e-Sign ने भारत में डॉक्यूमेंट साइन करने के तरीके को पूरी तरह बदल दिया है। अब कोई भी जरूरी कॉन्ट्रैक्ट, एग्रीमेंट या फॉर्म साइन करने के लिए न प्रिंटआउट चाहिए, न स्कैनर, बस आधार नंबर और मोबाइल OTP से ही काम हो जाता है। आइए विस्तार से समझते हैं यह सर्विस क्या है और इसका इस्तेमाल कैसे किया जाता है।
e-Sign क्या है?
e-Sign भारत सरकार की एक ऑनलाइन इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर सर्विस है, जो किसी भी आधार होल्डर को अपने आधार नंबर और मोबाइल पर आए OTP के जरिए डॉक्यूमेंट डिजिटली साइन करने की सुविधा देती है। यह IT Act 2000 की धारा 3A (जो 2008 के संशोधन के बाद जोड़ी गई) और MeitY द्वारा जारी Electronic Signature Rules, 2015 के तहत रेगुलेट होती है।
Digital Signature और e-Sign में क्या फर्क है?
एक पारंपरिक Digital Signature Certificate (DSC) के लिए USB टोकन खरीदना पड़ता है, जिसकी वैधता 1-3 साल तक होती है और कीमत ₹500-2,000 सालाना तक जाती है। इसके उलट e-Sign बिल्कुल अलग तरीके से काम करता है, यह हर बार इस्तेमाल पर नया सर्टिफिकेट जनरेट करता है, न कोई USB टोकन चाहिए, न कोई सॉफ्टवेयर इंस्टॉल करना पड़ता है, और लागत सिर्फ करीब ₹15 प्रति इस्तेमाल आती है।
यह सर्विस काम कैसे करती है?
जब कोई व्यक्ति किसी डॉक्यूमेंट को e-Sign के जरिए साइन करता है, तो उस समय UIDAI के जरिए तुरंत आधार e-KYC वेरिफिकेशन होता है, और CCA (Controller of Certifying Authorities) से लाइसेंस प्राप्त एक Certifying Authority उसी पल एक वन-टाइम क्रिप्टोग्राफिक सर्टिफिकेट जारी करती है।

यह पूरी प्रक्रिया एसिमेट्रिक क्रिप्टोग्राफी और हैश फंक्शन पर आधारित होती है, जिससे साइन होने के बाद डॉक्यूमेंट में किसी भी तरह की छेड़छाड़ लगभग नामुमकिन हो जाती है। प्राइवेसी की बात करें तो पूरा डॉक्यूमेंट कहीं भेजा नहीं जाता, सिर्फ उसका “थंबप्रिंट” यानी हैश वैल्यू सर्वर तक भेजी जाती है, और साइनिंग पूरी होते ही प्राइवेट-की तुरंत डिलीट कर दी जाती है।
e-Sign कैसे करें: पूरी प्रक्रिया
सबसे पहले किसी लाइसेंस प्राप्त सर्विस प्रोवाइडर (ASP) के जरिए अपना PDF डॉक्यूमेंट अपलोड करें। डॉक्यूमेंट को ध्यान से पढ़ें और साइनिंग के लिए सहमति दें। इसके बाद अपना 12 अंकों का आधार नंबर डालें, और आपके आधार-लिंक्ड मोबाइल नंबर पर एक OTP आएगा, जिसे वेरिफाई करते ही आपकी पहचान की पुष्टि हो जाती है।
OTP वेरिफाई होते ही सिस्टम अपने आप डॉक्यूमेंट को डिजिटली साइन कर देता है, और एक डिजिटल ऑडिट ट्रेल भी जनरेट होती है, जो बाद में विवाद की स्थिति में सबूत के तौर पर काम आती है। पूरी प्रक्रिया आमतौर पर 2 मिनट से भी कम समय में पूरी हो जाती है। ध्यान रहे, इसके लिए आपका मोबाइल नंबर आधार से लिंक होना जरूरी है, अगर यह पूरा नहीं है, तो पहले Aadhaar Seeding से जुड़ी यह जानकारी जरूर पढ़ें।
क्या यह कानूनी रूप से मान्य है?
हां, e-Sign को IT Act, 2000 के Second Schedule के तहत मान्यता प्राप्त है, और यह Section 15 के अनुसार एक “सिक्योर इलेक्ट्रॉनिक सिग्नेचर” माना जाता है। इसका मतलब है कि अगर भविष्य में कोई विवाद हो, तो सबूत का बोझ उस व्यक्ति पर आता है जो साइन को चुनौती दे रहा हो, न कि साइन करने वाले पर। यही वजह है कि यह e signature तरीका आजकल भारतीय MSMEs, D2C ब्रांड्स और सर्विस बिजनेस के बीच कॉन्ट्रैक्ट अप्रूवल के लिए तेजी से अपनाया जा रहा है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. e-Sign क्या है, आसान शब्दों में समझाएं?
यह आधार OTP के जरिए किसी भी डॉक्यूमेंट को ऑनलाइन कानूनी रूप से साइन करने की सरकारी सर्विस है।
2. e-Sign के लिए क्या-क्या चाहिए?
आधार नंबर और उससे लिंक्ड एक मोबाइल नंबर, जिस पर OTP आ सके।
3. यह पारंपरिक Digital Signature से कैसे अलग है?
पारंपरिक DSC में USB टोकन और सालाना फीस चाहिए होती है, जबकि यह हर बार OTP से तुरंत जनरेट होता है, बिना किसी हार्डवेयर के।
4. क्या इसका इस्तेमाल कानूनी दस्तावेजों के लिए किया जा सकता है?
हां, यह IT Act 2000 के तहत हस्तलिखित साइन जितना ही कानूनी रूप से मान्य है।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। सटीक और कानूनी जानकारी के लिए किसी लाइसेंस प्राप्त सर्विस प्रोवाइडर या कानूनी सलाहकार से संपर्क करें।
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