Bank Locker Charges को लेकर ज्यादातर लोगों को सिर्फ इतना पता होता है कि सालाना कुछ पैसे देने पड़ते हैं। असल में इससे कहीं ज्यादा जानना जरूरी है — RBI के 2022 के revised guidelines ने locker से जुड़ी देनदारी, नॉमिनेशन और सिक्योरिटी के नियम पूरी तरह बदल दिए हैं। यहां हम Bank Locker Charges, बैंकों के हिसाब से दरें, और जरूरी नियम — सब कुछ बता रहे हैं।
Bank Locker Charges: साइज और लोकेशन पर निर्भर
Bank Locker Charges एक जैसे नहीं होते — यह लोकर के साइज (स्मॉल, मीडियम, लार्ज, एक्स्ट्रा लार्ज) और ब्रांच की लोकेशन कैटेगरी (मेट्रो प्लस, मेट्रो, अर्बन, सेमी-अर्बन, रूरल) पर निर्भर करते हैं।
उदाहरण के लिए, SBI मेट्रो/अर्बन ब्रांच में स्मॉल लॉकर के लिए ₹2,000 + GST लेता है, जबकि रूरल/सेमी-अर्बन में यह ₹1,500 + GST तक आता है।
प्लैटिनम सैलरी अकाउंट होल्डर्स को इस पर 25% तक की छूट भी मिल सकती है।
Bank Locker Charges के अलावा और क्या खर्च आता है
- रजिस्ट्रेशन फीस: एक बार का करीब ₹400 + GST
- ऑपरेशन चार्ज: साल में 12 बार तक फ्री, इसके बाद हर बार ₹100 + GST
- सिक्योरिटी डिपॉजिट: कई बैंक 3 साल के रेंट + ब्रेक-ओपन चार्ज के बराबर फिक्स्ड डिपॉजिट मांगते हैं
यह सिक्योरिटी डिपॉजिट लॉकर खोलते समय एकतरफा नहीं होता — बैंक इसे बाद में एडजस्ट या रिफंड कर देता है।
Bank Locker Charges के साथ RBI के जरूरी नियम
2022 में RBI ने locker से जुड़े नियमों में बड़े बदलाव किए।
अब हर बैंक को IBA के मॉडल एग्रीमेंट पर आधारित एक नया एग्रीमेंट साइन कराना अनिवार्य है, जिसमें रेंट, नॉमिनेशन और लायबिलिटी साफ-साफ लिखी होनी चाहिए।
बैंक की देनदारी की सीमा भी तय है — स्मॉल लॉकर के लिए ₹1 लाख, मीडियम के लिए ₹5 लाख, और लार्ज के लिए ₹10 लाख (जब तक ज्यादा रकम का अलग से भुगतान न किया गया हो)।
Bank Locker Charges चुकाने के बाद बैंक की जिम्मेदारी
अगर बैंक की लापरवाही (चोरी, आग, या कर्मचारी की धोखाधड़ी) से लॉकर का सामान खो जाए, तो बैंक को मौजूदा सालाना रेंट का 100 गुना मुआवजा देना पड़ता है।
ध्यान रहे, सामान्य चोरी या डकैती में बैंक की लापरवाही साबित करनी पड़ती है — सिर्फ नुकसान होने से ऑटोमैटिक मुआवजा नहीं मिलता।
क्या लॉकर में कैश रखा जा सकता है
नहीं। RBI के नियम के अनुसार, बैंक लॉकर में नकदी रखना सख्त मना है।
इसका इस्तेमाल सिर्फ गहने, जरूरी दस्तावेज, प्रॉपर्टी पेपर्स जैसी चीजों के लिए किया जा सकता है। Bank Locker Charges चुकाने के बावजूद, कैश रखने पर बैंक कोई जिम्मेदारी नहीं लेता।
लंबे समय तक इस्तेमाल न करने पर क्या होता है
अगर लॉकर लगातार 3 साल तक इस्तेमाल नहीं होता (या “इनऑपरेटिव” घोषित होने पर 2 साल), तो बैंक इसे ब्रेक-ओपन कर सकता है।
इससे पहले बैंक को 30 दिन के गैप के साथ दो लिखित नोटिस भेजने होते हैं, फिर 15 दिन पहले एक फाइनल नोटिस।
ब्रेक-ओपन प्रक्रिया दो अधिकारियों और एक गवाह की मौजूदगी में, वीडियो रिकॉर्डिंग के साथ होती है।
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अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQ)
1. Bank Locker Charges में GST शामिल होता है?
नहीं, ज्यादातर बैंकों के रेंट में GST अलग से जुड़ता है।
2. क्या लॉकर बंद करने पर कोई चार्ज लगता है?
नहीं, लॉकर बंद करने पर कोई फीस नहीं लगती, बल्कि बची हुई एडवांस रेंट रिफंड कर दी जाती है।
3. क्या बैंक लॉकर की इंश्योरेंस लेना जरूरी है?
नहीं, RBI के नियमों के अनुसार बैंक इंश्योरेंस खरीदने के लिए जबरदस्ती नहीं कर सकते — यह पूरी तरह वैकल्पिक है।
4. नॉमिनी कितनी बार बदला जा सकता है?
साल में एक बार नॉमिनी बदलना फ्री होता है।
5. क्या Bank Locker Charges सभी ब्रांच में एक जैसे होते हैं?
नहीं, यह ब्रांच की लोकेशन कैटेगरी (मेट्रो, अर्बन, सेमी-अर्बन, रूरल) के हिसाब से अलग-अलग होते हैं।
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यह लेख सामान्य जानकारी के लिए है और यह कोई वित्तीय सलाह नहीं है। लॉकर चार्ज और नियम बैंक और ब्रांच के हिसाब से बदलते हैं, इसलिए आवेदन से पहले बैंक की आधिकारिक वेबसाइट पर मौजूदा जानकारी जरूर चेक करें।
उपरोक्त जानकारी गूगल और विभिन्न वेबसाइट/समाचार माध्यमों से ली गई है। सटीकता की गारंटी नहीं है।

