नई दिल्ली में आयोजित BRICS Security Meet Delhi के दौरान भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजित डोभाल ने चीन के विदेश मंत्री और ईरान के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं कीं। इस बैठक में India-China Relations, क्षेत्रीय सुरक्षा, आतंकवाद और Middle East War जैसे मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हुई।
BRICS देशों के बीच रणनीतिक सहयोग को मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित यह बैठक अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भारत की बढ़ती भूमिका को दर्शाती है।
Ajit Doval China Relations: भारत-चीन संबंधों पर विशेष फोकस
Ajit Doval China Relations को लेकर हुई बैठक में दोनों देशों के प्रतिनिधियों ने सीमा क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत और चीन के बीच पिछले कुछ वर्षों में सीमा विवादों के कारण तनाव देखने को मिला है, लेकिन हाल के महीनों में दोनों देशों ने संवाद के माध्यम से रिश्तों को बेहतर बनाने की दिशा में कदम बढ़ाए हैं।
अजित डोभाल और चीन के विदेश मंत्री के बीच हुई बातचीत में सीमा प्रबंधन, व्यापारिक सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रहे। दोनों पक्षों ने इस बात पर सहमति जताई कि संवाद और विश्वास निर्माण के जरिए द्विपक्षीय संबंधों को नई दिशा दी जा सकती है।
India-China Ties को मजबूत करने की दिशा में नई पहल
India-China Ties एशिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के लिए बेहद महत्वपूर्ण हैं। BRICS सुरक्षा बैठक के दौरान भारत और चीन ने आर्थिक सहयोग और बहुपक्षीय मंचों पर समन्वय बढ़ाने पर भी चर्चा की। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि दोनों देश आपसी मतभेदों को कम करने में सफल होते हैं तो इसका सकारात्मक प्रभाव पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र पर पड़ सकता है।
भारत ने स्पष्ट किया कि सीमा पर शांति और स्थिरता ही मजबूत द्विपक्षीय संबंधों की आधारशिला है। वहीं चीन ने भी सहयोग और संवाद की प्रक्रिया को जारी रखने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।
Middle East War पर भारत और ईरान के बीच महत्वपूर्ण चर्चा
Middle East War और क्षेत्रीय अस्थिरता को लेकर अजित डोभाल ने ईरानी अधिकारी से भी अलग से मुलाकात की। इस दौरान पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता पर गहन विचार-विमर्श हुआ।
भारत ने अपनी पारंपरिक नीति के अनुरूप सभी पक्षों से संयम बरतने और कूटनीतिक समाधान तलाशने की अपील दोहराई। ईरानी अधिकारी ने क्षेत्रीय घटनाक्रम पर अपने देश का दृष्टिकोण साझा किया और भारत के साथ रणनीतिक संवाद को और मजबूत करने की इच्छा व्यक्त की।
Iran-India Relations में रणनीतिक सहयोग पर जोर
Iran-India Relations लंबे समय से ऊर्जा, व्यापार और कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर आधारित रहे हैं। BRICS Security Meet Delhi के दौरान हुई चर्चा में दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों और आर्थिक सहयोग के नए अवसरों पर विचार किया।
विशेष रूप से ऊर्जा आपूर्ति, चाबहार बंदरगाह परियोजना और अंतरराष्ट्रीय व्यापार गलियारों को लेकर सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर चर्चा हुई। विशेषज्ञों के अनुसार, वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में भारत और ईरान के बीच रणनीतिक साझेदारी का महत्व और बढ़ गया है।
BRICS Summit 2026 से पहले सुरक्षा सहयोग पर जोर
BRICS Summit 2026 से पहले आयोजित यह सुरक्षा बैठक सदस्य देशों के बीच समन्वय को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। BRICS समूह वैश्विक दक्षिण की आवाज को मजबूत करने और बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए लगातार प्रयासरत है।
बैठक में आतंकवाद विरोधी सहयोग, साइबर सुरक्षा, सीमा-पार अपराध और वैश्विक संघर्षों के प्रभाव जैसे मुद्दों पर भी चर्चा हुई। भारत ने इन सभी क्षेत्रों में साझा रणनीति विकसित करने की आवश्यकता पर बल दिया।
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BRICS Security Meet Delhi का वैश्विक महत्व
BRICS Security Meet Delhi केवल एक क्षेत्रीय बैठक नहीं बल्कि वैश्विक रणनीतिक संवाद का महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरी है। ऐसे समय में जब दुनिया कई भू-राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रही है, BRICS देशों के बीच सहयोग अंतरराष्ट्रीय स्थिरता के लिए अहम माना जा रहा है।
भारत ने बैठक के माध्यम से यह संदेश दिया कि वह वैश्विक शांति, सुरक्षा और आर्थिक विकास के लिए रचनात्मक भूमिका निभाने के लिए प्रतिबद्ध है। चीन और ईरान के साथ हुई उच्चस्तरीय वार्ताएं इस दिशा में महत्वपूर्ण संकेत देती हैं।
निष्कर्ष
नई दिल्ली में आयोजित BRICS Security Meet Delhi ने एक बार फिर भारत की सक्रिय कूटनीति और वैश्विक नेतृत्व क्षमता को प्रदर्शित किया है। Ajit Doval China Relations, India-China Ties, Middle East War, और Iran-India Relations जैसे अहम मुद्दों पर हुई चर्चाओं ने यह स्पष्ट किया कि भारत क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों के समाधान में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने के लिए तैयार है।
आने वाले समय में BRICS देशों के बीच बढ़ता सहयोग न केवल सदस्य देशों बल्कि वैश्विक राजनीतिक और आर्थिक स्थिरता के लिए भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

