प्रलय का संकेत! क्या जल्द मिट्टी में मिल जाएगा जोशीमठ?

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Joshimath Sinking Reason: क्यों धंस रहा है जोशीमठ, क्या इसके पीछे है कोई धार्मिक कारण?

Joshimath Sinking Reason: जोशीमठ जिसकी स्थापना एक पवित्र धार्मिक स्थल के रूप में हुई थी उसके ऊपर आज संकट के बादल मंडरा रहे हैं। इन दिनों जोशीमठ के कई इलाकों में जमीन धंस (Joshimath Sinking Reason) रही है इसके पीछे कई वैज्ञानिक कारण है तो वहीं कई धार्मिक कारण। आज हम जोशीमठ के धंसने (Joshimath Sinking Reason) के पीछे के धार्मिक कारणों पर बात करेंगे।

यह पवित्र धार्मिक स्थल हिंदुओं की आस्था का केंद्र है जहां भगवान नृसिंह का मंदिर भी स्थित है। इस मंदिर में शीतकाल में भगवान बदरीनाथ विराजते हैं और इस दौरान बद्री विशाल के भक्त उनके दर्शन करने के लिए इसी मंदिर में आते हैं और पूजा पाठ करते हैं।

ऐसा कहा जाता है कि मंदिर में विराजमान नृसिंह देवता का एक हाथ धीरे धीरे पतला होता जा रहा है और जिस दिन ये हाथ पतला होकर नीचे गिर जाएगा उस दिन नर और नारायण पर्वत एक दूसरे से मिल जाएंगे, जिसके बाद बद्रीनाथ धाम जाने का रस्ता हमेशा हमेशा के लिए बंद हो जाएगा और इसके बाद भक्त बद्री विशाल के दर्शन भविष्य बद्री में करेंगे जो जोशीमठ के तपोवन में स्थित है।

आपको बता दें कि जोशीमठ में धंस (Joshimath Sinking Reason) रही जमीन को अब इस मंदिर से भी जोड़ा जा रहा है। ऐसा कहा जाता है कि जिस दिन मंदिर में विराजमान नृसिंह देवता की भुजा टूटकर गिर जाएगी उस दिन पृथ्वी में प्रलय (Joshimath Sinking Reason) आ जाएगा और जोशीमठ में मच रही तबाही (Joshimath Sinking Reason) को देखते हुए लोगों की ऐसी मान्यता है कि प्रलय आने का पहला चरण शुरू हो चुका है।

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नृसिंह मंदिर की स्थापना की बात की जाए तो इसे लेकर कई कहानियां प्रचलित हैं। एक मत कहता है कि इस मंदिर की स्थापना आदिगुरु शंकराचार्य द्वारा की गई थी। ऐसा माना जाता है कि आदिगुरु शंकराचार्य ने इस मंदिर की स्थापना इसलिए की थी क्योंकि नृसिंह देवता उनके इष्टदेव थे। आपको बता दें कि इस मंदिर में आदिगुरु शंकराचार्य की गद्दी भी मौजूद है।

वहीं दूसरे मत की बात करें तो इसका निर्माण 8वीं सदी में कश्मीर के राजा ललितादित्य मुक्तापीड द्वारा करवाया गया था। इसके साथ ही यह भी कहा जाता है कि इस मंदिर की नींव पांडवों द्वारा रखी गई थी और कुछ लोगों का कहना है कि नृसिंह देवता की मूर्ती अपने आप ही इस जगह पर प्रकट हो गई थी।

अब आते हैं कि आखिर कैसे मंदिर में मौजूद नृसिंह देवता की मूर्ती का हाथ अपने आप ही हर साल पतला (Joshimath Sinking Reason) होता जा रहा है। दरअसल इसको लेकर एक कहानी काफी प्रचलित है और वो यह है कि जोशीमठ के एक राजा हुआ करते थे जिनका नाम था वासुदेव।

एक बार राजा वासुदेव शिकार के लिए जंगल गए और इस दौरान उनके महल में नृसिंह देवता पधारे और उन्होंने महारानी से भोजन मांगा। महारानी ने भगवान नृसिंह को भोजन कराया और भोजन कराने के बाद उन्होंने नृसिंह देवता को राजा के बिस्तर में आराम करने के लिए कहा।

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अब भगवान नृसिंह राजा के बिस्तर पर आराम कर रहे थे और इसी दौरान राजा जंगल से वापिस आ गए और उन्होंने देखा कि उनके बिस्तर पर कोई पुरुष सो रहा है। ये दृश्य देख राजा वासुदेव अत्यंत क्रोधित हो उठे और उन्होंने नृसिंह देवता के हाथ पर अपनी तलवार से वार कर दिया जिसके बाद उनके हाथ से खून के बजाय दूध बहने लगा।

इस वाक्य के तुरंत बाद नरसिंह देवता अपने असली अवतार में आ गए और ये देख राजा को अपनी गलती का एहसास हुआ और वह तुरंत नृसिंह देवता से माफी मांगने लगे जिसके बाद नृसिंह देवता ने उनसे कहा कि तुमने गलती तो की है जिसका तुम्हे अंजाम भी भुगतना पड़ेगा।

नृसिंह देवता ने राजा से कहा कि तुम अपने परिवार के साथ इस जगह को छोड़कर हमेशा हमेशा के लिए कत्यूर में जाकर बस जाओ और तुम्हारे इस प्रहार के कारण मंदिर में मौजूद मेरी मूर्ति के इसी हाथ पर इसका प्रभाव दिखाई देगा। प्रत्येक वर्ष मेरी मूर्ति का ये हाथ पतला होता जाएगा और जिस दिन ये हाथ टूटकर गिर जाएगा उस दिन राजवंश का अंत हो जाएगा।   

आपको बता दें कि नृसिंह देवता की मूर्ति शालीग्राम पत्थर से बनी है और ये करीबन 10 इंच लंबी है। मंदिर में नृसिंह देवता की मूर्ति कमल पर विराजमान है। वहीं मंदिर में बद्रीनारायण, उद्धव, भगवान राम, माता सीता, बजरंगबली, माता कालिका की प्रतिमा, कुबेर और गरुड़ की मूर्तियां स्थापित है। अब जिस प्रकार जोशीमठ में लगातार भू- धंसाव (Joshimath Sinking Reason) हो रहा है उससे ये कयास लगाया जा रहा है कि शायद इसके पीछे का कारण नृसिंह देवता का लगातार हो रहा पतला हाथ ही है।

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