OPERATION PRAHAR: ऋषिकेश के लक्ष्मणझूला क्षेत्र में पुलिस ने एक ऐसे संदिग्ध को दबोचा है जो पिछले कई वर्षों से साधु का वेश धारण कर अपनी असली पहचान छिपाकर रह रहा था। उत्तराखंड में मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर चलाए जा रहे OPERATION PRAHAR के तहत पौड़ी पुलिस और खुफिया इकाई (LIU) ने ये कार्रवाई की है।
साधु के वेश में ‘सत्यनिष्ठा आर्य’, असल में निकला बांग्लादेशी
लक्ष्मणझूला पुलिस और अभिसूचना इकाई की संयुक्त टीम OPERATION PRAHAR के तहत रामझूला क्षेत्र में संदिग्धों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान एक साधु वेशधारी व्यक्ति की गतिविधियां संदिग्ध लगीं। पूछताछ में आरोपी ने अपना असली नाम सनीउर रहमान (39 वर्ष) बताया, जो बांग्लादेश के फरीदपुर जिले का निवासी है।
आरोपी ‘सत्यनिष्ठा आर्य’ और ‘सत्यसाधू’ बनकर रह रहा था। जांच में खुलासा हुआ कि वह साल 2016 में नेपाल के रास्ते भारत में अवैध रूप से दाखिल हुआ था।
फर्जी दस्तावेज और पासपोर्ट बरामद
आरोपी ने भारत में अपनी जड़ें जमाने के लिए जाली दस्तावेजों का सहारा लिया था। आरोपी ने पहचान छिपाने के लिए ‘सत्यनिष्ठ आर्य’ नाम से भारतीय आधार कार्ड भी बनवा लिया था। पुलिस ने उसके पास से एक बांग्लादेशी पासपोर्ट (जिसकी वैधता 2018 में समाप्त हो चुकी थी), मोबाइल फोन और टैबलेट बरामद किया है। पहले वह पश्चिम बंगाल, दिल्ली और गाजियाबाद जैसे शहरों में भी रह चुका था।
पहचान छिपाने और अवैध रूप से भारत में रहने के आरोप में पुलिस ने आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और विदेशी अधिनियम-2025 की गंभीर धाराओं के तहत केस दर्ज किया है। पुलिस और खुफिया एजेंसियां अब इस बात की गहराई से जांच कर रही हैं कि आरोपी का नेटवर्क कहाँ-कहाँ फैला है और उसे फर्जी दस्तावेज बनवाने में किन लोगों ने मदद की।

जानिए OPERATION PRAHAR के बारे में और बढ़ाइए जानकारी
उत्तराखंड पुलिस का OPERATION PRAHAR एक विशेष अभियान है, जो राज्य में अपराध दर को कम करने, अपराधियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने और नशाखोरी को रोकने के लिए चलाया जा रहा है। यह मुख्य रूप से देहरादून, नैनीताल और अन्य जिलों में अपराधियों, तस्करों, और साइबर ठगों की गिरफ्तारी व अवैध गतिविधियों (जैसे स्पा सेंटर की अनियमितताएं) के खिलाफ कड़ी कार्रवाई कर रहा है।
उत्तराखंड में OPERATION PRAHAR के अलावा ‘ऑपरेशन कालनेमी’ भी चल रहा है। 10 जुलाई 2025 को शुरू हुआ यह अभियान न केवल फर्जी बाबाओं को बेनकाब कर रहा है, बल्कि अवैध रूप से रह रहे विदेशी नागरिकों और पहचान छिपाकर अपराध करने वालों के लिए काल साबित हो रहा है।
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रामायण के उस प्रसंग से प्रेरित होकर, जहाँ ‘कालनेमी’ राक्षस ने साधु का वेश धरकर हनुमान जी को छलने का प्रयास किया था, उत्तराखंड सरकार ने इस अभियान का नाम रखा। सरकार के अनुसार इसका उद्देश्य सनातन धर्म की गरिमा को सुरक्षित रखना और असली साधु-संतों के सम्मान की रक्षा करना।
अभियान का फोकस उन असामाजिक तत्वों पर है जो भगवा चोला ओढ़कर ठगी, महिलाओं का शोषण या अवैध घुसपैठ (जैसे बांग्लादेशी नागरिक) को अंजाम देते हैं।

अभियान की शुरुआत जुलाई 2025 में कांवड़ यात्रा से ठीक पहले की गई, जहां पहले ही 24 घंटे में 118 गिरफ्तारियां दर्ज की गईं और 13 जिलों में 2448 संदिग्धों की पहचान की गई। इसके बाद सितंबर से दिसंबर 2025 के बीच सत्यापन अभियान तेज किया गया और नेटवर्क का भंडाफोड़ हुआ, जिसमें 5500 से अधिक लोगों का सत्यापन किया गया और 511 लोगों को गिरफ्तार किया गया, जिनमें 19 बांग्लादेशी नागरिक भी शामिल थे।
जनवरी से मार्च 2026 के दौरान OPERATION PRAHAR और ऑपरेशन क्रैकडाउन के साथ समन्वय करते हुए कार्रवाई को और सख्त किया गया, जिसमें देहरादून के रायपुर क्षेत्र में उज्बेकिस्तान और किर्गिस्तान की महिलाओं को आधार और पैन कार्ड के साथ गिरफ्तार किया गया।
ताजा अपडेट के अनुसार अप्रैल 2026 में धार्मिक स्थलों पर सघन चेकिंग अभियान चलाया गया, जिसके तहत हरिद्वार, ऋषिकेश और रुड़की जैसे क्षेत्रों में लगातार सत्यापन के साथ सामूहिक गिरफ्तारियां भी की गईं।
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