/ Feb 12, 2026
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PARLIAMENT BUDGET SESSION: संसद के बजट सत्र का 12वां दिन हंगामे और तीखी बयानबाजी की भेंट चढ़ता नजर आ रहा है। गुरुवार को सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विपक्षी दलों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। सदन की कार्यवाही शुरू होने के मात्र 7 मिनट के भीतर ही हंगामे के चलते लोकसभा को स्थगित करना पड़ा। इस बीच केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू द्वारा सोशल मीडिया पर साझा किए गए एक वीडियो ने राजनीतिक माहौल को और अधिक गरमा दिया है। यह वीडियो लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के चैंबर के भीतर का बताया जा रहा है, जिसमें विपक्षी सांसद विरोध जताते नजर आ रहे हैं।
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक वीडियो क्लिप पोस्ट की है। रिजिजू का दावा है कि यह वीडियो 4 फरवरी का है, जब विपक्षी सांसद लोकसभा अध्यक्ष के कक्ष में दाखिल हुए थे। उन्होंने इस वीडियो को ‘अवैध’ बताते हुए आरोप लगाया कि कांग्रेस के 20-25 सांसदों ने अध्यक्ष के कक्ष में घुसकर उन्हें अपशब्द कहे और प्रधानमंत्री के खिलाफ भी अनुचित भाषा का प्रयोग किया। रिजिजू ने अपने बयान में कहा कि विपक्षी सांसदों ने न केवल सदन की गरिमा का उल्लंघन किया, बल्कि प्रधानमंत्री को शारीरिक रूप से भी धमकी देने की कोशिश की।
मंत्री ने विशेष रूप से प्रियंका गांधी और केसी वेणुगोपाल की मौजूदगी का जिक्र करते हुए गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि इन बड़े नेताओं के सामने ही विपक्षी सांसदों ने अमर्यादित आचरण किया। रिजिजू के अनुसार, अगर सत्ता पक्ष के सांसदों ने संयम नहीं बरता होता, तो सदन के भीतर स्थिति बेहद गंभीर हो सकती थी। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पार्टी बहस और चर्चा में विश्वास रखती है, लेकिन सांसदों द्वारा दी जाने वाली ऐसी धमकियों का समर्थन नहीं करती।

संसदीय कार्य मंत्री के आरोपों पर प्रियंका गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने अपशब्द कहने या सांसदों को उकसाने की बात को पूरी तरह से गलत करार दिया है। प्रियंका गांधी का कहना है कि वे उस दौरान चुपचाप थीं और किसी को उकसाने का सवाल ही पैदा नहीं होता। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने अंत में केवल शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी थी। विपक्ष का तर्क है कि सरकार द्वारा साझा किया गया वीडियो और लगाए गए आरोप केवल सदन के मुख्य मुद्दों से ध्यान भटकाने की एक कोशिश है।

दूसरी ओर, गुरुवार सुबह 11 बजे जैसे ही लोकसभा की कार्यवाही शुरू हुई, विपक्षी सांसद हाथों में प्लेकार्ड और पोस्टर लेकर सदन के बीचों-बीच (वेल) पहुंच गए। नारेबाजी और हंगामे के कारण प्रश्नकाल नहीं चल सका। पीठासीन अधिकारी केपी तेन्नेटी ने सांसदों से शांत रहने की अपील की, लेकिन गतिरोध बरकरार रहने के कारण सदन को 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा। इसी दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी राज्यसभा की कार्यवाही में हिस्सा लेने के लिए पहुंचे।
सदन में चल रहे इस गतिरोध के बीच कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में यह दावा किया गया है कि सरकार लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव (प्रिविलेज मोशन) ला सकती है। किरेन रिजिजू ने पहले भी संकेत दिए थे कि राहुल गांधी द्वारा सरकार पर लगाए गए आरोपों के मद्देनजर यह कदम उठाया जा सकता है। विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव एक ऐसी प्रक्रिया है जिसके माध्यम से सदन का कोई भी सदस्य दूसरे सदस्य पर सदन की मर्यादा या अधिकारों के उल्लंघन का आरोप लगाता है।

संविधान के अनुच्छेद 105 के तहत सांसदों को सदन में अपनी बात रखने की स्वतंत्रता और कुछ विशेष अधिकार प्राप्त हैं। यदि कोई सदस्य इन अधिकारों का दुरुपयोग करता है या गलत जानकारी साझा करता है, तो उसके खिलाफ यह प्रस्ताव लाया जा सकता है। वर्तमान स्थिति में यदि अध्यक्ष इस प्रस्ताव को अनुमति देते हैं, तो मामला विशेषाधिकार समिति के पास जाएगा, जो जांच के बाद अपनी रिपोर्ट देगी। दोषी पाए जाने पर संबंधित सदस्य को फटकार, चेतावनी या सदन से निलंबन तक की कार्रवाई का सामना करना पड़ सकता है।

हंगामे और गतिरोध के बीच PARLIAMENT BUDGET SESSION में मंगलवार को लोकसभा में एक लंबी बाधा के बाद आम बजट पर चर्चा संपन्न हुई थी। इस चर्चा में राहुल गांधी समेत सत्ता पक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख सांसदों ने हिस्सा लिया था। चर्चा पूरी होने के बाद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सदन में अपनी बात रखी और विपक्षी सांसदों के सवालों व आपत्तियों का विस्तार से जवाब दिया था। हालांकि, गुरुवार को फिर से शुरू हुए हंगामे ने सदन की विधायी कार्यवाही को प्रभावित किया है। फिलहाल सरकार और विपक्ष के बीच वीडियो विवाद और विशेषाधिकार हनन प्रस्ताव को लेकर तनातनी चरम पर है।

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