शहरों में बढ़ते प्रदूषण और भीड़भाड़ भरे सार्वजनिक परिवहन की समस्या को देखते हुए केंद्र सरकार ने एक बड़ी पहल शुरू की है। इसी पहल का नाम है PM eBus Sewa Scheme, जिसके तहत देशभर के शहरों में इलेक्ट्रिक बसें चलाई जा रही हैं। यह योजना न सिर्फ यात्रा को सस्ता बनाती है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी बड़ी राहत मानी जा रही है।
PM eBus Sewa Scheme क्या है?
PM eBus Sewa Scheme को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त 2023 में मंजूरी दी थी, जिसका मकसद शहरी बस सेवा को आधुनिक और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। इस योजना पर कुल 57,613 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है, जिसमें से 20,000 करोड़ रुपये केंद्र सरकार सब्सिडी के रूप में देगी।
बाकी राशि राज्य सरकारों और स्थानीय निकायों को जुटानी होती है, जिससे परियोजना का पूरा भार सिर्फ केंद्र पर नहीं रहता। इस योजना के दो हिस्से रखे गए हैं, जिनमें एक हिस्सा सीधे बस संचालन के खर्च से जुड़ा है और दूसरा हिस्सा चार्जिंग स्टेशन तथा डिपो जैसे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने पर केंद्रित है।
कितने शहरों और बसों को मिलेगा फायदा?
इस योजना के तहत देश के 169 शहरों में कुल 10,000 इलेक्ट्रिक बसें उतारी जानी हैं। जिन शहरों की आबादी 2011 की जनगणना के अनुसार तीन लाख या उससे अधिक है, उन्हें इस योजना में प्राथमिकता दी जाती है। इसके अलावा सभी केंद्र शासित प्रदेशों की राजधानी और उत्तर-पूर्वी व पहाड़ी राज्यों के शहरों को भी इसमें शामिल किया गया है, भले ही उनकी आबादी तीन लाख से कम हो।
पीपीपी मॉडल और फंडिंग
यह योजना पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप यानी पीपीपी मॉडल पर चलाई जा रही है, जिसमें निजी ऑपरेटर बसें खरीदकर उन्हें चलाते हैं। शहर के परिवहन प्राधिकरण को बस खरीदने का खर्च नहीं उठाना पड़ता, बल्कि हर किलोमीटर चलने पर तय राशि का भुगतान किया जाता है।
पहले निजी ऑपरेटरों को भुगतान में देरी की समस्या रहती थी, इसलिए सरकार ने अक्टूबर 2024 में अलग से पेमेंट सिक्योरिटी मैकेनिज्म भी लागू किया, ताकि ऑपरेटरों को समय पर पैसा मिलता रहे। इसके अलावा चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर पर होने वाला पूरा खर्च केंद्र सरकार खुद वहन करती है, ताकि शहरों को शुरुआती निवेश की चिंता न करनी पड़े।
यात्रियों और शहर को क्या फायदा?
आम यात्रियों के लिए यह योजना सस्ती और आरामदायक बस सेवा का जरिया बनती जा रही है, खासकर उन शहरों में जहां पहले संगठित बस सेवा मौजूद ही नहीं थी। बस स्टॉप को स्मार्ट बनाने, टिकटिंग को डिजिटल करने और लास्ट माइल कनेक्टिविटी सुधारने पर भी इस योजना के तहत काम किया जा रहा है। इसके साथ ही अनुमान है कि इस योजना से 45 से 55 हजार तक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे।

PM eBus Sewa Scheme का पर्यावरण पर असर
डीजल और पेट्रोल बसों की जगह इलेक्ट्रिक बसें चलने से शहरों में वायु प्रदूषण और शोर दोनों में कमी आने की उम्मीद है। लंबे समय में यह कदम देश के कार्बन उत्सर्जन घटाने के लक्ष्य को हासिल करने में भी मदद करेगा। मार्च 2026 तक की जानकारी के अनुसार सैकड़ों शहरों में बसों की संख्या तय की जा चुकी है और चरणबद्ध तरीके से नई बसें सड़कों पर उतारी जा रही हैं।
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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. PM eBus Sewa Scheme की शुरुआत कब हुई थी?
इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने अगस्त 2023 में मंजूरी दी थी।
2. PM eBus Sewa Scheme में कुल कितनी बसें शामिल की जाएंगी?
पूरे देश के 169 शहरों में कुल 10,000 इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी।
3. क्या आम नागरिक इस योजना के लिए सीधे आवेदन कर सकता है?
नहीं, यह शहर स्तर की इंफ्रास्ट्रक्चर योजना है, अधिक जानकारी के लिए आधिकारिक पोर्टल pmebus.in देखा जा सकता है।
4. PM eBus Sewa Scheme के तहत बस किराया कौन तय करता है?
किराया संबंधित राज्य परिवहन प्राधिकरण द्वारा तय किया जाता है, जो आमतौर पर आम बसों की तरह किफायती रखा जाता है।
5. इस योजना से रोजगार पर क्या असर पड़ेगा?
अनुमान के अनुसार इससे 45 से 55 हजार तक प्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
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