Jaspal Rana Dies: भारतीय निशानेबाजी की दुनिया के लिए 12 जून 2026 का दिन बेहद दुखद रहा। देश के महान निशानेबाज और कोच जसपाल राणा (Jaspal Rana Dies) का शुक्रवार की सुबह दिल्ली के मैक्स अस्पताल, साकेत में निधन हो गया। वे सिर्फ 49 साल के थे। उनकी मौत से पूरे खेल जगत में शोक की लहर दौड़ गई। जसपाल राणा जर्मनी के म्यूनिख में आयोजित ISSF वर्ल्ड कप में भारतीय दल के साथ कोच की भूमिका में गए थे। वापसी के दौरान फ्लाइट में ही उनकी तबीयत बिगड़ने लगी।
बताया जा रहा है कि म्यूनिख में रहते हुए उन्हें सीने में तकलीफ महसूस हुई थी, लेकिन उन्होंने इसे एसिडिटी समझकर नजरअंदाज कर दिया। जब दिल्ली वापस आने पर हालत ज्यादा गंभीर हो गई तो उन्हें तुरंत साकेत के मैक्स अस्पताल में भर्ती कराया गया। वहां उनके दिल में एक ब्लॉकेज मिली, जिसके इलाज के लिए स्टेंट लगाया गया। एक और प्रक्रिया की तैयारी भी हो रही थी, लेकिन इससे पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया।
नेशनल राइफल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (NRAI) के अध्यक्ष कलिकेश नारायण सिंह देव ने उनके निधन की आधिकारिक पुष्टि की।
Jaspal Rana Dies: उत्तराखंड की धरती से उठा था यह सितारा
जसपाल राणा (Jaspal Rana Dies) का जन्म 28 जून 1976 को उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक गढ़वाली परिवार में हुआ था। उनके पिता नारायण सिंह राणा 1971 के युद्ध के वेटरन थे और इंडो-तिब्बतन बॉर्डर पुलिस में अपनी सेवाएं दे चुके थे। बाद में वे उत्तराखंड के पहले खेल मंत्री भी बने। खुद नारायण सिंह राणा को निशानेबाजी का शौक था और उन्होंने ही जसपाल को इस खेल की दुनिया से परिचित कराया। बचपन से ही जसपाल राणा (Jaspal Rana Dies) ने अपनी पिस्टल शूटिंग में ऐसी प्रतिभा दिखाई कि देखने वाले दंग रह जाते थे। महज किशोर उम्र में उन्होंने अंतरराष्ट्रीय मुकाबलों में हिस्सा लेना शुरू कर दिया और जल्द ही वे देश का गर्व बन गए।
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Jaspal Rana Dies: 15 मेडल, 4 एशियाई खेल स्वर्ण, एक अविश्वसनीय करियर
जसपाल राणा (Jaspal Rana Dies) का खिलाड़ी के रूप में करियर ऐसा था जो शायद ही कोई दोहरा सके। वे भारत के अब तक के सबसे सफल कॉमनवेल्थ गेम्स खिलाड़ी रहे। 1994, 1998, 2002 और 2006 के कॉमनवेल्थ खेलों में उन्होंने कुल 15 मेडल जीते, जिनमें 9 सोने, 4 चांदी और 2 कांसे के तमगे शामिल हैं। यह रिकॉर्ड आज भी कायम है और कोई भारतीय एथलीट इसे नहीं तोड़ पाया। एशियाई खेलों में भी उनका जलवा कम नहीं था।
उन्होंने 4 स्वर्ण और 1 रजत पदक जीते। 1994 के हिरोशिमा एशियाई खेलों में उन्होंने पहला गोल्ड जीता। 2006 के दोहा एशियाई खेल तो उनके लिए यादगार रहे, जब उन्होंने अकेले तीन स्वर्ण पदक अपने नाम किए और 25 मीटर सेंटर फायर पिस्टल स्पर्धा में 590 के स्कोर के साथ विश्व रिकॉर्ड की बराबरी भी की। 1994 में उन्हें अर्जुन अवॉर्ड और 1997 में पद्मश्री से नवाजा गया। देश के सर्वोच्च खेल सम्मानों से उनका दामन भरा हुआ था।
Jaspal Rana Dies: कोच बनकर भी रोशन किया भारत का नाम
खिलाड़ी के रूप में संन्यास के बाद जसपाल राणा (Jaspal Rana Dies) ने कोचिंग की दुनिया में कदम रखा और यहां भी उन्होंने इतिहास लिखा। उनकी सबसे बड़ी उपलब्धि रही, मनु भाकर को तैयार करना। 2024 के पेरिस ओलंपिक में मनु भाकर ने दो कांस्य पदक जीते और ऐसा करने वाली वे स्वतंत्र भारत की पहली एथलीट बनीं। इस ऐतिहासिक जीत के पीछे जसपाल राणा की मेहनत, रणनीति और मार्गदर्शन का बहुत बड़ा हाथ था।
इसके अलावा उन्होंने सौरभ चौधरी जैसे युवा निशानेबाज को भी तराशा, जो आगे चलकर एशियाई खेलों के स्वर्ण पदक विजेता बने। उनके मार्गदर्शन में जूनियर टीम के कई खिलाड़ियों ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपना लोहा मनवाया।
साल 2020 में उन्हें द्रोणाचार्य पुरस्कार से सम्मानित किया गया, यह भारत में कोच को दिया जाने वाला सबसे बड़ा सम्मान है। वे हाल तक भारतीय पिस्टल शूटिंग के हाई-परफॉर्मेंस कोच के रूप में काम कर रहे थे।
2025 में उन्हें उत्तराखंड गौरव सम्मान भी मिला था।
Jaspal Rana Dies: खेल जगत में शोक की लहर
जसपाल राणा के निधन की खबर आते ही देश भर से श्रद्धांजलियों का तांता लग गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई बड़े नेताओं और खेल हस्तियों ने दुख व्यक्त किया। खेल जगत के लोगों ने सोशल मीडिया पर भावभीनी श्रद्धांजलियां दीं। मैक्स अस्पताल ने भी आधिकारिक बयान जारी कर कहा कि “ओलंपिक की दोहरी पदक विजेता मनु भाकर के निशानेबाज और कोच जसपाल राणा का इस सुबह मैक्स साकेत अस्पताल में निधन हो गया।”
Jaspal Rana Dies: भारतीय निशानेबाजी को अपूरणीय क्षति
जसपाल राणा का जाना सिर्फ एक इंसान का जाना नहीं है, यह एक पूरे युग का खत्म होना है। 30 से ज्यादा साल तक वे भारतीय निशानेबाजी के आधार स्तंभ रहे। पहले एक खिलाड़ी के रूप में, फिर एक गुरु के रूप में, उन्होंने इस खेल को वह ऊंचाई दी जो पहले किसी ने नहीं दी थी।
उनके जाने के बाद भारतीय निशानेबाजी में एक ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे भर पाना आसान नहीं होगा। लेकिन मनु भाकर का ओलंपिक पदक, सौरभ चौधरी की उड़ान और देश के तमाम युवा निशानेबाजों की सफलता, यही जसपाल राणा की असली विरासत है। उनकी आत्मा को शांति मिले।
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