PAURI GARHWAL GULDAR: उत्तराखंड के पौड़ी जनपद अंतर्गत गजल्ड गांव में पिछले कई दिनों से खौफ का पर्याय बना आदमखोर गुलदार आखिरकार मारा गया है। बुधवार की देर शाम वन विभाग की टीम और प्रसिद्ध शिकारी जॉय हुकिल ने संयुक्त अभियान में उसे ढेर कर दिया। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में दहशत का माहौल कम हुआ है और स्थानीय ग्रामीणों ने राहत की सांस ली है। गढ़वाल वन प्रभाग के डीएफओ अभिमन्यु सिंह ने गुलदार के मारे जाने की आधिकारिक पुष्टि की है। वन विभाग ने दावा किया है कि यह वही गुलदार था जिसने हाल ही में एक ग्रामीण को अपना निवाला बनाया था, हालांकि वैज्ञानिक पुष्टि के लिए डीएनए सैंपल भी लिए जा रहे हैं।

PAURI GARHWAL GULDAR: मशहूर शिकारी जॉय हुकिल और राकेश बड़थ्वाल की तैनाती
ग्रामीणों के भारी विरोध और मांग को देखते हुए सोमवार की रात ही मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने मशहूर शिकारी जॉय हुकिल और राकेश चंद्र बड़थ्वाल को इस अभियान के लिए तैनात करने का आदेश जारी कर दिया। आदेश मिलते ही दोनों शिकारी रात में ही गजल्ड गांव पहुंच गए। उन्होंने डीएफओ गढ़वाल अभिमन्यु सिंह के साथ मिलकर पूरे क्षेत्र की रैकी की। उन्होंने गुलदार के आने-जाने वाले रास्तों और घटनास्थल के आसपास के 200 से 300 मीटर के दायरे का बारीकी से निरीक्षण किया। मंगलवार को टीम ने ग्रामीणों से गुलदार की गतिविधियों और चहलकदमी को लेकर फीडबैक भी लिया ताकि सटीक लोकेशन का अंदाजा लगाया जा सके।

PAURI GARHWAL GULDAR: सटीक निशाना और अंतिम विकल्प
बुधवार की शाम वन विभाग की टीम और चारों शूटर मोर्चे पर तैनात थे। रात करीब साढ़े सात बजे घटनास्थल के पास ही गुलदार की गतिविधि दिखाई दी। शूटरों और विभागीय टीम ने पहले उसकी पहचान सुनिश्चित की और जब यह पक्का हो गया कि यह वही आदमखोर है, तो अंतिम विकल्प के रूप में उसे गोली मार दी गई। यह प्रसिद्ध शिकारी जॉय हुकिल के करियर का 48वां शिकार था। मारा गया गुलदार मादा है और उसकी उम्र लगभग 5 से 6 साल के बीच है। शव को पोस्टमार्टम और आगे की जांच के लिए नागदेव रेंज मुख्यालय पौड़ी ले जाया गया है, जहां पशु चिकित्सक उसका परीक्षण कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री के सख्त निर्देश और डीएनए जांच
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने इस घटना को बेहद गंभीरता से लिया था। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए थे कि ग्रामीणों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें कोई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। सीएम के इन्हीं सख्त निर्देशों के बाद वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई की। हालांकि, वैज्ञानिक रूप से पुष्टि करने के लिए मृत गुलदार का डीएनए सैंपल लिया जा रहा है। इसका मिलान उस डीएनए से किया जाएगा जो मृतक ग्रामीण राजेंद्र नौटियाल के शरीर या कपड़ों से मिला था। डीएफओ ने कहा कि विभाग शत-प्रतिशत आश्वस्त है कि मारा गया जानवर ही आदमखोर था।

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