Bootstrapping का मतलब है बिना किसी बाहरी निवेशक के, अपनी बचत और कारोबार की कमाई से स्टार्टअप को खड़ा करना और आगे बढ़ाना। कई लोगों के पास अच्छा बिजनेस आइडिया होता है, लेकिन फंडिंग न मिलने के डर से वे शुरुआत ही नहीं कर पाते। सच यह है कि भारत की कई बड़ी कंपनियां बिना निवेशक के पैसे के ही खड़ी हुई हैं।
Bootstrapping का मतलब और यह कैसे काम करता है?
Bootstrapping में संस्थापक अपनी जेब से शुरुआती खर्च उठाता है। कई बार परिवार या दोस्तों से छोटी मदद भी ली जाती है, लेकिन किसी वेंचर कैपिटल फर्म या एंजेल निवेशक को हिस्सेदारी नहीं दी जाती। शुरुआती ग्राहकों से जो कमाई होती है, उसी को दोबारा कारोबार में लगाया जाता है। इसी वजह से इसे खुद के दम पर चलने वाला मॉडल भी कहा जाता है।
बूटस्ट्रैपिंग के बड़े फायदे
सबसे बड़ा फायदा है पूरा मालिकाना हक। कंपनी की पूरी हिस्सेदारी आपके पास रहती है और फैसले लेने के लिए किसी बोर्ड या निवेशक की मंजूरी नहीं चाहिए। दूसरा फायदा है अनुशासन। सीमित पैसे की वजह से हर खर्च सोच समझकर होता है और कंपनी शुरू से ही मुनाफे पर ध्यान देती है। तीसरा फायदा यह है कि आप निवेशकों के दबाव में तेजी से बढ़ने की दौड़ में नहीं फंसते। कारोबार अपनी रफ्तार से मजबूत नींव के साथ बढ़ता है।
Bootstrapping की चुनौतियां भी समझ लें
पैसे की कमी के कारण कारोबार का विस्तार धीमा हो सकता है। बड़े प्रतिस्पर्धी जल्दी बाजार पर कब्जा कर सकते हैं। अपनी बचत लगाने से निजी आर्थिक जोखिम बढ़ जाता है। इसके अलावा संस्थापक को मार्केटिंग से लेकर हिसाब किताब तक कई काम खुद संभालने पड़ते हैं। बिना निवेशक के स्टार्टअप कैसे शुरू करें सबसे पहले एक ऐसी समस्या चुनें जिसके लिए लोग पैसे देने को तैयार हों।
छोटे स्तर पर सर्वे करें या कुछ संभावित ग्राहकों से सीधे बात करें। इसके बाद कम खर्च में एक बुनियादी प्रोडक्ट या सर्विस तैयार करें, जिसे एमवीपी कहा जाता है। पहले दिन से परफेक्ट बनाने की कोशिश में पैसा और समय बर्बाद न करें।
जितनी जल्दी हो सके पहले ग्राहक से कमाई शुरू करें। शुरुआती कमाई ही आपके कारोबार का असली ईंधन होती है। ऑफिस, महंगे उपकरण और बड़ी टीम पर खर्च टालें। घर से काम, फ्रीलांसर और मुफ्त डिजिटल टूल्स से शुरुआत करना समझदारी है।
निजी और कारोबारी खर्च अलग रखें और कम से कम छह महीने के घरेलू खर्च का इमरजेंसी फंड पहले से तैयार रखें। अगर आपका बिजनेस पात्र है, तो डीपीआईआईटी से स्टार्टअप मान्यता लेकर टैक्स छूट, कम अनुपालन और ट्रेडमार्क व पेटेंट फीस में छूट जैसे फायदे उठा सकते हैं।

भारत की मशहूर बूटस्ट्रैप्ड कंपनियां
सॉफ्टवेयर कंपनी ज़ोहो को श्रीधर वेम्बु ने बिना वेंचर कैपिटल फंडिंग के खड़ा किया और आज यह दुनिया भर में कारोबार करती है। ब्रोकिंग प्लेटफॉर्म ज़ेरोधा की शुरुआत नितिन और निखिल कामत ने 2010 में की थी। बाहरी निवेश के बिना यह देश की सबसे बड़ी ब्रोकिंग कंपनियों में शामिल हो गई।
नया कारोबार शुरू करने वालों के लिए ये जानकारियां भी जरूरी हैं
Bootstrapping से कारोबार शुरू करते समय कानूनी और वित्तीय तैयारी भी अहम है। इसके लिए ये गाइड पढ़ें: स्टार्टअप्स के लिए एंजेल टैक्स छूट, कारोबारी खर्च संभालने में बिजनेस क्रेडिट कार्ड की भूमिका और अपने ब्रांड के लिए सही ट्रेडमार्क क्लास कैसे चुनें।
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल
1. Bootstrapping से स्टार्टअप शुरू करने के लिए कितने पैसे चाहिए?
इसकी कोई तय रकम नहीं है। सर्विस आधारित कारोबार कुछ हजार रुपये में भी शुरू हो सकता है, जबकि प्रोडक्ट आधारित कारोबार में ज्यादा पूंजी लगती है।
2. क्या Bootstrapping के बाद निवेशक से फंडिंग ली जा सकती है?
हां, कई कंपनियां पहले खुद के दम पर कारोबार साबित करती हैं और बाद में बेहतर शर्तों पर निवेश लेती हैं।
3. क्या बिना निवेशक के शुरू हुई कंपनी बड़ी बन सकती है?
हां, ज़ोहो और ज़ेरोधा जैसी कंपनियां इसका बड़ा उदाहरण हैं।
4. स्टार्टअप मान्यता और सरकारी फायदों की जानकारी कहां मिलेगी?
इसकी पूरी जानकारी स्टार्टअप इंडिया के आधिकारिक पोर्टल पर उपलब्ध है।
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