एक बार फिर सीबीआई ने बढ़ा दी तेजस्वी की मुश्किलें, आईआरसीटीसी घोटाले में ट्रायल तेजी से चलाने की मांग

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एक तरफ बिहार में आज नीतीश कुमार सरकार का कैबिनेट विस्तार होने जा रहा है, वही दूसरी तरफ सीबीआई आरजेडी की मुश्किलें बढ़ने वाली है। सीबीआई आईआरसीटीसी होटल घोटाले में तेजी से ट्रायल चलाने कि तैयारी में लग चुकी है। सीबीआई ने इस केस में जो अपनी चार्ज शीट दायर की है, उसके मुताबिक तेजस्वी यादव, लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी को आरोपी है। इनके  अलावा 11 अन्य लोगों के नाम इस घोटाले में शामिल किये गए हैं। आपको बता दें कि स्पेशल सीबीआई के द्वारा 4 साल पहले चार्जशीट दाखिल की गई थी, अब फिर इस मामले में बहस शुरू हो गई है।

ट्रायल देरी से शुरू हुआ

फरवरी 2019 में इस मामले में फंसे एक आरोपी के द्वारा सीबीआई के एक्शन को दिल्ली हाई कोर्ट में चुनौती दी गई थी। उनका कहना था कि सीबीआई ने बिना सरकार की मंजूरी के इस मामले में उनका नाम दायर कर लिया। बता दें कि चार्जशीट का संज्ञान लिए जाने को भी चुनौती दी गई थी। इसी के कारण ट्रायल देरी से शुरू हुआ था और इसी मामले पर अब फिर से बहस शुरू हो चुकी है। 

2018 में चार्जशीट दाखिल की गई

जानकारी मिल रही है कि पिछले हफ्ते ही सीबीआई के द्वारा दिल्ली हाई कोर्ट में अर्जी दाखिल की जा चुकी है और बता दें कि सीबीआई के द्वारा लालू यादव और उनके परिवार पर और इसी के साथ अन्य आरोपियों के खिलाफ जुलाई, 2017 में केस दाखिल किया था। इस मामले में करीब एक साल तक जांच चली थी जिसके बाद सीबीआई के द्वारा अप्रैल 2018 में चार्जशीट दाखिल की गई थी।

टेंडर के नियमों को बदलने का लगा आरोप

आईआरसीटीसी होटल घोटाले का मामला 2004 का है, उस समय लालू प्रसाद यादव यूपीए सरकार में रेल मंत्री के पद पर थे। उस समय लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी और राबड़ी देवी पर आरोप लगाया गया था कि इन्होंने टेंडर के नियमों को बदल दिया और गलत तरीके से आईआरसीटीसी के होटलों का आबंटन किया था। सीबीआई का कहना है कि लालू प्रसाद यादव आईआरसीटीसी के अधिकारियों के जरिए पटना में चाणक्य और सूरज होटल के मालिकों से मिले थे। उनकी तरफ से यह गलत किया गया व्यवहार था। उनकी इस मुलाकात में लालू और राबड़ी से जुड़ी कंपनी के लोग भी थे।