भारतीय उद्योगपति GAUTAM ADANI और उनके भतीजे SAGAR ADANI को लेकर चल रहा हाई-प्रोफाइल अमेरिकी कानूनी मामला अब पूरी तरह समाप्त हो गया है। संयुक्त राज्य अमेरिका के न्याय विभाग (DOJ) ने उनके खिलाफ दर्ज सभी आपराधिक धोखाधड़ी और साजिश से जुड़े आरोप स्थायी रूप से वापस ले लिए हैं।
पूर्वी जिला न्यूयॉर्क के अभियोजकों ने 18 मई 2026 को अदालत में आधिकारिक फाइलिंग दाखिल कर बताया कि मामले की विस्तृत समीक्षा के बाद विभाग ने इन आरोपों पर आगे कानूनी और प्रशासनिक संसाधन खर्च न करने का फैसला लिया है।
भविष्य में इन्हीं आरोपों को दोबारा नहीं लाया जा सकता
अंतरराष्ट्रीय और भारतीय मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अभियोजन पक्ष ने अदालत से आरोपों को “प्रिज्युडिस” के साथ खारिज करने का अनुरोध किया है। कानूनी भाषा में इसका अर्थ यह होता है कि भविष्य में इन्हीं आरोपों को दोबारा नहीं लाया जा सकता। इस फैसले के बाद यह पूरा आपराधिक मामला प्रभावी रूप से बंद माना जा रहा है।
क्या है पूरा मामला?
GAUTAM ADANI से जुड़ा यह मामला मूल रूप से नवंबर 2024 में दायर किए गए अभियोग से जुड़ा था। उस समय अमेरिकी न्याय विभाग ने आरोप लगाया था कि ADANI GREEN ENERGY भ्रष्टाचार में लिप्त है।
और उससे जुड़ी संस्थाओं द्वारा एक बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्ट को हासिल करने के लिए भारतीय अधिकारियों को 250 मिलियन डॉलर से अधिक की कथित रिश्वत दी गई और इस तथ्य को अमेरिकी निवेशकों से छिपाया गया।

अभियोजन पक्ष के अनुसार यह मामला 12 गीगावाट सौर ऊर्जा आपूर्ति से संबंधित बड़े कारोबारी अनुबंध से जुड़ा था। उस समय प्रतिभूति धोखाधड़ी, वायर फ्रॉड और आपराधिक साजिश समेत कई गंभीर आरोप लगाए गए थे। हालांकि अडानी समूह ने शुरुआत से ही इन आरोपों को निराधार और तथ्यों से परे बताया था।
आगे कार्रवाई न करने का निर्णय
18 मई 2026 को GAUTAM ADANI से जुड़े मामले में अदालत में दाखिल दस्तावेजों में अमेरिकी अभियोजकों ने कहा कि न्याय विभाग ने “प्रोसेक्यूटोरियल डिस्क्रिशन” यानी अभियोजन संबंधी विवेकाधिकार का इस्तेमाल करते हुए व्यक्तिगत प्रतिवादियों के खिलाफ आगे कार्रवाई न करने का निर्णय लिया है।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस फैसले के पीछे साक्ष्यों से जुड़े कानूनी पहलू और अन्य प्रक्रियात्मक कारण भी हो सकते हैं, हालांकि विभाग ने अपने आधिकारिक दस्तावेज में किसी राजनीतिक कारण का उल्लेख नहीं किया।
सिविल मामले का भी समाधान
इसी दौरान अमेरिकी प्रतिभूति और विनिमय आयोग यानी U.S. SECURITIES AND EXCHANGE COMMISSION के साथ चल रहे सिविल मामले का भी समाधान हो गया।
जानकारी के अनुसार GAUTAM ADANI और सागर अडानी ने लगभग 18 मिलियन डॉलर के भुगतान के जरिए सिविल फ्रॉड से जुड़े आरोपों का समझौता किया। इस समझौते में किसी भी पक्ष ने औपचारिक रूप से गलती स्वीकार नहीं की, बल्कि कानूनी विवाद समाप्त करने के उद्देश्य से यह वित्तीय निपटान किया गया।
इसके अलावा ADANI ENTERPRISES ने अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के साथ भी 275 मिलियन डॉलर का अलग वित्तीय समझौता किया। यह मामला दुबई रूट के माध्यम से एलपीजी खरीद और ईरान प्रतिबंधों के कथित उल्लंघन से जुड़ा बताया गया था।
विवाद की शुरुआत
इस पूरे विवाद की शुरुआत वर्ष 2023 में आई HINDENBURG RESEARCH की रिपोर्ट के बाद हुई थी। उस रिपोर्ट के सार्वजनिक होने के बाद अडानी समूह की कई कंपनियों के शेयरों में बड़ी गिरावट देखी गई थी और अमेरिकी एजेंसियों की जांच भी उसी के बाद तेज हुई।

GAUTAM ADANI समूह लगातार यह कहता रहा कि भारतीय क्षेत्राधिकार में संचालित गतिविधियों पर अमेरिकी कानून की सीमाएं हैं और उनके खिलाफ पर्याप्त सबूत मौजूद नहीं हैं। व्यापारिक दृष्टि से देखा जाए तो यह फैसला अडानी समूह के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
पोर्ट्स, एयरपोर्ट्स, ग्रीन एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे क्षेत्रों में सक्रिय समूह के लिए अमेरिकी कानूनी विवाद का खत्म होना वैश्विक निवेशकों का भरोसा मजबूत करने वाला कदम माना जा रहा है।
देश दुनिया से जुड़ी हर खबर और जानकारी के लिए क्लिक करें-देवभूमि न्यूज

