राजधानी दून में हर्षोउल्लास से मनाई जा रही गुरु नानक देव जयंती

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Guru Nanak Dev Jayanti
Guru Nanak Dev Jayanti

Uttarakhand Devbhoomi Desk: प्रत्येक वर्ष कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि को सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक देव की जयंती (Guru Nanak Dev Jayanti) मनाई जाती है। इस दिन को प्रकाश पर्व या गुरु पर्व भी कहा जाता है। भारतवासी इस दिन को बड़े धूमधाम से मनाते हैं। इस साल 8 नवंबर यानी आज गुरु नानक देव जयंती (Guru Nanak Dev Jayanti) बड़े ही हर्षोउल्लास से मनाई जा रही है। सिख समाज के लोग इस अवसर पर भजन-कीर्तन करते हैं और वाहे गुरु का जाप करते हैं। साथ ही कहीं- कहीं ढोल मंजीरों के साथ प्रभात फेरी भी निकाली जाती है।

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आज देशभर में सिख समाज अपने प्रथम गुरु, गुरु नानकदेवजी (Guru Nanak Dev Jayanti) का 553 वां प्रकाश पर्व मना रहे हैं। इसी दौरान सभी गुरुद्वारों में विभिन्न कार्यक्रमों के साथ-साथ खास कीर्तन का आयोजन किया जा रहा है। वहीं उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के गुरुद्वारों में भी एक अलग रौनक नजर आ रही है।

Guru Nanak Dev Jayanti: राज्यपाल लेफ्टिनेंट रिटायर्ड गुरमीत सिंह भी हुए शामिल

दून के रेसकोर्स स्थित गुरुद्वारें में प्रकाश पर्व के अवसर पर कीर्तन आयोजित किया गया। ऐसे में यहां बड़ी संख्या में लोगों मौजूद थे। विभिन्न राज्यों एवं प्रदेश के विभिन्न जिलों से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया। और साथ ही लंगर आयोजित किया गया। इस अवसर पर राज्यपाल लेफ्टिनेंट रिटायर्ड गुरमीत सिंह भी रेसकोर्स पहुंचे। उन्होंने अरदास की और कीर्तन सुना और सभी को गुरु नानक जी के प्रकाश पर्व की शुभकामनाएं दी।

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Guru Nanak Dev Jayanti: पाकिस्‍तान में है गुरु नानक जी का जन्‍मस्‍थान

सिख धर्म के पहले गुरु, गुरु नानक देव (Guru Nanak Dev Jayanti) का जन्म 15 अप्रैल 1469 में पंजाव प्रांत के तलवंडी गांव में हुआ था। ये स्थान अब पाकिस्तान के पंजाब प्रांत स्थित ननकाना साहिब शहर में है। गुरु नानक देव ने ही सिख धर्म की स्थापना की थी। उन्होंने हमेशा जात-पात का विरोध किया और रूढ़िवादिता, धार्मिक आडंबर और अंधविश्वास के बिलकुल खिलाफ रहे। जीवनभर मानव सेवा करने के बाद 1539 में करतारपुर की एक धर्मशाला में उन्होंने अपने प्राण त्याग दिए।

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