PWD के मेट-बेलदारों को कई माह से नहीं मिला वेतन, निजी कंपनी कर रही शोषण?

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लोनिवि भवन यमुना काॅलोनी में क्रमिक अनशन शुरू, निजी कंपनी की बजाय उपनल से तैनात करने की मांग उठाई

देहरादून, ब्यूरो। उत्तराखंड के लोक निर्माण विभाग के विभिन्न खंडों में आउटसोर्सिंग के माध्यम से कार्यरत कर्मचारियों ने अपनी मांगों को लेकर क्रमिक अनशन शुरू कर दिया। यमुना कॉलोनी स्थित लोनिवि भवन में धरना दे रहे आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने विभाग और ठेकेदारों पर उत्पीड़न का आरोप लगाया है।

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मेट बेलदार कर्मचारी संघ के प्रदेश अध्यक्ष जयेंद्र सिंह का कहना है कि उत्तराखंड के हिमालय क्षेत्र का प्रदेश के गरीब बेरोजगार क्षेत्रीय ग्रामीण मूलनिवासी मेट और बेलदार श्रमिक रोजगार पाने की चाहत में लोक निर्माण विभाग के विभिन्न राष्ट्रीय राजमार्गों पर प्राइवेट एजेंसी के माध्यम से कार्यरत हैं। परंतु कर्मचारियों को वर्तमान तक किसी प्रकार के सामाजिक सुरक्षा प्राप्त नहीं है तथा हमें समय पर पूरा वेतन भी प्राप्त नहीं होता है। उन्होंने कहा कि ठेकेदारों द्वारा कर्मचारियों का ईपीएफ और ईएसआई बीमा आदि का लाभ भी नहीं दिया जा रहा है। इसके अलावा किसी दुर्घटना में मृत्यु होने पर उनके परिजनों को कोई भी आर्थिक सहायता नहीं दी जाती है। उन्होंने कहा कि प्राइवेट आउटसोर्सिंग एजेंसियों के द्वारा कर्मचारियों का अत्यधिक शोषण किया जा रहा है। इसके अलावा उन्हें कई माह से वेतन नहीं मिला है जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है। उन्होंने समस्त मेट और बेलदार कर्मचारियों को उपनल से विभाग में सेवायोजन करने की मांग की है। वहीं, बीते 2 दिनों से भीम दत्त शर्मा दया किशन लोनी गुमान सिंह रावत वीरेंद्र चैहान और खिला आनंद जोशी अपनी मांगों को लेकर क्रमिक अनशन पर बैठ गए हैं आंदोलनरत कर्मियों का कहना है कि यदि उनकी मांगे नहीं मानी जाती है तो उन्हें मजबूरन आमरण अनशन पर बैठना पड़ेगा।

आउटसोर्सिंग मेट-बेलदारों की प्रमुख मांगें…

  • लोक निर्माण विभाग में वर्षो से पीड़ित शोषित आउट सोर्स पर कार्यरत कर्मियों को सुरक्षित भविष्य के लिए शासन के साथ आदेश का अनुपालन करते हुए समस्त कर्मचारियों को विभागीय संविदा या उपनल के माध्यम से विभाग में समायोजित किया जाए।
  • लोनिवि के विभिन्न खंडों में आउटसोर्स कर्मचारियों की नई निविदाओं पर तत्काल रोक लगाई जाए।
  • विभाग में 2014 से 2020 तक कार्यरत रहे मेट और बेलदार कर्मचारियों को संघ की सूची के अनुसार सेवा तत्काल बहाल की जाए और कर्मचारियों को वेतन का बकाया भुगतान किया जाए।

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