अचानक ₹5 लाख की जरूरत पड़ जाए, और पोर्टफोलियो में ₹10 लाख का म्यूचुअल फंड पड़ा हो — ज्यादातर लोग सीधे रिडीम कर देते हैं। पर इससे कंपाउंडिंग का फायदा टूट जाता है, और कैपिटल गेन्स टैक्स भी लगता है। Loan Against Mutual Funds इसी समस्या का जवाब है — फंड बेचे बिना, सिर्फ उन्हें गिरवी रखकर लोन लिया जा सकता है, वो भी यूनिट्स की ओनरशिप और डिविडेंड्स बरकरार रखते हुए।
हमने खुद यह गणित निकाला — अगर पोर्टफोलियो 15% CAGR पर बढ़ रहा हो, और ₹5 लाख की जरूरत के लिए रिडीम करने की बजाय 11% ब्याज पर LAMF लिया जाए, तो एक साल बाद LAMF वाला रास्ता करीब ₹20,000 ज्यादा फायदा देता है — वो भी बिना कैपिटल गेन्स टैक्स ट्रिगर किए।
Loan Against Mutual Funds: फरवरी 2026 का बड़ा बदलाव
फरवरी 2026 में RBI ने Loan Against Mutual Funds की LTV (Loan-to-Value) लिमिट में बड़ा बदलाव किया — इक्विटी फंड्स पर अब 75% तक LTV मिल सकता है, और डेट फंड्स पर 85% तक। पहले यह सीमा काफी कम थी, इसलिए यह अपडेट रिटेल निवेशकों के लिए पोर्टफोलियो की लिक्विडिटी काफी बढ़ा देता है। यानी ₹10 लाख के इक्विटी फंड पर, अब पहले से कहीं बड़ा लोन मिल सकता है।
Loan Against Mutual Funds: सीधे RTA से नहीं मिलता
यह सबसे कम समझी जाने वाली बात है। CAMS या KFintech जैसी RTAs (Registrar and Transfer Agencies) सीधे लोन नहीं देतीं — वे सिर्फ लियन मार्किंग (lien marking) की प्रोसेस को सुविधाजनक बनाती हैं। Loan Against Mutual Funds के लिए हमेशा किसी बैंक या NBFC के पास ही जाना पड़ता है, जो फिर RTA को लियन मार्क करने का रिक्वेस्ट भेजता है, OTP से अप्रूवल होता है, और उसके बाद लोन डिस्बर्स होता है।

Loan Against Mutual Funds: ब्याज दर और असली फायदा
जून 2026 के मुताबिक, इक्विटी फंड्स के लिए ब्याज दर 9-13% सालाना है, डेट फंड्स के लिए थोड़ी कम। तुलना के लिए — पर्सनल लोन की ब्याज दर आमतौर पर 12-24% के बीच रहती है। यानी अगर क्रेडिट प्रोफाइल अच्छा हो, तो Loan Against Mutual Funds पर्सनल लोन से काफी सस्ता पड़ता है। ELSS और लॉक-इन पीरियड वाले फंड्स गिरवी नहीं रखे जा सकते — यह एक जरूरी अपवाद याद रखना चाहिए।
Loan Against Mutual Funds: छुपे जोखिम भी समझें
अगर मार्केट गिरने से NAV तेजी से नीचे आए और LTV रेशियो तय लिमिट से ऊपर चला जाए, तो लेंडर अतिरिक्त यूनिट्स गिरवी रखने या पार्ट-पेमेंट करने के लिए कह सकता है — इसे “मार्जिन कॉल” कहा जाता है। इक्विटी-बैक्ड LAMF में यह जोखिम डेट फंड्स से ज्यादा होता है। साथ ही, गिरवी रखे यूनिट्स इमरजेंसी में भी रिडीम नहीं किए जा सकते, भले ही डिविडेंड मिलते रहें — इसलिए पूरा पोर्टफोलियो गिरवी न रखकर, कुछ हिस्सा लिक्विड रिजर्व के तौर पर रखना समझदारी है।
Loan Against Mutual Funds: पात्रता और प्रोसेस
न्यूनतम पोर्टफोलियो वैल्यू आमतौर पर ₹50,000 के आस-पास होनी चाहिए, उम्र 18-90 साल के बीच, और सैलरीड, सेल्फ-एम्प्लॉयड, NRI, HUF — सभी अप्लाई कर सकते हैं। ज्यादातर लेंडर्स कोई फिक्स क्रेडिट स्कोर नहीं मांगते, क्योंकि लोन म्यूचुअल फंड यूनिट्स से सिक्योर्ड होता है। कुछ डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर, PAN डालने के कुछ ही सेकंड में एलिजिबल लोन अमाउंट दिख जाता है, और लियन मार्किंग सिर्फ एक OTP से पूरी हो जाती है।
अगर आप म्यूचुअल फंड की बाकी बुनियादी बातें भी समझना चाहते हैं, तो Mutual Fund Basics वाला आर्टिकल जरूर पढ़ें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Loan Against Mutual Funds में फरवरी 2026 का बदलाव क्या है?
RBI ने LTV लिमिट बढ़ाई — इक्विटी फंड्स पर अब 75% तक, डेट फंड्स पर 85% तक लोन मिल सकता है।
2. क्या CAMS या KFintech सीधे लोन देते हैं?
नहीं, वे सिर्फ लियन मार्किंग की सुविधा देते हैं — लोन हमेशा किसी बैंक या NBFC से ही मिलता है।
3. Loan Against Mutual Funds की ब्याज दर कितनी है?
जून 2026 के मुताबिक, इक्विटी फंड्स पर 9-13%, डेट फंड्स पर थोड़ी कम — पर्सनल लोन (12-24%) से काफी सस्ता।
4. मार्जिन कॉल क्या है?
अगर NAV गिरने से LTV रेशियो तय लिमिट से ऊपर चला जाए, तो लेंडर अतिरिक्त यूनिट्स गिरवी रखने या पेमेंट करने के लिए कह सकता है।
5. क्या सभी म्यूचुअल फंड गिरवी रखे जा सकते हैं?
नहीं, ELSS और लॉक-इन पीरियड वाले फंड्स इसके लिए एलिजिबल नहीं होते।
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यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और यह कोई फाइनेंशियल सलाह नहीं है। ब्याज दरें और LTV लिमिट्स लेंडर और समय के हिसाब से बदल सकती हैं, इसलिए फैसला लेने से पहले संबंधित बैंक/NBFC की मौजूदा जानकारी जरूर चेक करें।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

