HUMAN CENTRED AI INDIA: नई दिल्ली स्थित सीएसआईआर-राष्ट्रीय विज्ञान संचार और नीति अनुसंधान संस्थान (CSIR-NIScPR) ने ‘इंडिया-एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ के आधिकारिक प्री-सममिट इवेंट के रूप में एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी का आयोजन किया। पूसा स्थित संस्थान के विवेकानंद हॉल में आयोजित इस संगोष्ठी का विषय “मानव-केंद्रित एआई और सतत विकास: ऊर्जा सुरक्षा के लिए समग्र मार्ग” रखा गया था। दिन भर चले इस कार्यक्रम में भारत और विदेशों के प्रमुख विशेषज्ञों ने हिस्सा लिया और एआई के माध्यम से एक सुरक्षित और समावेशी ऊर्जा भविष्य बनाने पर चर्चा की।

HUMAN CENTRED AI INDIA: एआई नीतियों के लिए एक विश्वसनीय ढांचे की आवश्यकता
संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र में सीएसआईआर-निसप्र (CSIR-NIScPR) की निदेशक डॉ. गीता वाणी रैयासम ने एआई प्रौद्योगिकियों के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद ढांचे के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने बताया कि इसी महीने सरकार द्वारा ‘इंडिया एआई इम्पैक्ट समिट 2026’ का आयोजन किया जाएगा, और यह संगोष्ठी उसी बड़े सम्मेलन की पूर्व तैयारी का हिस्सा है। डॉ. रैयासम ने कहा कि इस संगोष्ठी का उद्देश्य व्यापक परामर्श के माध्यम से ऐसे ठोस विचार और समाधान प्रस्तुत करना है, जो सरकार को ऊर्जा सुरक्षा और सतत विकास के लिए मानव-केंद्रित एआई ढांचे तैयार करने में मदद कर सकें।

भारत-रूस सहयोग और सामाजिक समावेशिता
रशियन एकेडमी ऑफ साइंसेज की निदेशक डॉ. नादिया आशेउलोवा ने भारतीय दार्शनिक परंपरा की प्रशंसा करते हुए कहा कि भारत हमेशा से चेतना और बुद्धिमत्ता के विभिन्न रूपों के प्रति खुला रहा है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारत और रूस दोनों ही नवीकरणीय ऊर्जा की ओर बढ़ने में सामाजिक और संस्थागत चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उनके अनुसार, एआई का असली कार्य केवल शक्तिशाली सिस्टम बनाना नहीं, बल्कि बौद्धिक भागीदारी का लोकतंत्रीकरण करना होना चाहिए।

तकनीकी सत्रों में नैतिकता और ऊर्जा सुरक्षा पर मंथन
संगोष्ठी के विभिन्न तकनीकी सत्रों में विशेषज्ञों ने एआई की निष्पक्षता, अखंडता और समावेशिता पर अपने विचार रखे। जेएनयू (JNU) के प्रो. अनिर्बान चक्रवर्ती और उजबेकिस्तान के प्रो. आंद्रे वी. रेजाएव की अध्यक्षता में हुए सत्रों में एआई से जुड़े नैतिक दुविधाओं और प्रणालीगत जोखिमों पर चर्चा हुई। डॉ. विपन कुमार ने ऊर्जा सुरक्षा के लिए विश्वसनीय डेटा पारिस्थितिकी तंत्र की आवश्यकता बताई, जबकि साइंस यूरोप की डॉ. लिडिया बोरेल ने अंतरराष्ट्रीय सहयोग और ‘ओपन साइंस’ पर जोर दिया।

संगोष्ठी के अंतिम चरण में एक उच्च स्तरीय पैनल चर्चा आयोजित की गई, जिसकी अध्यक्षता डॉ. अखिलेश गुप्ता ने की। इसमें नीति, प्रौद्योगिकी और अंतरराष्ट्रीय सहयोग के माध्यम से एआई को ऊर्जा प्रणालियों में एकीकृत करने की संभावनाओं पर चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने निष्कर्ष निकाला कि एक मजबूत अनुसंधान पारिस्थितिकी तंत्र और स्पष्ट नीतियों के समर्थन से एआई-संचालित समाधान भविष्य की सुरक्षित और टिकाऊ ऊर्जा व्यवस्था को आकार देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।

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