संसद की ओर प्रस्तावित मार्च से एक दिन पहले राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर स्थित प्रदर्शन स्थल पर बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जुट गए। छात्र, युवा, सामाजिक कार्यकर्ता और विभिन्न राज्यों से आए समर्थकों के पहुंचने से पूरे इलाके में आंदोलन का माहौल बन गया।
प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के नेताओं ने इसे शिक्षा व्यवस्था में सुधार, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामलों में जवाबदेही तय करने और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई बताया है। दूसरी ओर, दिल्ली पुलिस ने स्पष्ट किया है कि संसद मार्च के लिए न तो अनुमति मांगी गई है और न ही कोई अनुमति दी गई है।
प्रदर्शन स्थल पर रात से ही लोगों का आना शुरू हो गया था। कई प्रदर्शनकारी तिरंगा, पोस्टर और बैनर लेकर पहुंचे, जबकि स्वयंसेवकों ने भोजन, पानी और प्राथमिक चिकित्सा जैसी व्यवस्थाएं भी कीं। आयोजकों ने सभी प्रतिभागियों से अनुशासन बनाए रखने और आंदोलन को पूरी तरह शांतिपूर्ण रखने की अपील की।
CJP द्वारा प्रस्तावित संसद मार्च को लेकर बढ़ी तैयारियां
आंदोलनकारियों ने घोषणा की है कि वे निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार संसद की ओर मार्च करने का प्रयास करेंगे। उनका कहना है कि यह लोकतांत्रिक अधिकारों के तहत शांतिपूर्ण विरोध का हिस्सा है और उनका उद्देश्य सरकार तक अपनी मांगें पहुंचाना है।
आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों से कहा है कि वे केवल राष्ट्रीय ध्वज लेकर आएं, किसी राजनीतिक दल का झंडा न लाएं और किसी भी प्रकार की हिंसा या उकसावे से दूर रहें। उन्होंने सभी से कानून का सम्मान करते हुए संयम बनाए रखने की अपील की है।
सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद बढ़ा CJP का आंदोलन
इस आंदोलन को उस समय और गति मिली जब अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे सामाजिक कार्यकर्ता और शिक्षाविद सोनम वांगचुक को उनकी बिगड़ती स्वास्थ्य स्थिति के बीच जंतर-मंतर से अस्पताल ले जाया गया।
आंदोलन से जुड़े लोगों का आरोप है कि उन्हें उनकी इच्छा के विरुद्ध अस्पताल ले जाया गया, जबकि प्रशासन का कहना है कि यह कदम चिकित्सकीय सलाह और उनकी सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए उठाया गया। इस घटना के बाद बड़ी संख्या में समर्थक प्रदर्शन स्थल पर पहुंचने लगे और आंदोलन को व्यापक समर्थन मिलने लगा।
युवाओं की भागीदारी बनी सबसे बड़ी ताकत
प्रदर्शन की सबसे उल्लेखनीय विशेषता बड़ी संख्या में युवाओं की भागीदारी रही। देश के विभिन्न राज्यों से आए छात्र और प्रतियोगी परीक्षा अभ्यर्थी आंदोलन में शामिल हुए।
प्रदर्शनकारियों का कहना है कि लगातार सामने आ रहे प्रश्नपत्र लीक मामलों ने लाखों छात्रों के भविष्य को प्रभावित किया है। उनका आरोप है कि मेहनत करने वाले अभ्यर्थियों को बार-बार परीक्षा रद्द होने और अनियमितताओं का सामना करना पड़ रहा है।
कई छात्रों ने कहा कि वे केवल किसी एक परीक्षा के लिए नहीं बल्कि पूरी भर्ती और परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता की मांग कर रहे हैं।
CJP द्वारा प्रस्तावित आंदोलन पर दिल्ली पुलिस की सख्ती
दिल्ली पुलिस ने संसद के मानसून सत्र और सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए स्पष्ट किया है कि प्रस्तावित संसद मार्च के लिए कोई औपचारिक अनुमति नहीं दी गई है।
पुलिस अधिकारियों ने कहा कि बिना अनुमति किसी भी प्रकार की रैली या मार्च की स्थिति में कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही प्रदर्शनकारियों से शांति बनाए रखने और निर्धारित नियमों का पालन करने की अपील भी की गई है।
