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Mutual Fund सिर्फ रिटर्न देखकर न चुनें, Expense Ratio का ये गणित भी समझना है बहुत जरूरी

Expense Ratio वह सालाना फीस है, जो म्यूचुअल फंड कंपनी आपके निवेश को संभालने के बदले आपकी कुल जमा रकम में से प्रतिशत के रूप में लेती है। ज्यादातर निवेशक फंड चुनते समय सिर्फ पिछला रिटर्न देखते हैं और इस छोटी सी दिखने वाली फीस को नजरअंदाज कर देते हैं। लेकिन लंबे समय में यही छोटा प्रतिशत आपकी कमाई का बड़ा हिस्सा खा सकता है।

Expense Ratio का आसान मतलब

म्यूचुअल फंड चलाने में कई तरह के खर्च होते हैं, जैसे फंड मैनेजर और रिसर्च टीम की सैलरी, रजिस्ट्रार का शुल्क, ऑडिट, मार्केटिंग और डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन। ये सारे खर्च फंड की कुल संपत्ति के एक तय प्रतिशत के रूप में निवेशकों से वसूले जाते हैं। अगर किसी फंड का एक्सपेंस रेश्यो 1 प्रतिशत है और आपका निवेश 1 लाख रुपये है, तो साल भर में लगभग 1,000 रुपये इस फीस में जाएंगे।

यह फीस कैसे कटती है?

सबसे जरूरी बात यह है कि यह पैसा आपके खाते से अलग से नहीं कटता। फंड कंपनी इसे हर दिन थोड़ा थोड़ा करके फंड की एनएवी में से घटा देती है। इसलिए आपको जो एनएवी और रिटर्न दिखता है, वह पहले से ही इस खर्च को घटाने के बाद का होता है। यही वजह है कि बहुत से निवेशकों को इसका असर महसूस ही नहीं होता।

सेबी के 2026 के नए नियम

सेबी के म्यूचुअल फंड नियम 2026 एक अप्रैल 2026 से लागू हो चुके हैं। इनके तहत अब कुल खर्च को एक ही संख्या में दिखाने के बजाय अलग अलग हिस्सों में दिखाया जाता है। नए ढांचे में फंड कंपनी की अपनी फीस को बेस एक्सपेंस रेश्यो कहा जाता है।

ब्रोकरेज, जीएसटी, एसटीटी और स्टांप ड्यूटी जैसे सरकारी शुल्क इसके ऊपर अलग से जुड़ते हैं और इन सबको मिलाकर कुल एक्सपेंस रेश्यो बनता है। सेबी ने बेस फीस की अधिकतम सीमा भी लगभग 0.10 से 0.15 प्रतिशत तक घटाई है। इंडेक्स फंड और ईटीएफ के लिए यह सीमा 1 प्रतिशत से घटकर 0.90 प्रतिशत रह गई है। फंड जितना बड़ा होता है, उसकी अधिकतम सीमा उतनी ही कम होती जाती है।

Expense Ratio का रिटर्न पर असर

एक साल में 1 प्रतिशत का फर्क छोटा लगता है, लेकिन कंपाउंडिंग की वजह से लंबे समय में यह बड़ा अंतर बना देता है। मान लीजिए आपने 1 लाख रुपये 20 साल के लिए ऐसे फंड में लगाए जो खर्च से पहले 12 प्रतिशत सालाना कमाता है।

0.5 प्रतिशत फीस वाले फंड में आपका पैसा लगभग 8.82 लाख रुपये बनेगा, जबकि 1.5 प्रतिशत फीस वाले फंड में यह करीब 7.37 लाख रुपये ही रह जाएगा। यानी सिर्फ 1 प्रतिशत ज्यादा फीस की वजह से लगभग 1.45 लाख रुपये कम मिलेंगे। एसआईपी में हर महीने पैसा लगाने पर यह अंतर और भी बड़ा हो सकता है।

डायरेक्ट और रेगुलर प्लान में फर्क

हर म्यूचुअल फंड स्कीम के दो प्लान होते हैं। रेगुलर प्लान में डिस्ट्रीब्यूटर का कमीशन जुड़ा होता है, इसलिए उसकी फीस ज्यादा होती है। डायरेक्ट प्लान में कोई कमीशन नहीं होता, इसलिए उसी फंड का एक्सपेंस रेश्यो कम होता है और रिटर्न थोड़ा ज्यादा मिलता है। जो निवेशक खुद रिसर्च कर सकते हैं, उनके लिए डायरेक्ट प्लान फायदेमंद रहता है।

Expense Ratio
Expense Ratio

फंड चुनते समय क्या ध्यान रखें

हमेशा एक ही कैटेगरी के फंडों की फीस की तुलना करें, क्योंकि इंडेक्स फंड, डेट फंड और इक्विटी फंड की फीस स्वाभाविक रूप से अलग होती है। सिर्फ सबसे कम फीस देखकर फंड न चुनें। फंड का लंबा प्रदर्शन, जोखिम और आपके लक्ष्य से मेल भी उतना ही जरूरी है। Expense Ratio फंड की फैक्टशीट, फंड कंपनी की वेबसाइट और निवेश ऐप पर आसानी से देखा जा सकता है।

निवेश की बुनियादी जानकारी के लिए हमारी म्यूचुअल फंड की आसान गाइड पढ़ें। साथ ही लार्ज कैप, मिड कैप और स्मॉल कैप का अंतर और रूल ऑफ 72 से पैसा दोगुना होने का हिसाब भी समझें।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

1. कितना Expense Ratio अच्छा माना जाता है?

कोई एक तय आंकड़ा नहीं है। इंडेक्स फंड में आमतौर पर फीस बहुत कम होती है, जबकि सक्रिय इक्विटी फंड में ज्यादा। एक ही कैटेगरी में कम Expense Ratio वाला फंड बेहतर माना जाता है।

2. क्या Expense Ratio अलग से चुकानी पड़ती है?

नहीं, यह फीस रोजाना फंड की एनएवी में से अपने आप कट जाती है। आपको अलग से कोई भुगतान नहीं करना पड़ता।

3. क्या फंड कंपनी Expense Ratio बढ़ा सकती है?

हां, लेकिन सिर्फ सेबी की तय सीमा के अंदर। फीस बढ़ाने से पहले कंपनी को निवेशकों को सूचना देनी होती है।

4. सभी फंडों की Expense Ratio एक जगह कहां देखें?

म्यूचुअल फंड कंपनियों के संगठन एम्फी की वेबसाइट पर अलग अलग स्कीमों का एक्सपेंस रेश्यो देखा जा सकता है।

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निवेश से जुड़ी इस जानकारी के अलावा, ये अन्य बड़ी खबरें भी पढ़ें:

उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। म्यूचुअल फंड निवेश बाजार जोखिमों के अधीन है, निवेश से पहले योजना से जुड़े सभी दस्तावेज ध्यान से पढ़ें।

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