करवा चौथ व्रत : जानें कथा, तारीख, पूजा मुहूर्त और विधि

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करवा चौथ व्रत
करवा चौथ व्रत
एक साहूकार के सात 
लड़के और एक लड़की थी, 
एक बार कार्तिक मास की 
कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि 
को सेठानी सहित उसकी 
सातों बहुएं और उसकी बेटी 
ने भी करवा चौथ का व्रत रखा।

करवा चौथ व्रत

महिलाएं करवा चौथ का व्रत अपने पति की लंबी आयु के लिए रखती हैं। इस दिन महिलाएं पूरे चांद को देखने के बाद ही व्रत को खोलती हैं। इस बार करवा चौथ का व्रत 13 अक्टूबर यानी गुरुवार को रखा जाएगा। साथ ही इस दिन कुंवारी लड़कियां भी अच्छे वर के लिए ये व्रत रखती हैं।

करवा चौथ व्रत
करवा चौथ व्रत

करवा चौथ पूजन विधि

इस व्रत में सुबह सूर्योदय से पहले उठा जाता है फिर स्नान करके पूजा घर की सफाई की जाती है, फिर सास द्वारा दिया गया भोजन किया जाता है और पूजा करने के बाद निर्जला व्रत का संकल्प लिया जाता है। यह व्रत सूर्य के अस्त होने के बाद चांद के दर्शन करने के बाद ही खोला जाता है। और इस व्रत में पानी नहीं पिया जाता है।

करवा चौथ व्रत कथा

करवा चौथ व्रत
करवा चौथ व्रत

एक साहूकार के सात लड़के और एक लड़की थी, एक बार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को सेठानी सहित उसकी सातों बहुएं और उसकी बेटी ने भी करवा चौथ का व्रत रखा। रात्रि के समय जब साहूकार के सभी लड़के भोजन करने बैठे तो उन्होंने अपनी बहन से भी भोजन करने को कहा। इस पर बहन ने भाई से कहा कि अभी चांद नहीं निकला है। चांद के निकलने के बाद ही अर्घ्य देकर ही मैं आज भोजन करूंगी।

साहूकार का बेटा अपनी बहन से बहुत प्यार करता था उन्हें अपनी बहन का भूख से व्याकुल चेहरा देख बेदह दुख हुआ।  साहूकार के बेटे नगर के बाहर चले गए और वहां एक पेड़ पर चढ़ कर अग्नि जला दी। घर वापस आकर उन्होंने अपनी बहन से कहा कि देखों बहन चांद निकल आया है।

अब तुम उन्हें अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो। साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों से कहा देखों चांद निकल आया है तुम लोग भी भोजन अर्घ्य देकर भोजन ग्रहण करो।ननद की बात सुनकर भाभियों ने कहा कि बहन अभी चांद नहीं निकला है, तुम्हारे भाई धोखे से अग्नि जलाकर उसके प्रकाश को चांद के रुप में तुम्हें दिखा रहे हैं।

करवा चौथ व्रत
करवा चौथ व्रत

साहूकार की बेटी ने अपनी भाभियों की बात को अनसुनी करते हुए भाइयों द्वारा दिखाए गए चांद को अर्घ्य देकर भोजन कर लिया। इस प्रकार करवा चौथ का व्रत भंग करने के कारण भगवान श्री गणेश साहूकार की लड़की पर अप्रसन्न हो गए। गणेश जी की अप्रसन्नता के  कारण लड़की का पति बीमार पड़ गया और घर में बचा हुआ सारा धन बीमारी में लग गया।

साहूकार की बेटी को जब अपने किए हुए दोषों का पता लगा तो उसे बहुत पश्चाताप हुआ उसने गणेश जी से क्षमा प्रार्थना की औऱ फिर से विधि विधान के साथ चतुर्थी का व्रत शुरू किया। उसने उपस्थित सभी लोगों का श्रद्धानुसार आदर किया और उसके बाद आशीर्वाद ग्रहण किया।

इस प्रकार लड़की की श्रद्धा भक्ति को देखकर भगवान गणेश जी उसपर प्रसन्न हुए और उसके पति को जीवनप्रदान किया। साथ ही उसे सभी प्रकार के रोगों से मुक्त करके धन संपत्ति और वैभव से युक्त कर दिया।

करवा चौथ व्रत
करवा चौथ व्रत

करवा चौथ व्रत का शुभ मुहूर्त

अमृत काल मुहूर्त- शाम 04 बजकर 08 मिनट से लेकर शाम 05 बजकर 5 0 मिनट तक

अभिजीत मुहूर्त- सुबह 11 बजकर 21 मिनट से लेकर दोपहर 12 बजकर 07 मिनट तक

बह्रा मुहूर्त- शाम 04 बजकर 17 मिनट से लेकर अगले दिन 05 बजकर 06 मिनट तक

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