मुकेश अंबानी के जू को क्यों दो बाघ दान दिये नैनीताल जू से?

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नैनीताल ब्यूरो- वन विभाग के अधिकारी अपनी किसी ने किसी कारनामों के कारण चर्चों का विषय बने रहते हैं। अब फिर सवाल खड़े हो रहे हैं कि जिस नैनीताल जू में खुद वन्य जीवों का संकट है वहां से दो बाघों को कैसे और क्यों मुकेश अंबानी के रेस्क्यू सेंटर और जू जामनगर को दान कर दिये गये। जहां पांच सालों से अधिकारी खुद वन्य जीवों की संख्या बढ़ाने की मांग कर रहे हैं उस जू को क्यों खाली किया गया।

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कई सालों से नैनीताल जू पर्यटकों के रोमांच का साधन बना हुआ है। यहां रोज सैकड़ों पर्यटक वन्य जीवों का दीदार करने यहां पहुंचे हैं। 1995 में 11 एकड़ भूमि में बने गोविंद बल्लभ पंत उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान को पर्यटकों के लिए खोल दिया गया था। यह समुद्रतल से 2100 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और जू को उत्तर भारत का एकमात्र हाई एल्टीट्यूट जू माना जाता है। कुछ समय पहले यहां 231 वन्यजीव हुआ करते थे। इन में कई वन्यजीव अपनी औसत आयु पूरा कर चुके हैं जिनमें कई जीवों की मौत भी हो चुकी है। लंबे समय से यहां वन्य जीवों की संख्या बढ़ाने के कवायत चल रही है। इस जू में स्नो लेपर्ड, ब्लू शीप, थार मंगाने के लिए पत्राचार चल रहा है। लेकिन यहां मोनाल के जोड़े के अलावा कुछ नहीं मिला।

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जू प्रबंधन पांच सालों से नये वन्य जीवों के कवायद में जुटा है। ऐसे में जहां खुद वन्य जीवों की कमी है वहां से कैसे दो बाघों को गुजरात भेजा गया। क्या बड़े उद्योगपति से नाम जुड़े होने के कारण ऐसा किया गया। सवाल यह भी खड़ा हो रहा है कि कोई सरकारी संस्था किसी निजी संस्था को वन्य जीव कैसे दान कर सकती है। सेंट्रल जू अथॉरिटी और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन ने इसके आदेश जारी किये हैं। किसी भी वन्यजीव को दाने देने या अथवा मांगने के लिए सेंट्रल जू अथॉरिटी और चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन की अनुमति जरूरी होती है। इस प्रक्रिया में लम्बा वक्त भी लगता है। लेकिन यहां तो कुछ ही माह में नैनीताल से दो बाघ शिखा और बेताल को गुजरात भेज दिया गया।

मुकेश अंबानी के जू को क्यों दो बाघ दान दिये नैनीताल जू से?