HEAVY RAIN IN UTTARAKHAND: उत्तराखंड में आगामी 18 जुलाई से 22 जुलाई 2025 तक भारी बारिश, आकाशीय बिजली और तेज़ हवाओं का असर देखने को मिल सकता है। भारत मौसम विभाग (IMD) देहरादून केंद्र ने राज्य के कई जिलों के लिए यलो, ऑरेंज और रेड अलर्ट जारी किया है। विभाग ने स्थानीय प्रशासन व आम जनता को सतर्क रहने की अपील की है। बारिश के साथ तेज़ गर्जना, बिजली गिरने और 30-40 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से तेज़ हवाएं चलने की संभावना जताई गई है।

HEAVY RAIN IN UTTARAKHAND: कहाँ होगा असर?
उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, पौड़ी, पिथौरागढ़, बागेश्वर, देहरादून, नैनीताल, टिहरी और अल्मोड़ा जैसे पहाड़ी और मैदानी जिलों में भारी से बहुत भारी वर्षा का पूर्वानुमान है। कुछ स्थानों पर अत्यंत भारी बारिश की भी संभावना जताई गई है। लगातार बारिश के कारण पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन, चट्टान खिसकने और सड़कों के बंद होने की आशंका है। नदी-नालों में जलस्तर बढ़ने से बाढ़ जैसी स्थिति उत्पन्न हो सकती है। आकाशीय बिजली गिरने से जान-माल की हानि और बिजली-पानी की सेवाओं पर असर पड़ सकता है। खेतों में खड़ी फसलें और बागवानी को भी नुकसान हो सकता है। साथ ही, उड़ानों और ट्रेनों की आवाजाही प्रभावित हो सकती है।

क्या हैं प्रशासन और जनता के लिए सुझाव?
राज्य सरकार और जिला प्रशासन को सलाह दी गई है कि वे जल निकासी की उचित व्यवस्था करें ताकि फसलों को नुकसान न पहुंचे। लोगों को सलाह दी गई है कि वे बारिश के दौरान घर में ही रहें, बिजली से चलने वाले उपकरणों से दूर रहें और सुरक्षित स्थानों पर शरण लें। नदी-नालों के पास रहने वाले लोगों को ऊँचाई वाले क्षेत्रों की ओर स्थानांतरित होने की चेतावनी दी गई है। तीर्थयात्रियों, विशेषकर चारधाम यात्रा पर निकले श्रद्धालुओं को सलाह दी गई है कि वे मौसम की स्थिति देखकर ही यात्रा करें।

यातायात और यात्रा से जुड़ी सावधानियां
तेज़ बारिश और कोहरे की वजह से सड़कों पर फिसलन बढ़ सकती है, जिससे वाहन चालकों को अतिरिक्त सावधानी बरतनी होगी। यात्रियों को सलाह दी गई है कि वे भूस्खलन संभावित क्षेत्रों से दूर रहें और किसी भी स्थिति में जलमग्न सड़कों को पार न करें। किसानों को सलाह दी गई है कि वे खेतों में फसलों की सुरक्षा के लिए जल निकासी की व्यवस्था करें और फसलों को यदि संभव हो तो सुरक्षित स्थानों पर पहुँचा दें। बारिश के समय खेतों में काम करने से बचें और बिजली गिरने के दौरान खेतों में न जाएं।


