PARLIAMENT SPECIAL SESSION: भारतीय संसद में आज से तीन दिवसीय विशेष सत्र की शुरुआत हो रही है, जो 16 से 18 अप्रैल तक चलेगा। इस सत्र के दौरान तीन महत्वपूर्ण विधेयक पेश किए जाएंगे, जिनसे देश के चुनावी ढांचे और प्रतिनिधित्व प्रणाली में बड़ा बदलाव संभव है। सरकार इसे महिला सशक्तिकरण की दिशा में ऐतिहासिक कदम बता रही है, जबकि विपक्ष परिसीमन से जुड़े प्रावधानों को लेकर कड़ा विरोध जता रहा है।
PARLIAMENT SPECIAL SESSION में तीन विधेयक, व्यापक असर होगा
इस सत्र में जिन तीन प्रमुख बिलों को पेश किया जाएगा, उनमें संविधान (131वां संशोधन) विधेयक 2026, परिसीमन (संशोधन) विधेयक और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक 2026 शामिल हैं। अर्जुन राम मेघवाल संविधान संशोधन और परिसीमन से जुड़े विधेयक पेश करेंगे, जबकि अमित शाह केंद्र शासित प्रदेश कानून में संशोधन वाला बिल सदन में रखेंगे।
PARLIAMENT SPECIAL SESSION में इन विधेयकों का मुख्य प्रस्ताव यह है कि लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाए, जो 2029 से लागू होगा। साथ ही लोकसभा की वर्तमान 543 सीटों को बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव रखा गया है, जिसमें 815 सीटें राज्यों के लिए और 35 केंद्र शासित प्रदेशों के लिए होंगी। इनमें से 273 सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी। सीटों का अंतिम निर्धारण परिसीमन प्रक्रिया के जरिए किया जाएगा।

PARLIAMENT SPECIAL SESSION में चर्चा का समय तय, प्रधानमंत्री भी रख सकते हैं पक्ष
लोकसभा में इन विधेयकों पर 18 घंटे की चर्चा निर्धारित की गई है, जबकि राज्यसभा में 10 घंटे बहस होगी। भाजपा और कांग्रेस सहित कई दलों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया है। इन विधेयकों को पारित कराने के लिए सरकार को दो-तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। संसद से मंजूरी मिलने के बाद यह कानून 31 मार्च 2029 से प्रभावी होगा और उसी साल होने वाले लोकसभा चुनाव में पहली बार लागू किया जाएगा। नरेंद्र मोदी भी इस पर अपनी बात रख सकते हैं।
परिसीमन का नया फॉर्मूला
सरकारी सूत्रों के मुताबिक परिसीमन केवल 2011 की जनगणना पर आधारित नहीं होगा, बल्कि एक ऐसे फॉर्मूले पर काम किया जाएगा जिसमें सभी राज्यों की सीटों में लगभग 50 प्रतिशत की वृद्धि की जाएगी। उदाहरण के तौर पर तमिलनाडु की 39 सीटें इस नए फॉर्मूले के तहत बढ़कर 59 हो सकती हैं, जबकि केवल 2011 जनगणना के आधार पर यह संख्या 49 तक ही पहुंचती।
अन्य राज्यों में संभावित बदलावों की बात करें तो उत्तर प्रदेश में सीटें 80 से बढ़कर 120, महाराष्ट्र में 48 से 72, पश्चिम बंगाल में 42 से 63, बिहार में 40 से 60, मध्य प्रदेश में 29 से 44, कर्नाटक में 28 से 42, गुजरात में 26 से 39, आंध्र प्रदेश और राजस्थान में 25 से बढ़कर 38, ओडिशा में 21 से 32 और केरल में 20 से 30 सीटें होने का अनुमान है। हालांकि ये आंकड़े अभी अंतिम नहीं हैं।
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आरक्षण का समर्थन, परिसीमन का विरोध
विपक्ष ने स्पष्ट किया है कि वह PARLIAMENT SPECIAL SESSION में महिला आरक्षण का समर्थन करता है, लेकिन परिसीमन और सीटों की संख्या बढ़ाने के प्रस्ताव के खिलाफ है। मल्लिकार्जुन खड़गे ने विपक्षी दलों की बैठक के बाद कहा कि इस मुद्दे पर सभी दल एकजुट हैं। बैठक में राहुल गांधी सहित कई प्रमुख नेता शामिल हुए।

राहुल गांधी ने इस प्रस्तावित परिसीमन को ‘खतरनाक योजना’ और ‘राष्ट्र-विरोधी कदम’ बताया। उन्होंने मांग की कि महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण मौजूदा 543 सीटों के आधार पर ही तुरंत लागू किया जाए, जैसा कि 2023 में पारित अनुच्छेद 334(A) में उल्लेख है। विपक्ष का तर्क है कि यदि परिसीमन 2011 की जनगणना के आधार पर किया गया, तो दक्षिण भारत, पूर्वोत्तर और छोटे राज्यों का प्रतिनिधित्व कम हो सकता है। इस पर निर्मला सीतारमण ने कहा कि परिसीमन आयोग सभी राजनीतिक दलों से चर्चा के बाद ही अंतिम निर्णय लेगा।
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