सुरक्षा के व्यापक इंतजाम
संभावित मार्च को देखते हुए जंतर-मंतर से संसद मार्ग तक सुरक्षा व्यवस्था को काफी मजबूत किया गया है।
कई स्थानों पर बैरिकेड लगाए गए हैं। अतिरिक्त पुलिस बल, त्वरित कार्रवाई दल, दंगा नियंत्रण वाहन और वाटर कैनन भी तैनात किए गए हैं। संवेदनशील इलाकों में लगातार निगरानी रखी जा रही है ताकि किसी भी अप्रिय स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।
यातायात पर भी असर
दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने आम लोगों के लिए एडवाइजरी जारी करते हुए कुछ प्रमुख मार्गों से बचने की सलाह दी है।
संसद मार्ग, जनपथ, अशोक रोड और मध्य दिल्ली के कई इलाकों में यातायात प्रभावित होने की संभावना जताई गई है। लोगों से सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने और यात्रा से पहले ट्रैफिक अपडेट देखने की अपील की गई है।
आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें
प्रदर्शनकारी शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार, परीक्षा प्रश्नपत्र लीक मामलों की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई और प्रभावित छात्रों को न्याय दिलाने की मांग कर रहे हैं।
इसके अलावा आंदोलन से जुड़े नेताओं ने शिक्षा मंत्री की जवाबदेही तय करने, भर्ती प्रक्रियाओं को पारदर्शी बनाने और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सख्त कानून बनाने की भी मांग उठाई है। उनका कहना है कि यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के खिलाफ नहीं बल्कि व्यवस्था में सुधार के लिए है।
सोशल मीडिया पर भी मिला समर्थन
जंतर-मंतर का यह आंदोलन सोशल मीडिया पर भी तेजी से चर्चा का विषय बना हुआ है।कई छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने ऑनलाइन मंचों पर प्रदर्शन का समर्थन किया है। आंदोलन से जुड़े वीडियो, तस्वीरें और संदेश बड़ी संख्या में साझा किए जा रहे हैं, जिससे देश के विभिन्न हिस्सों में भी इसकी चर्चा बढ़ गई है।
राजनीतिक प्रतिक्रियाएं
विपक्ष के कुछ नेताओं ने प्रदर्शनकारियों की मांगों का समर्थन करते हुए सरकार से संवाद शुरू करने की अपील की है। वहीं सरकार समर्थक नेताओं का कहना है कि कानून-व्यवस्था बनाए रखना सर्वोच्च प्राथमिकता है और किसी भी प्रकार की अवैध गतिविधि की अनुमति नहीं दी जा सकती।
इस बीच राजनीतिक दलों की प्रतिक्रियाओं के कारण आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय स्तर पर बहस भी तेज हो गई है।
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अब आगे क्या?
अब सभी की निगाहें प्रस्तावित संसद मार्च पर टिकी हैं। यदि प्रदर्शनकारी मार्च निकालने का प्रयास करते हैं तो सुरक्षा एजेंसियों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती होगी।
दूसरी ओर आंदोलन के आयोजकों ने कहा है कि वे पूरी तरह शांतिपूर्ण और अहिंसक तरीके से अपनी मांगें सरकार तक पहुंचाना चाहते हैं।
निष्कर्ष
संसद मार्च से पहले जंतर-मंतर पर प्रदर्शनकारियों की बढ़ती भीड़ ने इस आंदोलन को राष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है। युवाओं की बड़ी भागीदारी, सोनम वांगचुक को अस्पताल ले जाने के बाद बढ़ा जनसमर्थन और परीक्षा प्रणाली में सुधार की मांग ने आंदोलन को नई दिशा दी है। दूसरी ओर दिल्ली पुलिस ने बिना अनुमति मार्च पर सख्त रुख अपनाते हुए व्यापक सुरक्षा व्यवस्था की है।
अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच संवाद का कोई रास्ता निकलता है या यह विरोध प्रदर्शन और व्यापक रूप लेता है।

