इस मंदिर में क्यों है पुरुषों की एंट्री पर बैन?

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Kamakhya Devi Mandir
Kamakhya Devi Mandir

Kamakhya Devi Mandir के रहस्य

भारत, देश विदेश में अपनी संस्कृति, सभ्यता और मंदिरों को लेकर काफी प्रसिद्ध है। अलग अलग मंदिरों की अलग कहानियां है और मान्यता है जहां हर व्यक्ति को जाने की अनुमति है लेकिन हमारे देश में एक ऐसा भी मंदिर हैं जहां परुषों की एंट्री पर बैन है, यानी की कोई भी पुरष इस मंदिर में प्रवेश नहीं कर सकता। मगर इसके पीछे की क्या वजह है आज ये जानेंगे।

माता सती के 51 शक्तिपीठों में से कामाख्या मंदिर सर्वोत्तम माना जाता है। यहां प्रसाद के रूप में आपको माता के मासिक धर्म में भीगा हुआ लाल कपड़ा दिया जाता है। यहां किसी माता की मूर्ती नहीं है बल्कि एक कुंड है जो हमेशा फूलों से ढका रहता है और साथ ही इस कुंड से जल निकलता रहता है।  

असम के पश्चिम गुवाहाटी में नीलाचल पहाड़ियों पर स्थित कामाख्या मंदिर देवी सती का मंदिर है। जब माता सती के पिता ने यज्ञ के दौरान भगवान शिव का अपमान किया था तो ये देख माता सती यज्ञ में ही कूद गईं जिसके बाद क्रोधित भगवान शिव देवी सती को लेकर पूरे ब्रह्माण में तांडव करने लगे जिसके बाद श्री कृष्ण ने अपने सुदर्शन चक्र से देवी सती के देह के कई टुकड़े कर दिए। जिस जगह पर आज कामाख्या देवी का मंदिर है उस जगह पर माता सती की योनी गिरी थी जिसके बाद से यहां माता सती की योनी की पूजा होने लगी।

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आपको बता दें कि यहां माता (Kamakhya Devi) को साल में एक बार मासिक धर्म आते हैं और वो महीना होता है जून का। इस दौरान मंदिर में पुरुषों की एंट्री पर बैन लग जाता है यानी की माता (Kamakhya Devi) के मासिक धर्म के दौरान यहां पुजारी भी पुरुष नहीं होते। इस समय पर यहां महिला पुजारी ही पूजा करती हैं।

कहा जाता है कि इस दौरान मंदिर की शक्तियां कई गुना बढ़ जाती हैं। इन तीन दिनों में ब्रह्मपुत्र नदी का पानी भी लाल रंग का हो जाता है और इस पानी को यहां के लोग प्रसाद के रूप में ग्रहण करते हैं। माता (Kamakhya Devi) के मासिक धर्म के दौरान ही मंदिर में सफेद रंग का कपड़ा बिछा दिया जाता है और फिर 3 दिन बाद ये कपड़ा लाल रंग से रंगा होता है जो कि लोगों के बीच प्रसाद के रूप में बांटा जाता है। माता (Kamakhya Devi) के मासिक धर्म से रंगे इस कपड़े को काफी पवित्र माना जाता है और श्रद्धालु इस कपड़े को अपने घरों में रखते हैं।

माता (Kamakhya Devi) के मासिक धर्म के दौरान मंदिर में उत्सव मनाया जाता है और मेला आयोजित किया जाता है जिसमें देश विदेश से कई लोग शामिल होते हैं। इस मेले को अम्बुवाची मेला कहा जाता है जिसे एक धार्मिक और आध्यात्मिक कार्निवल के रूप में भी देखा जाता है। इस दौरान यहां रोज लाखों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

कामाख्या देवी (Kamakhya Devi) का मंदिर तांत्रिक सिद्धि के लिए भी काफी प्रसिद्ध है। जिस दौरान माता को मासिक धर्म होते हैं उस दौरान यहां पूरे देश से तांत्रिक अनुष्ठान करने आते हैं और तांत्रिक विद्या में सिद्धि पाते हैं और अगर कोई इंसान काले जादू से प्रभावित है तो वो कामाख्या देवी के मंदिर पर आकर इससे निजात पा सकते हैं।

तीन दिन तक इस मंदिर के कपाट बंद होते हैं और जब तीन दिन बाद मंदिर के कपाट खोले जाते हैं तो यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। ऐसा कहा जाता है कि इस मंदिर में हर किसी की मनोकामना पूरी होती है और यहां से कोई भी व्यक्ति कभी खाली हाथ नहीं लौटता है।

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