CHANDRAYAAN 5: इसरो ने भारत के चंद्रयान-5 मिशन को मंजूरी दे दी है। यह मिशन 2028-29 तक लॉन्च किया जा सकता है और इसे जापान की अंतरिक्ष एजेंसी JAXA के साथ मिलकर पूरा किया जाएगा। चंद्रयान-5 मिशन में 250 किलोग्राम का भारी रोवर होगा, जो चंद्रयान-3 के प्रज्ञान रोवर से 10 गुना भारी होगा। इस रोवर में अत्याधुनिक तकनीक का इस्तेमाल किया जाएगा, जिससे चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव का गहन अध्ययन संभव होगा।

CHANDRAYAAN 5 की इतनी होगी लागत
इसरो के अनुसार चंद्रयान-5 मिशन की योजना चंद्रयान-4 के बाद बनाई गई है। चंद्रयान-4 को 2027 में लॉन्च किया जाएगा, जिसका मुख्य उद्देश्य चंद्रमा की मिट्टी और चट्टानों के नमूने इकट्ठा कर उन्हें पृथ्वी पर लाना होगा। चंद्रयान-4 मिशन के लिए कैबिनेट ने सितंबर 2024 में मंजूरी दी थी, जिसकी लागत 2104 करोड़ रुपये होगी। इस मिशन में पांच मॉड्यूल होंगे, जिनमें लूनर सैंपल कलेक्शन और री-एंट्री मॉड्यूल शामिल हैं। इस मिशन में दो अलग-अलग रॉकेट – LVM-3 और PSLV – का इस्तेमाल होगा।

CHANDRAYAAN 5 मिशन का मुख्य उद्देश्य चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर संभावित बसावट की जांच करना होगा। इस मिशन के तहत भेजे जाने वाले लैंडर का वजन 26 टन तक हो सकता है। CHANDRAYAAN 5 मिशन चंद्रमा के स्थायी रूप से अंधेरे में रहने वाले हिस्से का अध्ययन करेगा, जहां तापमान बेहद कम होता है। इसरो वैज्ञानिक इस मिशन के लिए आधुनिक वैज्ञानिक उपकरण विकसित कर रहे हैं, जिनमें ग्राउंड पेनिट्रेटिंग रडार, मिड-इन्फ्रारेड स्पेक्ट्रोमीटर और रमन स्पेक्ट्रोमीटर शामिल होंगे। ये उपकरण चंद्रमा की सतह की संरचना और पानी की संभावित मौजूदगी का अध्ययन करेंगे।

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