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CJP Protest: अभिजीत दिपके ने शिवाजी पार्क में शुरू किया ‘जेल भरो आंदोलन’, नसीरुद्दीन शाह भी पहुंचे

मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली को लेकर चल रहा विवाद अब सड़क पर भी दिखाई देने लगा है। शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को मुंबई के शिवाजी पार्क में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के संस्थापक अभिजीत दिपके ने ‘जेल भरो आंदोलन’ शुरू किया। इस प्रदर्शन का ऐलान दिपके ने पहले ही कर दिया था। आंदोलन के दौरान बड़ी संख्या में समर्थक और प्रदर्शनकारी शिवाजी पार्क में जुटे। इस बीच दिग्गज अभिनेता नसीरुद्दीन शाह भी प्रदर्शन स्थल पर पहुंचे और दिपके से मुलाकात की। दोनों के गले मिलने का वीडियो सोशल मीडिया पर सामने आया है।

CJP का यह आंदोलन चुनाव आयोग की ओर से मतदाता सूचियों के Special Intensive Revision यानी SIR को लेकर उठाए जा रहे सवालों की पृष्ठभूमि में हो रहा है। प्रदर्शनकारियों की मांगों में CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग प्रमुख है। हालांकि, चुनाव आयोग ने SIR से जुड़े फैसलों को आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए निर्णय बताया है।

पुलिस की अनुमति के बिना CJP का आंदोलन का ऐलानCJP

CJP ने मूल रूप से 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में प्रदर्शन की अनुमति मांगी थी, लेकिन मुंबई पुलिस ने इसकी अनुमति नहीं दी। पुलिस की ओर से कानून-व्यवस्था, यातायात और क्षेत्र से जुड़े प्रतिबंधों का हवाला दिया गया था। इसके बाद अभिजीत दिपके ने कहा कि यदि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी जाती है तो संगठन ‘जेल भरो आंदोलन’ करेगा।

दिपके ने 28 सितंबर को सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए 2 अक्टूबर को शिवाजी पार्क में ‘जेल भरो आंदोलन’ करने का ऐलान किया था। उन्होंने इसे नागरिकों के विरोध के अधिकार से जोड़ते हुए आंदोलन जारी रखने की बात कही थी।

शिवाजी पार्क के इस्तेमाल को लेकर बीएमसी की अनुमति भी एक मुद्दा रही। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक, नगर निकाय ने कहा था कि आयोजन के लिए उसके पास आवेदन नहीं आया था और अनुमति से जुड़ा मामला संबंधित प्रशासनिक प्रक्रिया के तहत देखा जाना था।

अभिजीत दिपके का क्या है रुख?

अभिजीत दिपके ने CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को अपने आंदोलन का प्रमुख मुद्दा बनाया है। CJP का आरोप है कि चुनावी प्रक्रिया और मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण में गंभीर सवाल खड़े हुए हैं। संगठन SIR की प्रक्रिया को रोकने और मतदाता सूची से जुड़े मामलों में अधिक पारदर्शिता की मांग कर रहा है।

CJP ने यह भी संकेत दिया है कि उसका आंदोलन केवल मुंबई तक सीमित नहीं रहेगा। दिपके ने मुंबई के बाद गोवा, बेंगलुरु और कोलकाता समेत दूसरे शहरों में भी आंदोलन फैलाने की बात कही है।

हालांकि, CJP द्वारा लगाए गए आरोप राजनीतिक विवाद का हिस्सा हैं। चुनाव आयोग का कहना है कि SIR समेत आयोग के फैसले तीन सदस्यीय आयोग द्वारा सर्वसम्मति से लिए गए हैं। इसलिए इस पूरे विवाद में प्रदर्शनकारियों के आरोप और चुनाव आयोग का आधिकारिक पक्ष दोनों को अलग-अलग देखना जरूरी है।

नसीरुद्दीन शाह पहुंचे शिवाजी पार्क

शुक्रवार को प्रदर्शन के दौरान अभिनेता नसीरुद्दीन शाह की मौजूदगी ने इस आंदोलन को अतिरिक्त चर्चा में ला दिया। सामने आए वीडियो में शाह और अभिजीत दिपके बातचीत करते और फिर एक-दूसरे को गले लगाते नजर आए।

