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रेस कोर्स की 40 एकड़ जमीन पर विवाद: पूर्व वायुसेना प्रमुख एपी सिंह ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को लिखा पत्र, IAF के नियंत्रण में रखने की अपील

नई दिल्ली में प्रधानमंत्री आवास के नजदीक स्थित रेस कोर्स एयरफोर्स स्टेशन की जमीन को लेकर विवाद गहराता जा रहा है। भारतीय वायुसेना के पूर्व प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने अपने कार्यकाल के अंतिम दिनों में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह को पत्र लिखकर इस जमीन को IAF नियंत्रण  बनाए रखने की अपील की थी। उन्होंने सरकार से इस जमीन के हस्तांतरण के फैसले पर दोबारा विचार करने का आग्रह किया।

मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, यह पत्र 26 अक्टूबर 2026 को लिखा गया था। इसके तीन दिन बाद यानी 29 अक्टूबर को एपी सिंह ने रक्षा मंत्री से व्यक्तिगत मुलाकात करके भी इस मुद्दे को उठाया था। गौरतलब है कि एपी सिंह 31 अक्टूबर को वायुसेना प्रमुख के पद से सेवानिवृत्त हो गए।

40 एकड़ से अधिक जमीन पर सरकार की नजर

विवाद का केंद्र रेस कोर्स एयरफोर्स स्टेशन के भीतर स्थित एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स है। यह परिसर 40 एकड़ से अधिक जमीन में फैला हुआ है। इसमें गोल्फ कोर्स, स्विमिंग पूल और अन्य खेल एवं मनोरंजन संबंधी सुविधाएं मौजूद हैं।

केंद्रीय आवास एवं शहरी कार्य मंत्रालय (MoHUA) के अधिकारियों ने इस परिसर को अपने कब्जे में लेने की प्रक्रिया के तहत सील कर दिया। इसके बाद रक्षा क्षेत्र में चिंता बढ़ गई। संबंधित अधिकारियों ने परिसर के प्रबंधन को जमीन खाली करने और उसे वापस सौंपने के लिए नोटिस भी जारी किए।

एपी सिंह ने अपने पत्र में स्पष्ट किया कि यह जमीन केवल खेल सुविधाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि रेस कोर्स एयरफोर्स स्टेशन की समग्र कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इसलिए इसे वायुसेना के नियंत्रण से बाहर करना उचित नहीं होगा।

2014 के संयुक्त सर्वे का दिया हवालाIAF

एपी सिंह ने रक्षा मंत्री को लिखे पत्र में वर्ष 2014 में किए गए संयुक्त सर्वेक्षण का भी उल्लेख किया। यह सर्वे तत्कालीन शहरी विकास मंत्रालय, रक्षा संपदा विभाग और भारतीय वायुसेना के अधिकारियों ने मिलकर किया था।

उन्होंने इस सर्वेक्षण और जमीन से जुड़े ऐतिहासिक तथ्यों का हवाला देते हुए कहा कि परिसर की स्थिति और उसके उपयोग को ध्यान में रखते हुए जमीन को वायुसेना के पास ही रहने देना चाहिए।

उनका तर्क था कि एयरफोर्स स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स स्टेशन की मौजूदा व्यवस्था का अभिन्न हिस्सा है। ऐसे में जमीन का हस्तांतरण करने से पहले उसके प्रशासनिक और परिचालन संबंधी प्रभावों का गंभीरता से आकलन किया जाना आवश्यक है।

राष्ट्रीय सुरक्षा के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है स्टेशन

इस पूरे विवाद में सबसे महत्वपूर्ण पहलू राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ा हुआ है। वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय को बताया है कि रेस कोर्स एयरफोर्स स्टेशन दिल्ली के अत्यंत संवेदनशील और हाई-सिक्योरिटी क्षेत्र में स्थित है।

यह स्टेशन प्रधानमंत्री आवास के आसपास हवाई सुरक्षा से संबंधित जिम्मेदारियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। रिपोर्टों के अनुसार, यहां तैनात व्यवस्था संभावित हवाई खतरों और अनमैन्ड एरियल सिस्टम (UAS) यानी ड्रोन जैसी चुनौतियों से निपटने में भी उपयोगी है।

दिल्ली इंटीग्रेटेड एयर डिफेंस सेंटर (DIADC) के साथ समन्वय में विभिन्न गतिविधियों के दौरान हवाई सुरक्षा सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी भी इस स्टेशन से जुड़ी बताई गई है।

इसी कारण वायुसेना का मानना है कि जमीन के हस्तांतरण का निर्णय केवल भूमि प्रबंधन के नजरिये से नहीं, बल्कि सुरक्षा और परिचालन आवश्यकताओं को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए।

खेल परिसर सील होने से बढ़ी नाराजगी

स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स को सील किए जाने के बाद वायुसेना के भीतर असंतोष की स्थिति पैदा हुई। रिपोर्टों के मुताबिक, इस घटनाक्रम के कारण सेवानिवृत्त हो रहे एयर चीफ मार्शल एपी सिंह के सम्मान में आयोजित होने वाला प्रस्तावित विदाई कार्यक्रम भी रद्द करना पड़ा।

वायुसेना ने रक्षा मंत्रालय के सामने अपनी आपत्तियां रखीं और सीलिंग की प्रक्रिया रद्द करने की मांग की। उसका आग्रह है कि परिसर की सभी सुविधाओं को पहले की तरह संचालित होने दिया जाए।

सरकारी स्तर पर जमीन वापस लेने की व्यापक कार्रवाई

रेस कोर्स एयरफोर्स स्टेशन का मामला सरकार की उस व्यापक कार्रवाई से भी जुड़ा है, जिसके तहत दिल्ली में कई महत्वपूर्ण स्थानों की जमीन वापस लेने की प्रक्रिया चल रही है।

इससे पहले अगस्त 2026 में लोक कल्याण मार्ग स्थित दिल्ली रेस क्लब की लगभग 53 एकड़ जमीन खाली कराई गई थी। इसके अलावा जयपुर पोलो ग्राउंड की जमीन भी इंडिया पोलो एसोसिएशन से वापस ली गई।

सरकार की ओर से इन कार्रवाइयों के पीछे सार्वजनिक उद्देश्य, बेहतर भूमि प्रबंधन और बुनियादी ढांचे से जुड़ी जरूरतों का हवाला दिया गया है।

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अब रक्षा मंत्रालय के फैसले पर टिकी नजरें

फिलहाल इस पूरे मामले पर भारतीय वायुसेना और रक्षा मंत्रालय की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। ऐसे में यह स्पष्ट नहीं है कि एपी सिंह की अपील पर सरकार क्या निर्णय लेगी।

हालांकि, पूर्व वायुसेना प्रमुख का अपने सेवानिवृत्त होने से ठीक पहले यह मुद्दा उठाना बताता है कि वायुसेना इस जमीन को अपने परिचालन ढांचे के लिए महत्वपूर्ण मानती है।

अब सबसे बड़ा सवाल यही है कि सरकार भूमि प्रबंधन और सार्वजनिक उपयोग की अपनी नीति के बीच राष्ट्रीय सुरक्षा तथा वायुसेना की परिचालन जरूरतों को किस तरह संतुलित करती है। रेस कोर्स की 40 एकड़ से अधिक जमीन का भविष्य इसी निर्णय पर निर्भर करेगा।

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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