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Ganesh Chaturthi special: भगवान गणेश को हाथी का सिर कैसे मिला? जानिए इसके पीछे की कथा

Ganesh Chaturthi के मौके पर हर घर में एक कहानी जरूर सुनाई जाती है, जो बताती है कि भगवान गणेश का जन्म कैसे हुआ और उन्हें हाथी का सिर कैसे मिला। यही पीढ़ी दर पीढ़ी सुनाई जाती रही है और आज भी पूजा के दौरान इसका विशेष महत्व माना जाता है। अगर आप भी Ganesh Chaturthi कथा विस्तार से जानना चाहते हैं, तो यह लेख आपके लिए है।

Ganesh Chaturthi Katha: शुरुआत कैसे हुई?

पौराणिक कथाओं के अनुसार यह कहानी उस समय की है, जब माता पार्वती कैलाश पर्वत पर स्नान करने जा रही थीं। उन्हें स्नान के दौरान अकेलापन महसूस होता था, क्योंकि द्वार पर पहरा देने वाला कोई अपना नहीं था, जिस पर वे पूरा भरोसा कर सकें। इसी सोच के साथ उन्होंने खुद के लिए एक रक्षक बनाने का निर्णय लिया, जो सिर्फ उन्हीं की आज्ञा माने।

पार्वती जी ने गणेश जी को कैसे बनाया?

माता पार्वती ने अपने शरीर पर लगे उबटन से एक सुंदर बालक की मूर्ति बनाई और उसमें प्राण फूंककर उसे जीवन दिया। यही Ganpati Janm Katha का सबसे प्रसिद्ध हिस्सा माना जाता है, जिसमें माता ने बालक को आदेश दिया कि जब तक वे स्नान कर रही हैं, कोई भी अंदर प्रवेश न करे। बालक ने पूरी निष्ठा के साथ द्वार पर पहरा देना शुरू कर दिया और किसी को भी भीतर जाने की अनुमति नहीं दी।

भगवान शिव और गणेश जी के बीच युद्ध

कुछ समय बाद जब भगवान शिव कैलाश लौटे, तो द्वार पर खड़े अनजान बालक ने उन्हें भी अंदर जाने से रोक दिया। भगवान शिव को यह बात असहज लगी, क्योंकि वे उस बालक को पहचान नहीं पाए और दोनों के बीच भीषण संघर्ष छिड़ गया। क्रोध में आकर भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से बालक का सिर धड़ से अलग कर दिया, जिससे माता पार्वती अत्यंत दुखी और क्रोधित हो गईं।

गणेश जी को हाथी का सिर कैसे मिला?

माता पार्वती के विलाप को देखकर भगवान शिव को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने बालक को पुनर्जीवित करने का वचन दिया। उन्होंने अपने गणों को आदेश दिया कि जो भी प्राणी सबसे पहले उत्तर दिशा की ओर मुंह करके सोता मिले, उसका सिर लेकर आएं।

Ganesh Chaturthi
Ganesh Chaturthi

गण एक हाथी का सिर लेकर आए, जिसे भगवान शिव ने बालक के धड़ से जोड़कर उसे पुनः जीवित कर दिया।  इसी घटना के बाद बालक का नाम गणेश रखा गया और उन्हें सभी देवताओं में प्रथम पूज्य होने का वरदान भी मिला।

Ganesh Chaturthi और इस कथा का संबंध

माना जाता है कि भगवान गणेश का यह पुनर्जन्म भाद्रपद माह की शुक्ल चतुर्थी तिथि को हुआ था, इसी वजह से हर साल इसी तिथि पर Ganesh Chaturthi मनाई जाती है। पूजा से पहले यह कथा सुनने या सुनाने की परंपरा आज भी घर-घर में निभाई जाती है।

उपरोक्त जानकारी धार्मिक मान्यताओं और विभिन्न पौराणिक स्रोतों पर आधारित है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. Ganesh Chaturthi Katha में गणेश जी को किसने बनाया था?
माता पार्वती ने अपने उबटन से गणेश जी को बनाया था और उसमें प्राण फूंके थे।

2. भगवान शिव ने गणेश जी का सिर क्यों काटा था?
द्वार पर पहरा देते समय गणेश जी ने शिव जी को न पहचान पाने के कारण अंदर जाने से रोक दिया था, जिससे क्रोधित होकर शिव जी ने उनका सिर काट दिया था।

3. गणेश जी को हाथी का सिर कैसे मिला?
शिव जी के गणों को सबसे पहले उत्तर दिशा में सोता हुआ हाथी मिला, जिसका सिर लेकर गणेश जी को पुनर्जीवित किया गया।

4. गणेश जी को प्रथम पूज्य क्यों माना जाता है?
भगवान शिव ने यह वरदान दिया था कि किसी भी शुभ कार्य से पहले सबसे पहले गणेश जी की पूजा की जाएगी, विस्तृत जानकारी के लिए Drikpanchang जैसी वेबसाइट पर भी यह कथा पढ़ी जा सकती है।

5. यह कथा किस माह में सुनाई जाती है?
यह कथा मुख्य रूप से भाद्रपद माह में Ganesh Chaturthi के अवसर पर सुनाई जाती है।

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