RAM MANDIR FLAG HOSTING: श्री राम जन्मभूमि मंदिर के शिखर पर आज भगवा ध्वज फहराया गया, जो मंदिर निर्माण के पूर्ण होने का प्रतीक माना जा रहा है। इस ऐतिहासिक समारोह में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के सरसंघचालक मोहन भागवत ने भाग लिया। ध्वजारोहण विवाह पंचमी के अभिजीत मुहूर्त के दौरान संपन्न हुआ। प्रधानमंत्री मोदी और मोहन भागवत ने मंदिर की पहली मंजिल पर स्थित राम दरबार में पूजा-अर्चना की। वेद मंत्रोच्चार के बीच दोनों नेताओं ने राम लला की आरती उतारी। इसके बाद मंदिर के 191 फुट ऊंचे शिखर पर भगवा ध्वज फहराया गया।

RAM MANDIR FLAG HOSTING:मंदिर निर्माण की औपचारिक समाप्ति
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और मंदिर ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय भी समारोह में मौजूद रहे। चंपत राय ने बताया कि यह ध्वज मंदिर निर्माण की औपचारिक समाप्ति का संकेत है। ध्वज का आकार समकोण त्रिभुजाकार है, जो 10 फुट ऊंचा और 20 फुट लंबा है। भगवा रंग में बनी इस ध्वज पर तेजस्वी सूर्य, ‘ओम’ अक्षर और कोविदारा वृक्ष की छवि अंकित है। सूर्य भगवान राम के तेज और पराक्रम का प्रतीक है। उत्तर भारतीय नागर शैली में बने शिखर पर यह ध्वज स्थापित किया गया है, जबकि मंदिर की 800 मीटर लंबी परिधि दीवार दक्षिण भारतीय शैली में बनी है।

श्रद्धालुओं और आचार्यों की उपस्थिति
समारोह में 108 आचार्यों ने पूजा-अनुष्ठान संपन्न कराए, जिनमें अयोध्या, काशी और दक्षिण भारत के विद्वान शामिल थे। काशी के प्रसिद्ध विद्वान गणेश्वर शास्त्री ने अनुष्ठान का मार्गदर्शन किया। मंदिर परिसर में केवल क्यूआर कोड वाले आमंत्रित अतिथियों को प्रवेश दिया गया। इसके अलावा पूर्वांचल और अवध के 6,000 विशेष अतिथि और सोनभद्र के आदिवासी व वनवासी प्रतिनिधि भी शामिल रहे। अयोध्या और आसपास के जिलों में एनएसजी स्नाइपर, साइबर विशेषज्ञ और 7,000 से अधिक सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए।

मंदिर निर्माण की पृष्ठभूमि
राम मंदिर निर्माण का मार्ग 1992 के बाबरी मस्जिद विध्वंस और उसके बाद चले लंबे न्यायिक विवाद से शुरू हुआ। सुप्रीम कोर्ट के 2019 फैसले के बाद ट्रस्ट का गठन हुआ। जनवरी 2024 में गर्भगृह में राम लला की प्राण प्रतिष्ठा हुई थी। आज का ध्वजारोहण समारोह उसी निर्माण यात्रा का अंतिम चरण है। समारोह से पहले प्रधानमंत्री मोदी ने माता अन्नपूर्णा मंदिर और सप्त मंदिर में दर्शन किए। मोहन भागवत ने भी तैयारियों का निरीक्षण किया। अन्य धार्मिक नेता जैसे मोरारी बापू, चिन्मयानंद, धीरेंद्र शास्त्री और देवकीनंदन ठाकुर भी उपस्थित रहे। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल और मंदिर ट्रस्ट के अधिकारी भी समारोह का हिस्सा बने।

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