नसीरुद्दीन शाह की मौजूदगी को प्रदर्शन के समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है, हालांकि उनके इस मौके पर दिए गए बयान और आंदोलन से जुड़े उनके विस्तृत राजनीतिक रुख को अलग-अलग संदर्भ में देखना जरूरी है। रिपोर्टों के मुताबिक, उन्होंने प्रदर्शन स्थल पर दिपके से मुलाकात की।

एक दिन पहले दिपके को लेकर भी बना था विवाद

2 अक्टूबर के आंदोलन से एक दिन पहले अभिजीत दिपके के मरीन ड्राइव इलाके में पुलिस द्वारा संक्षिप्त हिरासत में लिए जाने की खबर सामने आई थी। बाद में CJP की ओर से कहा गया कि दिपके को गिरफ्तार या हिरासत में नहीं लिया गया था और वह मुंबई में स्वतंत्र रूप से घूम रहे थे। दूसरी रिपोर्टों में पुलिस स्टेशन ले जाने और बाद में रिहा किए जाने की बात कही गई। इस वजह से उनके कथित ‘डिटेंशन’ को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।

यह घटनाक्रम 2 अक्टूबर के प्रस्तावित प्रदर्शन से ठीक पहले हुआ था और इसके बाद मुंबई में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी चर्चा तेज हुई।

दिल्ली में भी प्रदर्शन की तैयारी

मुंबई के साथ-साथ दिल्ली में भी 2 अक्टूबर को चुनाव आयोग और ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन का आह्वान किया गया था। जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन को दिल्ली पुलिस ने अनुमति नहीं दी और इलाके में सुरक्षा बढ़ाई गई। सामाजिक कार्यकर्ताओं, छात्र संगठनों और कुछ विपक्षी नेताओं ने इस प्रदर्शन का समर्थन किया।

इस तरह SIR को लेकर विवाद अब अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक समूहों के आंदोलनों का रूप ले चुका है। दिल्ली और मुंबई दोनों जगह प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की भूमिका, मतदाता सूचियों और चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए हैं।

CJP का गांधी जयंती पर ‘जेल भरो’ क्यों?

CJP ने 2 अक्टूबर की तारीख को जानबूझकर चुना, क्योंकि यह महात्मा गांधी की जयंती है। दिपके ने अपने आंदोलन को नागरिक असहमति और विरोध के अधिकार से जोड़ते हुए ‘जेल भरो’ का रास्ता अपनाने की घोषणा की थी।

‘जेल भरो आंदोलन’ भारतीय राजनीतिक आंदोलनों में नागरिक अवज्ञा के एक तरीके के रूप में इस्तेमाल होता रहा है, जिसमें प्रदर्शनकारी गिरफ्तारी देने की घोषणा करते हैं। CJP ने भी अपने मौजूदा आंदोलन को इसी स्वरूप में पेश किया है।

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आगे क्या होगा?

मुंबई में प्रदर्शन के बाद अब नजर इस बात पर है कि CJP अपने आंदोलन को आगे किन शहरों तक ले जाता है और चुनाव आयोग तथा केंद्र सरकार की ओर से इन मांगों पर क्या प्रतिक्रिया आती है। दिपके पहले ही मुंबई के बाद अन्य शहरों में आंदोलन की घोषणा कर चुके हैं।

दूसरी ओर, चुनाव आयोग SIR और मतदाता सूची से संबंधित अपनी प्रक्रिया को वैधानिक ढांचे के तहत आगे बढ़ा रहा है। ऐसे में आने वाले दिनों में यह विवाद राजनीतिक विरोध, चुनावी प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों से जुड़े बड़े सवालों के बीच और चर्चा में रह सकता है।

फिलहाल मुंबई के शिवाजी पार्क में CJP का ‘जेल भरो आंदोलन’, अभिजीत दिपके की सक्रिय भूमिका और नसीरुद्दीन शाह की मौजूदगी इस पूरे विवाद के प्रमुख घटनाक्रम बने हुए हैं। प्रदर्शनकारियों की मांगें और चुनाव आयोग का पक्ष अब इस बहस के दो प्रमुख पहलू हैं, जिन पर आगे की घटनाओं से तस्वीर और स्पष्ट हो सकती है।

 

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PandeyAbhishek
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Abhishek Pandey is a skilled news editor with 4-5 years of experience in the field, he covers mostly political, world news, sports and etc.
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