Gratuity Rules को लेकर सबसे ज्यादा उलझन तब होती है जब कोई कर्मचारी नौकरी छोड़ता है और पूछता है कि अब उसका पैसा कब और कैसे मिलेगा। कई लोग मान लेते हैं कि रिजाइन करने पर ग्रेच्युटी खत्म हो जाती है, तो कुछ लोग महीनों तक कंपनी के जवाब का इंतजार करते रहते हैं। सच यह है कि कानून ने पात्रता, भुगतान की समय सीमा और शिकायत का पूरा रास्ता तय कर रखा है।
ग्रेच्युटी क्या है?
ग्रेच्युटी वह रकम है जो कंपनी लंबे समय तक सेवा देने के बदले कर्मचारी को देती है। यह सैलरी का हिस्सा नहीं, बल्कि नौकरी खत्म होने पर मिलने वाला एकमुश्त लाभ है। नवंबर 2025 से Code on Social Security, 2020 लागू होने के बाद ग्रेच्युटी के प्रावधान इसी कोड के तहत आ गए हैं।
नौकरी छोड़ने पर ग्रेच्युटी कब मिलती है?
स्थायी कर्मचारी को ग्रेच्युटी पाने के लिए आम तौर पर एक ही कंपनी में कम से कम 5 साल की लगातार सेवा पूरी करनी होती है। यह 5 साल पूरे होने के बाद रिजाइन, रिटायरमेंट या छंटनी, किसी भी वजह से नौकरी छूटे, ग्रेच्युटी का हक बनता है। कर्मचारी की मृत्यु या विकलांगता की स्थिति में 5 साल की शर्त लागू नहीं होती। ऐसे में रकम कर्मचारी या उसके नॉमिनी को मिलती है।
कुछ हाई कोर्ट ने यह भी माना है कि 4 साल पूरे करके पांचवें साल में 240 दिन काम करने वाले कर्मचारी को भी पात्र माना जा सकता है। हालांकि हर मामले में यह अपने आप लागू नहीं होता। फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए 1 साल का नियम नए लेबर कोड का सबसे बड़ा बदलाव फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों के लिए है।
अब कॉन्ट्रैक्ट पर तय अवधि के लिए रखे गए कर्मचारी 1 साल की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी के हकदार हो जाते हैं। उन्हें यह रकम काम किए गए समय के अनुपात में मिलती है। लेकिन 11 महीने का कॉन्ट्रैक्ट पूरा करने वाले को इसका लाभ नहीं मिलेगा।
Gratuity Rules के अनुसार रकम कैसे निकलती है?
फॉर्मूला है: आखिरी बेसिक सैलरी और DA × 15 × सेवा के साल ÷ 26। उदाहरण के लिए, अगर आखिरी बेसिक और DA 40,000 रुपये है और सेवा 7 साल की है, तो ग्रेच्युटी करीब 1,61,538 रुपये बनेगी। नए नियमों में बेसिक और DA मिलाकर कुल सैलरी का कम से कम 50% होना जरूरी है, इसलिए आगे चलकर ज्यादातर लोगों की ग्रेच्युटी बढ़ सकती है।
प्राइवेट कर्मचारियों के लिए पूरे करियर में 20 लाख रुपये तक की ग्रेच्युटी टैक्स फ्री है। Gratuity Rules में भुगतान की 30 दिन की समय सीमा ग्रेच्युटी देय होने के बाद कंपनी को 30 दिन के अंदर भुगतान करना होता है। अगर कंपनी देरी करती है, तो उसे बकाया रकम पर ब्याज भी देना पड़ता है। केंद्र सरकार की अधिसूचना के अनुसार यह दर 10% सालाना साधारण ब्याज है।
Form I से कैसे करें ग्रेच्युटी का दावा?
नौकरी छोड़ते समय कर्मचारी अपनी कंपनी को Form I भरकर ग्रेच्युटी के लिए आवेदन देता है। इसमें नाम, जॉइनिंग और नौकरी छोड़ने की तारीख, आखिरी सैलरी और बैंक डिटेल्स भरी जाती हैं। इसे ऐसे तरीके से जमा करें जिसका सबूत रहे, जैसे रजिस्टर्ड पोस्ट या HR से रिसीविंग लेकर। आवेदन मिलने के बाद कंपनी को लगभग 15 दिन में Form L के जरिए रकम मंजूर करनी होती है या Form M के जरिए कारण के साथ दावा खारिज करना होता है।
Gratuity Rules के अनुसार कंपनी ग्रेच्युटी न दे तो शिकायत कहां करें?
अगर कंपनी जवाब न दे, कम रकम दे या दावा खारिज कर दे, तो कर्मचारी Form N भरकर कंट्रोलिंग अथॉरिटी के पास शिकायत कर सकता है। यह अधिकारी आम तौर पर आपके इलाके का असिस्टेंट लेबर कमिश्नर या जिला लेबर ऑफिसर होता है। सुनवाई के बाद वह कंपनी को ब्याज समेत भुगतान का आदेश दे सकता है। शिकायत करते समय ऑफर लेटर, सैलरी स्लिप, रिलीविंग लेटर और Form I की कॉपी साथ रखें।

नौकरी छोड़ने से पहले इन बातों का रखें ध्यान
रिजाइन करने से पहले Gratuity Rules के हिसाब से अपनी सेवा की सही अवधि गिन लें। कई बार कुछ हफ्ते रुकने से 5 साल पूरे हो जाते हैं और ग्रेच्युटी का हक बन जाता है। नौकरी के दौरान नॉमिनेशन फॉर्म भरा है या नहीं, यह भी HR से पक्का कर लें। अपना फुल एंड फाइनल सेटलमेंट लिखित में लें ताकि बाद में कोई विवाद न हो।
इन विषयों को और गहराई से समझने के लिए ये लेख भी पढ़ें: ग्रेच्युटी का पैसा कैसे कैलकुलेट होता है, सैलरी स्लिप के हर टर्म का मतलब और EPF में नौकरी छोड़ने की तारीख कैसे सुधारें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Gratuity Rules के अनुसार क्या रिजाइन करने पर भी ग्रेच्युटी मिलती है?
हां, अगर आपने एक ही कंपनी में 5 साल की लगातार सेवा पूरी कर ली है, तो रिजाइन करने पर भी ग्रेच्युटी मिलती है।
2. नए Gratuity Rules में फिक्स्ड टर्म कर्मचारियों को क्या फायदा है?
उन्हें अब 5 साल की जगह 1 साल की सेवा के बाद ही अनुपात के हिसाब से ग्रेच्युटी मिल सकती है।
3. Gratuity Rules के अनुसार ग्रेच्युटी कितने दिन में मिलनी चाहिए?
देय होने के 30 दिन के अंदर। देरी होने पर कंपनी को 10% सालाना ब्याज देना पड़ता है।
4. Gratuity Rules के अनुसार कंपनी ग्रेच्युटी न दे तो क्या करें?
Form N भरकर अपने इलाके के कंट्रोलिंग अथॉरिटी यानी लेबर ऑफिस में शिकायत करें।
5. Gratuity Rules के अनुसार ग्रेच्युटी से जुड़े आधिकारिक नियम कहां देखें?
ग्रेच्युटी और नए लेबर कोड से जुड़े नियम श्रम मंत्रालय की आधिकारिक वेबसाइट पर देखे जा सकते हैं।
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