उस गांव की कहानी जहां से स्वर्ग गए थे पांडव

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Last Village of India
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क्या आपको पता है भारत का आखिरी गांव कौन सा है ? नहीं तो आज के इस आर्टीकल में हम आपको बताएंगे कि आखिर भारत का वो अंतिम गांव कौन सा है। इसका जवाब है माणा, यू तो भारत में ऐसे अनेक गांव हैं जिनसे कुछ  ना कुछ पौराणिक रहस्य जुड़े हुए हैं। ये गांव बद्रीनाथ से चार किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जो कि चीन की सीमा से लगा हुआ है।

इस गांव का रिश्ता महाभारत काल और भगवान गणेश से भी जुड़ा हुआ है। इसी गांव से होकर पांडव स्वर्ग गए थे।  माना जाता है कि मणिभद्र देव के नाम पर इस गांव का नाम माणा पड़ा था, पौराणिक मान्यताओं के अनुसार ये भारत का एकमात्र ऐसा गांव है जो धरती पर मौजूद चारों धामों में से सबसे ज्यादा पवित्र है। इस गांव को शापमुक्त और पापमुक्त भी माना जाता है।

इस गांव से जुड़ी एक मान्यता है कि यहां आने वाले हर व्यक्ति की गरीबी दूर जाती है। इस गांव को भगवान शिव का विशेष आशीर्वाद मिला है जो कोई भी इस गांव में आएगा उसकी गरीबी दूर हो जाएगी। ये एक वजह है कि यहां हर साल बड़ी संख्या में लोग घूमने के लिए आते हैं।

छह महीने तक ये क्षेत्र केवल बर्फ से ढ़का हुआ रहता है। यहां कड़ाके की सर्दी पड़ती है। यही वजह है कि सर्दियां शुरु होते ही यहां के लोग चमोली जिले के गांवों में अपना बसेरा करते हैं, आपको बता दें कि यहां मौजूद एक मात्र इंटर कॉलेज भी छह महीने माणा में और छह महीने चमोली में चलाया जाता है।

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हिमालय में बद्रीनाश के 3 किलोमीटर आगे समुद्रतल से 18000 फुट की ऊंचाई पर बसा है भारत का अंतिम गांव माणा. भारत तिब्बत सीमा से लगा यह गांव अपनी अनूठी परंपराओं के लिए खासा मशहूर है। यहां कईं प्रकार की जड़ी बूटियां भी पाई जाती है जैसे कि बालछड़ी जो कि बालों में रुसी खत्म करने और उन्हें स्वस्थ रखने में काम आती हैं। इसके अलावा खोया जिसकी पत्तियों से सब्जी बना कर खाने से पेट बिल्कुल साफ हो जाता है। यहां मिलने वाली पीपी की जड़ काफी प्रसिद्ध है, इसकी जड़ को पानी में उबाल कर पीने से भी पेट साफ हो जाता है और कब्ज की शिकायत नहीं रहती। माणा गांव की आबादी 400 के करीब है और यहां लगभग 60 घर हैं, ज्यादात्तर घर दो मंजिलों पर बने हुए है। छत पत्थर के पठालों की बनी होती है, इन घरों की खूबी ये है कि इस तरह के घर भूंकप के झटकों को आसानी से झेल लेते हैं, इन मकानों में ऊपर की मंजिल में लोग रहते हैं जबकि नीचे पशुओं को रखा जाता है, शराब के बाद चाय यहां के लोगों का प्रमुख पेय पदार्थ है।यहां चावल से शराब बनाने की छूट दे रखी है।

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यहां कई ऐतिहासिक दर्शनीय स्थल हैं, गांव से कुछ ऊपर चढ़ें तो पहले नजर आती है गणेश गुफा और उसके बाद आती है व्यास गुफा।व्यास गुफा के बारे में कहा जाता है कि यहीं पर वेदव्यास ने पुराणों की रचना की थी,और वेदों को चार भांगों में बांटा था.

इसके पास ही है भीमपुल, पांडव इसी मार्ग से अलकापुरी गए थे,माना जाता है कि जब पांडव इस मार्ग से गुजरे थे, तब वहां दो पहाड़ियों के बीच गहरी खाई थी, जिसे पार करना आसान नहीं था, तब कुंतीपुत्र भीम ने एक भारी भरकम चट्टान उठाकर फेंकी और खाई को पाटकर पुल के रुप में परिवर्तित कर दिया,

इससे उपर बढ़ों तो पांच किलोमीटर पैदल सफर तय कर पर्यटक पहुंचते हैं वसुधारा, ऐसा माना जाता है कि इस पानी कू बूंदें पापियों के तन पर नहीं पड़ती,माणा में ही भारत तिब्बत सीमा सुरक्षा बल का बेस भी है।

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