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Trademark Class क्या है, अपने बिजनेस के लिए सही क्लास कैसे चुनें?

बिजनेस के लिए ब्रांड नाम या लोगो रजिस्टर कराते समय सबसे ज्यादा उलझन Trademark Class को लेकर होती है। अगर गलत क्लास चुन ली जाए, तो आवेदन रिजेक्ट भी हो सकता है और पूरी प्रक्रिया दोबारा करनी पड़ सकती है। आइए इसे शुरू से आखिर तक आसान भाषा में समझते हैं, ताकि अपने बिजनेस के लिए सही क्लास चुनना आसान हो जाए।

Trademark Class क्या है?

Trademark Class असल में एक वर्गीकरण प्रणाली है, जिसके तहत हर तरह के प्रोडक्ट और सर्विस को अलग-अलग समूहों में बांटा गया है। भारत में यह निज़ा वर्गीकरण यानी NICE Classification पर आधारित है, जिसमें कुल 45 श्रेणियां होती हैं।

इनमें से पहली 34 श्रेणियां वस्तुओं यानी गुड्स के लिए होती हैं, जबकि 35 से 45 तक की श्रेणियां सेवाओं यानी सर्विसेज के लिए तय की गई हैं। हर बिजनेस को अपने प्रोडक्ट या सर्विस के अनुसार सही श्रेणी चुननी होती है।

Trademark Class कैसे काम करता है?

जब भी कोई ब्रांड रजिस्टर कराया जाता है, तो सबसे पहले यह तय करना होता है कि वह किस तरह के प्रोडक्ट या सर्विस से जुड़ा है। उदाहरण के लिए कपड़ों का बिजनेस क्लास 25 में आता है, जबकि रेस्टोरेंट सर्विस क्लास 43 में आती है। Trademark Class चुनते समय सिर्फ मुख्य बिजनेस ही नहीं, बल्कि उससे जुड़े अन्य उत्पाद और सेवाएं भी ध्यान में रखनी चाहिए।

अगर कोई कंपनी कपड़े भी बेचती है और ऑनलाइन रिटेल सेवा भी देती है, तो दोनों के लिए अलग-अलग क्लास की जरूरत पड़ सकती है। हर क्लास के अंदर सैकड़ों उत्पाद और सेवाएं सूचीबद्ध होती हैं, जिन्हें आधिकारिक वेबसाइट पर देखा जा सकता है। सही क्लास चुनने से पहले इस सूची की जांच जरूर करनी चाहिए, ताकि आवेदन में कोई गलती न हो।

सही क्लास कैसे चुनें?

सबसे पहले अपने बिजनेस की मुख्य गतिविधि पहचानें और उसी के अनुसार Trademark Class तय करें। अगर भविष्य में बिजनेस का विस्तार होने की संभावना है, तो शुरुआत में ही संबंधित क्लास भी शामिल करना बेहतर रहता है।

बड़ी कंपनियां अक्सर एक से ज्यादा क्लास में आवेदन करती हैं, ताकि उनका ब्रांड नाम अलग-अलग क्षेत्रों में सुरक्षित रहे। इससे भविष्य में किसी दूसरे बिजनेस द्वारा मिलता-जुलता नाम इस्तेमाल करने का खतरा भी कम हो जाता है।

Trademark Class
Trademark Class

ध्यान रखने योग्य बातें

गलत क्लास चुनने पर आवेदन रिजेक्ट हो सकता है या फिर सुरक्षा अधूरी रह सकती है, इसलिए क्लास चुनते समय जल्दबाजी नहीं करनी चाहिए। जरूरत पड़ने पर ट्रेडमार्क विशेषज्ञ या वकील की सलाह लेना फायदेमंद रहता है। यह भी ध्यान रखें कि एक ही नाम अलग-अलग क्लास में अलग-अलग लोगों के नाम पहले से रजिस्टर हो सकता है, इसलिए आवेदन से पहले खोज जरूर कर लें।

साथ ही हर अतिरिक्त क्लास के लिए अलग फीस भी देनी होती है, इसलिए बजट का ध्यान रखना जरूरी है। एक और जरूरी बात यह है कि क्लास चुनने के बाद उसमें बदलाव करना आसान नहीं होता, इसलिए शुरुआत में ही सावधानी से फैसला लेना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

सवाल: क्या एक आवेदन में कई क्लास शामिल की जा सकती हैं?
जवाब: हां, लेकिन हर अतिरिक्त क्लास के लिए अलग से आवेदन शुल्क देना होता है।

सवाल: सही क्लास न चुनने पर क्या होता है?
जवाब: गलत क्लास में आवेदन करने पर सुरक्षा उस क्षेत्र में नहीं मिलती, जहां असल में जरूरत थी।

सवाल: क्या सेवाओं के लिए भी अलग क्लास होती हैं?
जवाब: हां, क्लास 35 से 45 तक सेवाओं के लिए ही निर्धारित की गई हैं।

सवाल: क्या स्टार्टअप को एक से ज्यादा क्लास लेनी चाहिए?
जवाब: अगर भविष्य में विस्तार की योजना है, तो संबंधित क्लास पहले से शामिल करना बेहतर रहता है।

सवाल: सही क्लास कैसे खोजी जा सकती है?
जवाब: आधिकारिक वर्गीकरण सूची में उत्पाद या सेवा का नाम खोजकर सही क्लास पहचानी जा सकती है। अधिक जानकारी के लिए IP India की वेबसाइट पर विजिट करें।

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उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है। सटीक कानूनी सलाह के लिए किसी योग्य वकील या IP विशेषज्ञ से संपर्क करें।

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