाइक में यह तकनीक अब आम हो चुकी है। स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड कारों में भी यह छोटी बैटरी को चार्ज रखने में मदद करती है। सिर्फ सड़क पर ही नहीं, दिल्ली मेट्रो जैसी मेट्रो ट्रेनें और कई इलेक्ट्रिक रेल इंजन भी ब्रेकिंग के दौरान बिजली वापस सिस्टम में भेजते हैं।
इसके बड़े फायदे
सबसे बड़ा फायदा रेंज में होता है। Regenerative Braking की वजह से शहर के रुक रुक कर चलने वाले ट्रैफिक में इलेक्ट्रिक गाड़ी पहले से ज्यादा दूरी तय कर पाती है। इससे ब्रेक पैड और डिस्क पर दबाव भी कम पड़ता है।
नतीजा यह कि इनकी उम्र बढ़ जाती है और मेंटेनेंस का खर्च घटता है। पहाड़ी रास्तों पर ढलान उतरते समय भी यह काफी मददगार है। उत्तराखंड जैसे इलाकों में लंबी उतराई पर बैटरी थोड़ी चार्ज भी हो जाती है।
सिस्टम की कुछ सीमाएं
यह सिस्टम साधारण ब्रेक की पूरी जगह नहीं ले सकता। अचानक तेज ब्रेक लगाने या गाड़ी को पूरी तरह रोकने के लिए आम ब्रेक की जरूरत पड़ती ही है। जब बैटरी पूरी चार्ज होती है, तब वह और बिजली नहीं ले पाती। ऐसे में Regenerative Braking का असर कम हो जाता है। बहुत धीमी रफ्तार पर भी इससे ज्यादा बिजली नहीं बनती। बहुत ठंडे मौसम में भी बैटरी कम बिजली स्वीकार करती है।
ड्राइविंग में इसका सही इस्तेमाल
कई इलेक्ट्रिक गाड़ियों में इसके अलग अलग लेवल चुनने का विकल्प होता है। शहर में ऊंचा लेवल और हाईवे पर हल्का लेवल रखना बेहतर रहता है। कुछ गाड़ियां वन पेडल ड्राइविंग भी देती हैं, जिसमें सिर्फ एक्सीलरेटर छोड़ने से ही गाड़ी धीमी होकर लगभग रुक जाती है। आगे के ट्रैफिक का अंदाजा लगाकर पहले से एक्सीलरेटर छोड़ने की आदत डालें। इससे Regenerative Braking ज्यादा ऊर्जा वापस ला पाता है।

गाड़ियों से जुड़ी अन्य जानकारी
हाइब्रिड तकनीक को और करीब से समझने के लिए हाइब्रिड और प्लग इन हाइब्रिड कार का अंतर पढ़ें। इलेक्ट्रिक गाड़ी से लंबा सफर करने वालों के लिए ईवी रोड ट्रिप से जुड़ी जरूरी बातें भी काम की हैं। बेहतर रेंज और सुरक्षा के लिए टायर प्रेशर की सही जानकारी भी जरूर रखें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. क्या Regenerative Braking से बैटरी पूरी चार्ज हो सकती है?
नहीं, इससे बैटरी का सिर्फ कुछ हिस्सा वापस चार्ज होता है। गाड़ी को पूरी तरह चार्ज करने के लिए चार्जर की जरूरत पड़ती ही है।
2. क्या पेट्रोल और डीजल गाड़ियों में Regenerative Braking होता है?
साधारण पेट्रोल डीजल गाड़ियों में यह नहीं होता। हां, माइल्ड और स्ट्रॉन्ग हाइब्रिड गाड़ियों में इसका सीमित रूप मिलता है।
3. क्या Regenerative Braking से ब्रेक पैड जल्दी नहीं घिसते?
हां, ज्यादातर रफ्तार मोटर से ही कम हो जाती है, इसलिए ब्रेक पैड का इस्तेमाल कम होता है और वे लंबे चलते हैं।
4. इस तकनीक के बारे में और विस्तार से कहां पढ़ें?
इसके इतिहास और तकनीकी पहलुओं की विस्तृत जानकारी विकिपीडिया पर उपलब्ध है।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

