विदेश में पढ़ाई का खर्च ₹15 लाख से ₹80 लाख या उससे ज्यादा तक जा सकता है, देश और कोर्स के हिसाब से। ज्यादातर भारतीय परिवारों के लिए Education Loan for Abroad Studies ही सबसे व्यावहारिक रास्ता है — पर सबसे बड़ा सवाल यही रहता है: कोलैटरल चाहिए या नहीं, और ब्याज दर में कितना फर्क पड़ता है।
₹20 लाख के लोन पर, कोलैटरल वाला लोन (9%) 10 साल में कुल ₹10.4 लाख ब्याज लेता है, जबकि बिना कोलैटरल वाला (12%) ₹14.4 लाख, यानी सिर्फ कोलैटरल न देने की वजह से ₹4 लाख ज्यादा चुकाने पड़ते हैं।
Education Loan for Abroad Studies: कोलैटरल की सीमा
₹7.5 लाख तक के लोन के लिए, ज्यादातर पब्लिक सेक्टर बैंक CGFSEL या PM-Vidyalaxmi क्रेडिट गारंटी स्कीम के तहत बिना कोलैटरल लोन देते हैं। इससे ज्यादा रकम के लिए आमतौर पर प्रॉपर्टी, FD या दूसरी संपत्ति गिरवी रखनी पड़ती है, पर एक अपवाद भी है। कुछ बैंक प्रीमियम फॉरेन यूनिवर्सिटीज के लिए खास स्कीम्स चलाते हैं, जैसे SBI का Global Ed-Vantage, जिसमें ₹50 लाख तक बिना कोलैटरल मिल सकते हैं, बशर्ते यूनिवर्सिटी उनकी “प्रीमियम लिस्ट” में हो।
Education Loan for Abroad Studies: ब्याज दरें और लोन लिमिट
2026 में, पब्लिक सेक्टर बैंकों की ब्याज दरें आमतौर पर 9.5% से 12.5% के बीच रहती हैं, जबकि प्रीमियम इंस्टीट्यूट्स के लिए स्पेशल स्कीम्स में यह 8.3% तक भी जा सकती है। IBA Model Education Loan Scheme के तहत, भारत या विदेश के लिए ₹1.5 करोड़ तक फाइनेंसिंग मिल सकती है, और कुछ बैंकों में कोलैटरल के साथ यह लिमिट ₹3 करोड़ तक भी जाती है।

Education Loan for Abroad Studies: सरकारी सब्सिडी का फायदा
जिन परिवारों की सालाना आय ₹8 लाख तक है, उन्हें ब्याज पर सब्सिडी मिल सकती है- ₹4.5 से ₹8 लाख आय वालों के लिए यह सब्सिडी 3% तक होती है। यह आवेदन Vidya Lakshmi पोर्टल के जरिए किया जा सकता है, जो सभी सरकार-समर्थित एजुकेशन लोन स्कीम्स को एक जगह लाता है।
एक जरूरी अपडेट भी जान लें, माइनॉरिटी स्टूडेंट्स के लिए चलने वाली “Padho Pardesh” इंटरेस्ट सब्सिडी स्कीम को हाल ही में बंद कर दिया गया है, इसलिए अगर पुरानी जानकारी के आधार पर प्लान बना रहे हों, तो इसे दोबारा वेरिफाई कर लें।
Education Loan for Abroad Studies: मोरेटोरियम और रीपेमेंट
ज्यादातर लोन्स में कोर्स के दौरान EMI शुरू नहीं होती, और ग्रेजुएशन या नौकरी मिलने के बाद 6 से 12 महीने की अतिरिक्त छूट (मोरेटोरियम) मिलती है। इस दौरान ब्याज जमा होता रहता है, इसलिए संभव हो तो कोर्स के दौरान ही थोड़ा-थोड़ा ब्याज चुकाते रहना, बाद के EMI बोझ को काफी हल्का कर सकता है।
Education Loan for Abroad Studies: जरूरी दस्तावेज
यूनिवर्सिटी से एडमिशन/ऑफर लेटर, को-एप्लीकेंट (आमतौर पर माता-पिता) की इनकम प्रूफ और क्रेडिट हिस्ट्री, 12वीं और ग्रेजुएशन की मार्कशीट्स (आमतौर पर 60%+ अंक बेहतर मौका देते हैं), और अगर कोलैटरल दे रहे हों तो प्रॉपर्टी या FD के दस्तावेज। आवेदन से पहले कम से कम 3-4 बैंकों की दरें और शर्तें जरूर तुलना करें, क्योंकि फर्क लाखों में हो सकता है।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. बिना कोलैटरल कितना Education Loan for Abroad Studies मिल सकता है?
आमतौर पर ₹7.5 लाख तक, पर प्रीमियम यूनिवर्सिटीज के लिए कुछ बैंकों की खास स्कीम्स में यह ₹50 लाख तक भी जा सकता है।
2. 2026 में ब्याज दरें कितनी हैं?
पब्लिक सेक्टर बैंकों में 9.5% से 12.5%, प्रीमियम इंस्टीट्यूट्स की स्पेशल स्कीम्स में 8.3% तक भी संभव है।
3. सरकारी ब्याज सब्सिडी कौन ले सकता है?
₹8 लाख तक सालाना आय वाले परिवार, ₹4.5-8 लाख की आय पर 3% तक सब्सिडी मिल सकती है, Vidya Lakshmi पोर्टल के जरिए।
4. मोरेटोरियम पीरियड क्या है?
कोर्स के दौरान और ग्रेजुएशन/नौकरी के बाद 6-12 महीने तक EMI शुरू नहीं होती, पर ब्याज जमा होता रहता है।
5. कोलैटरल न देने पर कितना नुकसान होता है?
हमारे उदाहरण के मुताबिक, ₹20 लाख के लोन पर सिर्फ ब्याज दर के फर्क से ही 10 साल में करीब ₹4 लाख ज्यादा चुकाने पड़ सकते हैं।
आगे और समाचार पढ़ें:
- Free Digital Marketing Course: ये हैं टॉप 5 सर्टिफिकेशन कोर्सेस जो आपके लिए मददगार है!
- Digital Marketing क्या है? ये क्यों जरूरी है? जानिए इसके बारे में सबकुछ!
- Google AI Overviews से SEO पर क्या असर पड़ रहा है? जानें पूरी सच्चाई
यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और यह कोई फाइनेंशियल सलाह नहीं है। ब्याज दरें और स्कीम्स समय के साथ बदलती रहती हैं, इसलिए आवेदन से पहले संबंधित बैंक की मौजूदा जानकारी जरूर चेक करें।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

